Wednesday, August 19, 2026

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झारखंड में सर्पदंश अधिसूचित बीमारी घोषित होगी:राज्य में हर साल सर्पदंश से करीब 4 हजार मौतें, 2030 तक आंकड़ा 50% घटाने का लक्ष्य, कैबिनेट में भेजा प्रस्ताव


झारखंड सरकार सर्पदंश के बढ़ते मामलों और उससे होने वाली मौतों को नियंत्रित करने के लिए बड़ा कदम उठाने जा रही है। स्वास्थ्य विभाग ने सर्पदंश को अधिसूचित बीमारी (नोटिफाइड डिजीज) घोषित करने का प्रस्ताव मंत्रिपरिषद के पास भेजा है। प्रस्ताव लागू होने के बाद राज्य के सभी सरकारी और निजी अस्पतालों को सर्पदंश के हर मामले और उससे हुई मौत की जानकारी सरकार को देनी अनिवार्य होगी। इसका उद्देश्य समय पर इलाज, बेहतर निगरानी और मौतों में कमी लाना है।
भारत सरकार ने नेशनल एक्शन प्लान फॉर प्रीवेंशन एंड कंट्रोल ऑफ स्नेक बाइट एनवेनमिंग (एनएपीएसई) 2030 के तहत 2030 तक सर्पदंश से होने वाली मौतों और विकलांगता को 50% तक कम करने का लक्ष्य रखा है। -शेष पेज 7 पर ग्रामीण इलाकों में ज्यादा खतरा, अंधविश्वास से बढ़ती हैं मौतें
वरीय फिजिशियन डॉ. संजय सिंह के अनुसार, झारखंड जैसे राज्यों में सर्पदंश का असर ज्यादा है, क्योंकि बड़ी आबादी ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों में रहती है। मानसून और गर्मी के मौसम में मामलों में तेजी आती है। खेती और जंगल आधारित जीवनशैली के कारण लोगों का सांपों से संपर्क अधिक होता है। डॉ. संजय सिंह बताते हैं कि सर्पदंश से मौत का बड़ा कारण इलाज में देरी है। कई लोग अस्पताल जाने के बजाय झाड़-फूंक, ओझा या नीम-हकीम के पास चले जाते हैं। इससे स्थिति गंभीर हो जाती है। सरकार अब इस स्थिति को बदलने के लिए डेटा आधारित हस्तक्षेप पर जोर दे रही है। वह सबकुछ जो आपके लिए जानना जरूरी है
जानिए… अधिसूचित बीमारी घोषित होने से क्या बदलेगा सभी सरकारी और निजी अस्पतालों को अब सर्पदंश से जुड़े हर मामले की जानकारी सरकार को देनी होगी।
मेडिकल कॉलेज, लैब, आयुष, रेलवे और आर्मी अस्पताल भी शामिल होंगे।
हर महीने की 5 और 20 तारीख को रिपोर्ट सिविल सर्जन को भेजी जाएगी।
जिलों से रिपोर्ट हर महीने की 10 तारीख तक राज्य मुख्यालय पहुंचेगी।
पूरा डेटा आईडीएसपी-आईएचआईपी पोर्टल पर ऑनलाइन दर्ज किया जाएगा।
इस कवायद से राज्य में एक मजबूत सर्विलांस सिस्टम तैयार हो सकेगा। फायदा: समय पर इलाज व सटीक नीति बनाने में मिलेगी मदद
रिपोर्टिंग अनिवार्य होने से सर्पदंश की वास्तविक स्थिति सामने आएगी। किस इलाके में ज्यादा मामले हैं, यह पता चलते ही वहां दवा, डॉक्टर और संसाधन भेजे जा सकेंगे। एंटी-स्नेक वेनम की उपलब्धता बढ़ेगी और मौतों में कमी आएगी। लंबी अवधि में स्वास्थ्य योजनाएं और रिसर्च भी बेहतर हो सकेगा। अभी समस्या : सभी मामलों की रिपोर्टिंग नहीं हो पाती है
झारखंड में सर्पदंश से जुड़ी सभी मामलों की रिपोर्टिंग नहीं होती। एंटी-स्नेक वेनम निजी अस्पताल समेत हर जगह उपलब्ध नहीं होती। लोगों में जागरूकता की कमी है। अंधविश्वास के कारण इलाज में देरी होती है। इन कारणों से वास्तविक मौतों का आंकड़ा सामने नहीं आ पाता। बचाव: हर स्तर पर एंटी स्नेक वेनम उपलब्ध कराया जाएगा
झारखंड में स्नैक बाइट प्रीवेंशन एंड कंट्रोल (एसबीपीसी) प्रोग्राम के तहत मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल, सीएचसी व पीएचसी में स्नैक एंटी वेनम इंजेक्शन उपलब्ध कराया जा रहा है। डॉक्टरों को नेशनल स्नैक बाइट मैनेजमेंट प्रोटोकॉल पर प्रशिक्षण दिया जा रहा है। झारखंड में 3 से 4 सांप ही सबसे ज्यादा जहरीले
झारखंड में सर्पदंश के मामलों में सबसे ज्यादा खतरा कोबरा (नाग), करैत और रसेल वाइपर जैसे जहरीले सांपों से माना जाता है। इनमें यहां सबसे ज्यादा कॉमन करैत सबसे ज्यादा खतरनाक माना जाता है, क्योंकि यह रात में डंसता है और इसके लक्षण देर से दिखाई देते हैं। भारत के बिग फोर जहरीले सांपों में से तीन झारखंड में आम हैं, जबकि कुछ इलाकों में सॉ-स्केल्ड वाइपर भी पाया जाता है। हालांकि राज्य में दर्जनों प्रजातियों के सांप हैं, लेकिन केवल 4-5 प्रजातियां ही अधिकतर मौतों के लिए जिम्मेदार होती हैं।

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