Friday, May 1, 2026

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किशनगंज के पूर्व डीपीओ पर 40 करोड़ का घोटाला साबित:रिटायरमेंट के बाद पेंशन में 25% की स्थायी कटौती की सजा


किशनगंज शिक्षा विभाग के तत्कालीन जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (डीपीओ) राजेश कुमार सिन्हा पर 40 करोड़ रुपए से अधिक की वित्तीय अनियमितता का आरोप प्रमाणित हुआ है। इस मामले में राज्य सरकार ने उनके रिटायरमेंट के बाद पेंशन में आजीवन 25 प्रतिशत की स्थायी कटौती का आदेश जारी किया है। शिक्षा विभाग ने इस संबंध में आधिकारिक संकल्प जारी कर दिया है। यह मामला किशनगंज के तत्कालीन जिलाधिकारी द्वारा 21 जून 2024 को शिक्षा विभाग को भेजी गई एक विस्तृत रिपोर्ट के बाद सामने आया। सरकारी योजनाओं में नियमों की अनदेखी रिपोर्ट में आरोप लगाया गया था कि तत्कालीन डीपीओ राजेश कुमार सिन्हा ने विभिन्न सरकारी योजनाओं में नियमों की अनदेखी करते हुए बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताएं कीं। इनमें बेंच-डेस्क योजना, विद्यालय जीर्णोद्धार योजना, प्री-फैब स्ट्रक्चर निर्माण, नाइट गार्ड की बहाली और हाउसकीपिंग जैसी योजनाएं शामिल थीं, जिनमें करोड़ों रुपये के फर्जी भुगतान की बात कही गई थी। जिलाधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर शिक्षा विभाग ने मामले को गंभीरता से लिया और 1 जुलाई 2024 से राजेश कुमार सिन्हा को निलंबित कर दिया। इसके उपरांत उनके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई प्रारंभ की गई। जांच के दौरान दस्तावेजों और भुगतान रिकॉर्ड की गहन समीक्षा की गई, जिसमें कई अनियमितताएं उजागर हुईं। योजनाओं में निर्धारित प्रक्रियाओं का नहीं हुआ पालन विशेष रूप से, बेंच-डेस्क योजना में बिना सामग्री की आपूर्ति के ही भुगतान किए जाने की पुष्टि हुई। विभागीय जांच में यह भी सामने आया कि कई योजनाओं में निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया। टेंडर प्रक्रिया, कार्य सत्यापन और भुगतान से संबंधित नियमों की अनदेखी कर वित्तीय लाभ पहुंचाने का प्रयास किया गया था। जांच रिपोर्ट में अधिकांश आरोपों को प्रमाणित अथवा आंशिक रूप से प्रमाणित पाया गया। रिटायरमेंट के बाद आजीवन रहेगी प्रभावी अनुशासनिक प्राधिकार ने इस मामले को गंभीर वित्तीय अनियमितता मानते हुए राजेश कुमार सिन्हा के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई के रूप में उनकी पेंशन में स्थायी रूप से 25 प्रतिशत की कटौती का निर्णय लिया। यह कटौती उनके रिटायरमेंट के बाद आजीवन प्रभावी रहेगी। शिक्षा विभाग के एक उच्चधिकारी का कहना है कि सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए इस तरह की अनियमितताओं पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि भविष्य में इस मामले से जुड़े अन्य पहलू सामने आते हैं तो आगे की कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।इस कार्रवाई को शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक कड़ा संदेश माना जा रहा है।

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