नियोजित शिक्षकों के शैक्षणिक और प्रशिक्षण प्रमाण-पत्रों की जांच में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े का खुलासा हो रहा है। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की जांच में अब तक हजारों प्रमाण-पत्रों की जांच हो चुकी है और कई शिक्षकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।
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Teacher News/7.3.26: नियोजित शिक्षकों के शैक्षणिक और प्रशिक्षण प्रमाण-पत्रों की जांच में लगातार फर्जीवाड़े का खुलासा हो रहा है। Bihar Vigilance Investigation Bureau द्वारा की जा रही जांच में अब तक हजारों शिक्षकों के दस्तावेजों की जांच की जा चुकी है और बड़ी संख्या में फर्जी प्रमाण-पत्र सामने आए हैं। इसके बाद संबंधित शिक्षकों के खिलाफ विभिन्न जिलों में प्राथमिकी दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के अनुसार जनवरी 2026 से 28 फरवरी 2026 तक जांच और सत्यापन की प्रक्रिया के बाद 31 नए मामलों में एफआईआर दर्ज की गई है। इन मामलों में कुल 31 शिक्षकों को आरोपी बनाया गया है। अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई नियोजित शिक्षकों के प्रमाण-पत्रों के व्यापक सत्यापन अभियान का हिस्सा है, जो पिछले कई वर्षों से जारी है।
ब्यूरो द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार इस मामले में शुरुआत से अब तक कुल 1748 प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी हैं। इन मामलों में कुल 2953 शिक्षक और शिक्षिकाओं को आरोपी बनाया गया है। जांच के दौरान कई शिक्षकों के अंक-पत्र, प्रशिक्षण प्रमाण-पत्र और अन्य शैक्षणिक दस्तावेज फर्जी पाए गए, जिसके बाद उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की गई।
यह पूरी जांच Patna High Court के निर्देश के बाद शुरू की गई थी। दरअसल Ranjit Pandit vs State of Bihar मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने वर्ष 2006 से 2015 के बीच नियुक्त सभी नियोजित शिक्षकों के शैक्षणिक और प्रशिक्षण प्रमाण-पत्रों की जांच कराने का आदेश दिया था। इसी आदेश के तहत निगरानी अन्वेषण ब्यूरो द्वारा राज्यभर में व्यापक जांच अभियान चलाया जा रहा है।
ब्यूरो की रिपोर्ट के अनुसार 28 फरवरी 2026 तक कुल 6,67,144 शिक्षकों के प्रमाण-पत्रों का सत्यापन किया जा चुका है। इस जांच में कई मामलों में दस्तावेजों में गड़बड़ी और फर्जीवाड़ा सामने आया। इसके बाद संबंधित शिक्षकों के खिलाफ राज्य के अलग-अलग जिलों में एफआईआर दर्ज की गई।
यदि वर्षवार आंकड़ों पर नजर डालें तो इस मामले में लगातार कार्रवाई जारी रही है। वर्ष 2015 में 67 एफआईआर दर्ज की गई थीं, जिनमें 186 लोगों को आरोपी बनाया गया था। वर्ष 2016 में 109 मामलों में 288 लोग आरोपित बने। वहीं 2017 में 75 मामलों में 257, 2018 में 69 मामलों में 395 और 2019 में 121 एफआईआर में 370 लोगों को आरोपी बनाया गया।
इसके बाद वर्ष 2020 में 66 मामलों में 126, वर्ष 2021 में 181 मामलों में 263 और वर्ष 2022 में सबसे अधिक 445 मामलों में 453 लोगों को आरोपी बनाया गया। वर्ष 2023 में 337 एफआईआर दर्ज की गईं, जिनमें 337 लोग आरोपी बने। वहीं वर्ष 2024 में 111 और वर्ष 2025 में 136 मामलों में प्राथमिकी दर्ज की गई।




