रांची में एटीएम कार्ड बदलकर बैंकों से अवैध निकासी करने वाले नवादा के 2 साइबर फ्रॉड किए गए अरेस्ट

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एटीएम कार्ड बदलकर ठगी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़, दो आरोपी गिरफ्तार बगैर गार्ड वाले एटीएम को बनाते थे निशाना राजधानी के विभिन्न थाना क्षेत्रों में एटीएम कार्ड बदलकर ठगी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए बीआईटी मेसरा पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार साइबर ठगों की पहचान धनंजय सिंह और विक्रम कुमार शर्मा उर्फ बिट्टू के रूप में हुई है। दोनों बिहार के नवादा जिले के हिसुआ के रहने वाले हैं। पुलिस ने आरोपियों के पास से अलग-अलग बैंकों के तीन एटीएम कार्ड, दो मोबाइल फोन और एक बाइक बरामद की है। बताया गया कि दोनों आरोपी नवादा से बाइक (JH01CE 4430) पर फर्जी नंबर प्लेट लगाकर रांची आते थे और एटीएम कार्ड बदलकर अवैध निकासी की वारदात को अंजाम देकर वापस बिहार लौट जाते थे। ग्रामीण एसपी प्रवीण पुष्कर ने बताया कि 14 मार्च को सूचना मिली थी कि दो साइबर ठग बाइक से शहर में घूम रहे हैं और एटीएम कार्ड बदलकर लोगों को ठग रहे हैं। सूचना के आधार पर बीआईटी मेसरा ओपी क्षेत्र के रेलवे ओवरब्रिज के पास वाहन चेकिंग के दौरान बाइक (JH01CF 4430) पर सवार दो युवकों को रुकने का इशारा किया गया, लेकिन वे भागने लगे। पुलिस ने पीछा कर उन्हें जुमार पुल के पास पकड़ लिया। जांच में बाइक पर लगा नंबर प्लेट फर्जी पाया गया। पूछताछ में दोनों ने कबूल किया कि वे नवादा से रांची आकर साइबर ठगी की वारदात को अंजाम देते थे। बिहार और झारखंड में 7 केस दर्ज पुलिस के अनुसार, धनंजय सिंह गिरोह का सरगना है। उसके इशारे पर गिरोह के सदस्य बाइक से रांची पहुंचते थे और ठगी कर पैसे निकालकर बिहार फरार हो जाते थे। गिरोह के सदस्यों के लिए धनंजय ने कमीशन भी तय कर रखा था। साइबर ठगी से मिलने वाले पैसों में सभी को हिस्सेदारी दी जाती थी। धनंजय पर बिहार और झारखंड के अलग-अलग थानों में पहले से सात मामले दर्ज हैं। एटीएम में गोंद लगाकर फंसाते थे कार्ड पूछताछ में धनंजय ने बताया कि वह वैसे एटीएम मशीनों को निशाना बनाता था, जहां सिक्योरिटी गार्ड नहीं रहते थे। वह एटीएम के पास हेल्पलाइन नंबर की जगह अपना मोबाइल नंबर लिख देता था। इसके बाद कार्ड डालने वाली जगह पर गोंद लगा देता था। जब कोई व्यक्ति पैसे निकालने के लिए एटीएम में कार्ड डालता था, तो कार्ड अंदर फंस जाता था। इसके बाद सामने लिखे नंबर पर जब ग्राहक मदद के लिए फोन करता था, तो वह खुद को कंपनी का कर्मचारी बताकर मौके पर पहुंच जाता था। कार्ड निकालने के बहाने वह पीड़ित से पिन नंबर डालने को कहता था और उसी दौरान पिन देख लेता था। काफी कोशिश के बाद भी जब कार्ड नहीं निकलता था, तो वह 24 घंटे बाद नजदीकी बैंक शाखा जाने की सलाह देकर पीड़ित को वहां से भेज देता था। इसके बाद वह कार्ड निकालकर खाते से अवैध निकासी कर फरार हो जाता था। अगर चाहें तो मैं इसे और ज्यादा “भास्कर क्राइम पैकेज” (हेडिंग + 3 सबहेड + ‘ऐसे करते

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