झारखंड विधानसभा के बजट सत्र का आखिरी दिन:जलाशय, कोल्ड स्टोरेज और बिजली पर बहस, समाधान से ज्यादा सवाल हावी

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विधानसभा के वर्तमान सत्र के अंतिम दिन बुधवार को राज्य के बुनियादी मुद्दों पर जोरदार बहस देखने को मिली। चर्चा के केंद्र में जल संरक्षण, कृषि भंडारण और बिजली विभाग की कार्यप्रणाली रही। इस दौरान लातेहार के चंदवा स्थित जगराहा डैम का मुद्दा खास तौर पर उभरा। विधायक सरयू राय ने इस प्राकृतिक जल स्रोत के संरक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि यह डैम भूगर्भीय स्रोत से 24 घंटे स्वच्छ पानी देता है, जो अपने आप में दुर्लभ है। उन्होंने इसे गहरा कर संरक्षित करने की मांग की, लेकिन विभागीय नियमों ने इस दिशा में अड़चन पैदा कर दी। जल संसाधन विभाग ने स्वामित्व का हवाला देकर जिम्मेदारी से दूरी बना ली, जिससे यह सवाल खड़ा हुआ कि प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में नियम कितने कारगर हैं। नए प्रस्ताव से छोटे जलाशयों को मिल सकता सहारा सरकार की ओर से जवाब देते हुए मंत्री हफीजुल हसन ने स्पष्ट किया कि वर्तमान नियमों के तहत केवल पांच एकड़ से बड़े सरकारी तालाबों का ही सौंदर्यीकरण संभव है। चूंकि जगराहा डैम को निजी श्रेणी में रखा गया है, इसलिए विभाग फिलहाल हस्तक्षेप नहीं कर सकता। हालांकि, उन्होंने यह भी संकेत दिया कि सरकार एक नया प्रस्ताव तैयार कर रही है। जिसके तहत 2.5 एकड़ से अधिक के सरकारी और गैर-सरकारी जलाशयों के जीर्णोद्धार का रास्ता खुल सकता है। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो जगराहा डैम जैसे कई छोटे लेकिन महत्वपूर्ण जल स्रोतों के संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकता है। किसानों के लिए भंडारण संकट, ऋण सुविधा पर भी सवाल वहीं, कृषि से जुड़े मुद्दों पर विधायक जयराम महतो ने सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि राज्य में किसानों के अनुपात में कोल्ड स्टोरेज की भारी कमी है, जिसके कारण किसानों को अपनी उपज कम कीमत पर बेचनी पड़ती है। 500 से 1000 मैट्रिक टन क्षमता वाले स्टोरेज की योजना को भी उन्होंने अपर्याप्त बताया। मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने जवाब में कहा कि हर विधानसभा क्षेत्र में जनप्रतिनिधियों की अनुशंसा पर एक कोल्ड स्टोरेज का निर्माण कराया जाएगा। हालांकि, जब महतो ने अन्य राज्यों की तरह भंडारित अनाज पर ऋण सुविधा की बात उठाई, तो सरकार ने स्पष्ट किया कि इसके लिए आवश्यक प्रमाणन अभी राज्य में उपलब्ध नहीं है। बिजली विभाग की बहाली और बिलिंग में पारदर्शिता की मांग ऊर्जा विभाग की कार्यप्रणाली भी बहस का अहम हिस्सा रही। जयराम महतो ने विभाग में रिक्त पदों और उपभोक्ताओं को मिल रहे भारी-भरकम बिजली बिलों का मुद्दा उठाया। मंत्री योगेंद्र महतो ने भरोसा दिलाया कि नई नियमावली तैयार हो चुकी है और कैबिनेट की मंजूरी के बाद जल्द ही बहाली प्रक्रिया शुरू होगी। साथ ही, उन्होंने बताया कि स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया तेज की जा रही है, जिससे बिलिंग में पारदर्शिता आएगी। गलत बिलों की शिकायतों पर उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं के साक्ष्य देने पर न केवल सुधार होगा, बल्कि दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई भी की जाएगी। हालांकि, सरकार ने उपभोक्ताओं से समय पर बिल भुगतान की जिम्मेदारी निभाने की अपील भी की।

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