जमशेदपुर के अंश त्रिपाठी ला रहे शिप ‘शिवालिक’:होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर LPG लाने वाले शिप में हैं सेकेंड इंजीनियर

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पश्चिम एशिया में जारी तनाव और युद्ध जैसे हालात के बीच जमशेदपुर के सेकंड इंजीनियर अंश त्रिपाठी ने साहस और जिम्मेदारी का परिचय देते हुए एलपीजी से लदे जहाज को सुरक्षित भारत की ओर ले जाने में सफलता हासिल की है। शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के विशालकाय जहाज ‘शिवालिक’ पर तैनात अंश ने 13 मार्च को दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित पार किया। जहाज पर करीब 46 हजार मीट्रिक टन एलपीजी लदा है, जो इंडियन ऑयल के लिए खाड़ी देशों से लाया जा रहा है। अब यह जहाज गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह की ओर बढ़ रहा है। जहाज के कैप्टन सुखमीत सिंह के नेतृत्व में 27 सदस्यीय क्रू लगातार अपने कर्तव्य में जुटा हुआ है। खतरनाक हालात में निभाई तकनीकी जिम्मेदारी अंश त्रिपाठी जहाज पर सेकंड इंजीनियर के पद पर तैनात हैं। उनकी जिम्मेदारी जहाज के तकनीकी संचालन को सुचारू बनाए रखना थी। उन्होंने 26 नवंबर 2025 को ‘शिवालिक’ पर अपनी ड्यूटी ज्वॉइन की थी। उस समय किसी को अंदाजा नहीं था कि खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव के कारण यह यात्रा इतनी चुनौतीपूर्ण हो जाएगी। यूएई, कतर और सऊदी अरब से एलपीजी लेकर निकले इस जहाज को कई दिनों तक युद्ध के साये में सफर करना पड़ा। विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरना बेहद जोखिम भरा माना जाता है, क्योंकि यह दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्गों में से एक है। बावजूद इसके, जहाज के क्रू ने संयम और साहस के साथ अपनी जिम्मेदारियां निभाईं। परिवार ने ली राहत की सांस 13 मार्च को जहाज के सुरक्षित रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य पार करने की खबर मिलते ही जमशेदपुर के पारडीह स्थित आशियाना वुडलैंड में रहने वाले अंश के परिवार ने राहत की सांस ली। उनके पिता मिथिलेश कुमार त्रिपाठी, जो यूसीआइएल से सेवानिवृत्त उप-प्रबंधक हैं। उन्होंने बताया कि पिछले कई दिनों से पूरा परिवार चिंता में था। बेटे की सलामती के लिए भगवान से प्रार्थना कर रहा था। अंश की मां चंदा त्रिपाठी ने कहा कि बीता एक सप्ताह बेहद तनाव भरा रहा। हर पल अनहोनी का डर लगा रहता था, लेकिन अब बेटे के सुरक्षित लौटने की खबर से मन को सुकून मिला है। पत्नी और बेटे को घर लौटने का इंतजार अंश की पत्नी चंदा मिश्रा त्रिपाठी हैं। वह टाटा स्टील में चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं। उन्होंने बताया कि जहाज के सफर के दौरान उनसे संपर्क लगभग टूट गया था, जिससे परिवार की चिंता और बढ़ गई थी। अब उनके सुरक्षित भारत लौटने की खबर से सभी बेहद खुश हैं। घर पर रिश्तेदारों और परिचितों का लगातार आना-जाना लगा है। फोन पर लोग अंश की कुशलता की जानकारी ले रहे हैं। अंश ने अपनी स्कूली शिक्षा मोतीलाल नेहरू पब्लिक स्कूल और एईसीएस नरवा/जादूगोड़ा माइंस से प्राप्त की। 2012 में बीआईटी मेसरा से मैकेनिकल इंजीनियरिंग और 2015 में कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड से मरीन इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की। दिसंबर 2014 में उन्होंने शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया ज्वॉइन किया था। अब परिवार को उनके सुरक्षित घर लौटने का इंतजार है।

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