सीआईएसएफ असिस्टेंट कमांडेंट भर्ती पर सुनवाई, विज्ञापन पर रोक से इनकार

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झारखंड हाईकोर्ट में सीआईएसएफ के असिस्टेंट कमांडेंट भर्ती नियम 2009 को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस एमएस सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने यूपीएससी द्वारा जारी भर्ती विज्ञापन संख्या 8/26 पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस विज्ञापन के आधार पर की जाने वाली नियुक्तियां मामले के अंतिम निर्णय से प्रभावित होंगी। साथ ही अभ्यर्थियों को इसकी जानकारी देने का निर्देश भी दिया गया है। याचिकाकर्ता की ओर से दायर हस्तक्षेप याचिका में कहा गया था कि मामला लंबित रहने के बावजूद यूपीएससी ने भर्ती का विज्ञापन जारी कर दिया है, इसलिए इस पर रोक लगाई जाए। अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा और अखौरी अविनाश कुमार ने पक्ष रखते हुए भर्ती नियमों को चुनौती दी। याचिकाकर्ता का कहना है कि कार्मिक विभाग के दिशा-निर्देशों के अनुसार भर्ती नियमों की हर पांच साल में समीक्षा होनी चाहिए, लेकिन 2009 के बाद ऐसा नहीं किया गया। तर्क दिया गया कि अन्य विंग में असिस्टेंट कमांडेंट के सभी पद प्रमोशन से भरे जाते हैं, जबकि यहां केवल 30 प्रतिशत पद ही प्रमोशन के लिए निर्धारित हैं। मां छिन्नमस्तिका मंदिर के सौंदर्यीकरण पर हाईकोर्ट सख्त रामगढ़ स्थित मां छिन्नमस्तिका मंदिर परिसर के सौंदर्यीकरण और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर झारखंड हाईकोर्ट ने सख्ती दिखाई है। न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने पर्यटन सचिव और रामगढ़ डीसी को बुधवार को कोर्ट में उपस्थित होने का निर्देश दिया। अदालत ने अवमानना याचिका की सुनवाई के दौरान कहा कि वर्ष 2023 में जनहित याचिका पर मंदिर परिसर के विकास को लेकर स्पष्ट निर्देश दिए गए थे, जिनका पालन अब तक पूरी तरह नहीं हुआ है। पेंशन कटौती का सरकार का फैसला खारिज झारखंड हाईकोर्ट ने सेवानिवृत्त इंजीनियरों की पेंशन कटौती करने के राज्य सरकार के फैसले को खारिज कर दिया। कोर्ट ने एकल पीठ के उस आदेश को भी बरकरार रखा, जिसमें पेंशन कटौती को रद्द किया गया था। मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने स्पष्ट कहा कि केवल एक-दो आरोपों के आधार पर किसी कर्मचारी की पूरी सेवा को असंतोषजनक नहीं माना जा सकता। राज्य सरकार ने सेवानिवृत्त इंजीनियर नवीन नारायण और रामचंद्र रजक की पेंशन में दो साल के लिए 5 प्रतिशत कटौती कर दी थी। आरोप था कि वर्ष 2014-15 में नहर सफाई और पुनर्स्थापन कार्यों में अनियमितता हुई थी। निकालने से पहले पूरे सेवा रिकॉर्ड का आकलन जरूरी है। गंभीर कदाचार साबित करने के लिए विधिवत विभागीय जांच या आपराधिक कार्रवाई अनिवार्य है।

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