Nitish Kumar Rajya Sabha Plan

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बिहार के CM नीतीश कुमार ने 5 मार्च 2026 को राज्यसभा के लिए अपना नामांकन दाखिल कर दिया। साथ ही ये तय हो गया कि अब नीतीश कुमार बिहार की राजनीति को अलविदा कह देश की राजनीति करेंगे। उन्होंने अपने पद से इस्तीफा नहीं दिया है, लेकिन तय है कि किसी भी वक्त CM

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नीतीश कुमार पिछले करीब 20 साल से राज्य के मुख्यमंत्री रहे हैं। क्या उन्होंने अचानक राज्यसभा जाने का निर्णय ले लिया? क्या इसकी तैयारी पहले से चल रही थी? जिस पार्टी के कारण केंद्र की सत्ता स्थिर है और राज्य में जो सेकेंड लार्जेस्ट पार्टी है, उसपर कोई दबाव बना सकता है क्या? 3 पॉइंट में इन सारे सवालों के जवाब पढ़िए…

जैसा अचानक सब होता हुआ दिख रहा है, ऐसा है नहीं। इसकी नीतीश के शपथ ग्रहण समारोह के साथ ही शुरू हो गई थी। इस पर अंतिम मुहर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के तीन दिवसीय सीमांचल दौरे के दौरान लगी। इसे क्रमवार तरीके से समझिए…

राज्यसभा के लिए नामांकन के बीच इस तस्वीर की सोशल मीडिया पर खूब चर्चा रही। इसमें नीतीश की कुर्सी गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की कुर्सी से छोटी दिख रही है।

राज्यसभा के लिए नामांकन के बीच इस तस्वीर की सोशल मीडिया पर खूब चर्चा रही। इसमें नीतीश की कुर्सी गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की कुर्सी से छोटी दिख रही है।

1- सीमांचल में तय हुई CM को बदलने की रुपरेखा

तारीख 25 फरवरी 2026

बिहार के सबसे आखिरी जिला किशनगंज। यहां देश के गृहमंत्री अमित शाह का स्पेशल प्लेन लैंड करता है। दिन में वे एसएसबी, आईबी और कई खुफिया विभाग के डीजी रैंक के अधिकारियों के साथ सीमाई इलाकों की समीक्षा करते हैं। यह उनकी अधिकारिक बैठक थी।

इसके बाद देर रात एक सीक्रेट मीटिंग पार्टी के भरोसेमंद नेता और मौजूदा सरकार में मंत्री दिलीप जायसवाल के आवास पर होती है। इसमें कोई अधिकारी नहीं, केवल बिहार में पार्टी के टॉप लीडर शामिल होते हैं। मुख्य रूप से डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी, बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी, मंत्री दिलीप जायसवाल, केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय समेत अन्य नेता शामिल होते हैं।

इस मीटिंग में शामिल रहे एक नेता ने भास्कर को नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि बंगाल चुनाव और सीमाई मुद्दे की समीक्षा करने आए गृह मंत्री ने अचानक बिहार के बड़े भाजपा नेताओं के साथ बैठक क्यों की थी।

नीतीश कुमार को राज्यसभा भेजने के निर्णय में यह बैठक एक अहम पड़ाव था। बैठक में बिहार भाजपा के नेताओं ने गृह मंत्री से कहा, ‘सर, बिहार में अफसर चला रहे सरकार’। इसमें सरकार की कमियों और परेशानियों पर डिटेल्ड चर्चा हुई थी। ऐसा माना जा रहा है कि यहां अमित शाह ने नीतीश के एग्जिट प्लान पर डिटेल से चर्चा की।

26 फरवरी को किशनगंज के माता गुजरी विश्वविद्यालय परिसर में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी से मिले थे।

26 फरवरी को किशनगंज के माता गुजरी विश्वविद्यालय परिसर में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी से मिले थे।

2- दिल्ली में JDU के टॉप लीडर के साथ मंत्रणा

सीमांचल में बिहार बीजेपी से फीडबैक और पार्टी के निर्णय पर चर्चा के बाद अमित शाह ने JDU के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा और केंद्रीय मंत्री ललन सिंह के साथ एक सप्ताह में लगभग 4 राउंड की मीटिंग की।

बताया जा रहा है कि इस मीटिंग में सरकार की आगे की तस्वीर के साथ नीतीश कुमार को मनाने की जिम्मेदारी भी इन्हीं दोनों नेताओं को गई थी। इसके बाद यह सब तय हुआ।

संजय झा हर बार शाह से मीटिंग के बाद सीएम हाउस पहुंचे। उन्होंने सारी जानकारी दी, फिर वापस लौट गए। सूत्रों के मुताबिक, संजय झा ने इसके बाद पटना के दो बड़े नेताओं को नीतीश कुमार को समझाने की जिम्मेदारी सौंपी।

बीच-बीच में ललन सिंह भी नीतीश कुमार से मिले। होली से दो दिन पहले नीतीश ने राज्यसभा जाने पर हामी भर दी, लेकिन फिर बीच में परिवारवालों के कहने पर प्लान बदल दिया।

जैसे-जैसे नामांकन की तारीख नजदीक आ रही थी JDU के अंदर गहमागहमी बनी हुई थी। मीडिया में चर्चा शुरू हुई तो बोला गया कि बुधवार की शाम 6 बजे तक सब क्लियर कर दिया जाएगा। लेकिन नीतीश के परिवारवाले सीएम पद नहीं छोड़ने पर अड़ गए।

इसके बाद शाम में राज्यसभा उम्मीदवारों के नाम के ऐलान को रोक दिया गया। नामांकन से पहले वाली रात सीएम हाउस में खूब मंथन हुआ। बाद में नीतीश कुमार ने कह दिया कि हमने भाजपा से कमिटमेंट कर दिया है, इसलिए अब हम जाएंगे।

गुरुवार सुबह नीतीश कुमार ने खुद X पर पोस्ट कर राज्यसभा जाने का ऐलान किया।

3- अब समझिए इस्तीफे के लिए अभी की टाइमिंग क्यों

टाटा इंस्टीट्यूट्स ऑफ सोशल साइंसेज के पटना सेंटर के चेयरपर्सन रहे पुष्पेंद्र बताते हैं, ’चुनाव में 89 सीटें जीतने के साथ ही BJP उन्हें स्वीकार करने के मूड में नहीं थी। लेकिन शपथ ग्रहण के 105 दिन के भीतर ही उन्हें हटा देगी, ये किसी को स्वीकार नहीं हो रहा। इससे ऐसा लगता है कि CM का कोई कमजोर नस दब गया है, लेकिन वो क्या है ये केवल बीजेपी और नीतीश कुमार को ही मालूम होगा।’

वहीं, सीनियर जर्नलिस्ट सुकेश रंजन बताते हैं, ’ये समझना मुश्किल है कि अभी का वक्त क्यों चुना गया। उनके हेल्थ को देखते हुए सभी को पता था कि वे लंबे समय तक सीएम नहीं रहेंगे। लेकिन ऐसा लग रहा था कि वे इतने वक्त तक तो सीएम रह ही जाएंगे कि उनके बेटे निशांत पॉलिटिक्स में एस्टैब्लिश हो जाएंगे।’

अब नीतीश की कुर्सी छोड़ने के 3 कारण समझिए

1. सीएम बस चेहरा, अधिकारियों की लॉबी चला रही थी सरकार

मौजूदा समय में नीतीश कुमार भले बिहार के CM थे, लेकिन पूरी सरकार अधिकारियों की लॉबी चला रही थी। नीतीश कहां जाएंगे, कितनी देर रुकेंगे, किससे मिलेंगे, ये सब अधिकारी तय कर रहे थे। ये अब सार्वजनिक हो गया था कि नीतीश कुमार अधिकारियों के चंगुल में फंस गए थे।

इसका खामियाजा ये हो रहा था कि अधिकारी मनमानी कर रहे थे। वे मंत्री और विधायक स्तर के नेता तक को भाव नहीं दे रहे थे। इसके बाद NEET छात्रा के साथ रेप-हत्या मामले में जिस तरह से सरकार पूरी तरह बैकफुट पर रही, इससे भी सरकार पर कई सवाल खड़े हुए।

2. CM के हेल्थ पर उठ रहे थे सवाल, विधानसभा में हुई थी किरकिरी

CM नीतीश कुमार की हालिया एक्टिविटी से भी लगातार उनकी छवि पर सवाल उठ रहे थे। जैसे- विधानसभा में बजट सत्र के दौरान राबड़ी देवी को लड़की कहना, मेज थपथपाने की जगह मंत्रियों को ताली बजाने की सलाह देना हो या फिर अन्य हरकतें।

यही कारण था कि किसी भी सार्वजनकि कार्यक्रम में मीडिया को उनसे दूर रखा जा रहा था। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव लगातार अचेत मुख्यमंत्री बताकर नीतीश कुमार पर हमला कर रहे थे।

नीतीश कुमार ने गुरुवार को राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल किया। इस दौरान उनके साथ केंद्रीय गृह मंत्री अमित, डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी, विजय सिन्हा, समेत कई बड़े नेता मौजूद थे।

नीतीश कुमार ने गुरुवार को राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल किया। इस दौरान उनके साथ केंद्रीय गृह मंत्री अमित, डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी, विजय सिन्हा, समेत कई बड़े नेता मौजूद थे।

3. जब तक कुर्सी पर रहते, बेटे की पॉलिटिकल लॉन्चिंग संभव नहीं थी

नीतीश कुमार परिवारवाद के खिलाफ रहे हैं। उनकी पूरी राजनीति इसी के इर्दगिर्द रही है। 2025 विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने परिवारवाद को लेकर लालू-राबड़ी परिवार हर तंज कसा था।

यही कारण है कि निशांत की पॉलिटिकल लॉन्चिंग की सलाह को वे हमेशा से नजरअंदाज करते रहे हैं। नीतीश कुमार के करीबी और परिवार से जुड़े लोग लगातार इस बात की डिमांड कर रहे थे कि निशांत को पॉलिटिक्स में लॉन्च किया जाय।

ऐसे में नीतीश कुमार इस बात को अच्छे से जानते थे कि मौजूदा हालात में जब तक वे बिहार की सियासत में बने रहेंगे निशांत की सेफ लैंडिंग संभव नहीं थी। यही कारण है कि बेटे को पॉलिटिक्स से दूर रखने वाले नीतीश कुमार अपना पद छोड़ने के लिए राजी हो गए।

पॉलिटिकल एक्सपर्ट बताते हैं कि नीतीश जानते थे कि अगर वे कुर्सी नहीं छोड़ते तो जदयू के अंदर विद्रोह और भाजपा का दबाव बढ़ता जाता। अब जब नीतीश CM की कुर्सी छोड़ने जा रहे हैं तो यह तय माना जा रहा है कि BJP निशांत को डिप्टी CM बना सकती है। इसका दो फायदा होगा। निशांत के नाम पर पार्टी एकजुट रहेगी और वह पॉलिटिक्स में सेट हो जाएंगे।

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