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मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि आदिवासी समाज की सबसे बड़ी ताकत एकजुटता है। अगर आदिवासी समाज संगठित रहेगा तो अपने अधिकार और पहचान की रक्षा कर सकेगा। वे मंगलवार को असम के बिस्वनाथ चारियाली स्थित मेजिकाजन चाय बागान में जागरूकता जनसभा को संबोधित कर रहे थे। आदिवासी स्टूडेंट यूनियन ऑफ असम, जारी शक्ति और आदिवासी काउंसिल ऑफ असम ने यह आयोजन किया था। उन्होंने कहा-मैं झारखंड से इसलिए आया हूं, ताकि असम में रहने वाले झारखंड मूल के आदिवासियों की समस्याओं को सुन सकूं। झारखंड का पूरा आदिवासी समाज असम के आदिवासियों के साथ खड़ा है, जो उनके अधिकारों की लड़ाई में सहयोग करेगा। झारखंड और असम के आदिवासियों का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध है। हेमंत सोरेन ने कहा कि इस बार ऐसा प्रयास होगा कि मौजूदा सत्ता (भाजपा) को पता चल जाएगा कि राजनीति सिर्फ उन्हें ही नहीं आती। आदिवासियों की बदौलत चलता है देश का चाय उद्योग सीएम ने कहा कि हजारों वर्षो से आप सिर्फ असम नहीं, इस देश के व्यापार जगत का अभिन्न अंग हैं। अगर आपने अपना हाथ खींच लिया तो व्यापार खत्म हो जाएगा। आज देश का चाय उद्योग सिर्फ आदिवासियों के बदौलत चलता है। आप लोगों के अधिकारों की लड़ाई लड़ते हुए प्रदीप नाग जी ने दम तोड़ दिया। इसी तरह झारखंड में भी जल-जंगल-जमीन के लिए सालों तक संघर्ष हुआ। संघर्ष करते-करते थक गए, बाद में शिबू सोरेन जैसे कई क्रांतिकारी नेताओं ने निर्णय लिया कि हम अपना राज्य बनाएंगे। हमें पता है कि अधिकार कैसे लिया जाता है।
झारखंड का आदिवासी असम के आदिवासियों के साथ, उनके हक के लिए लड़ेंगे : हेमंत सोरेन
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