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‘मेरा बेटा ईंट भट्ठा पर पिछले 3 साल से गाड़ी चला रहा है, 150 रुपए रोजाना देने की बात हुई थी। वो पैसा तो नहीं मिला, उल्टा मेरे बेटे पर ढाई लाख रुपए का कर्ज चढ़ा दिया। सेठ ने मेरी पत्नी से ईंट भट्ठे पर मजदूरी कराई। पैसे मांगने गया तो सेठ ने कहा कि बेटा पैसा देगा, बेटे ने कहा कि पापा पैसे देंगे। पैसे तो नहीं मिले, मुझे 3 लाख का कर्जदार बता दिया। ये कर्ज अब बढ़कर 8 लाख हो गया है। मैं 40 साल का था, तब से सेठ मुझसे काम ले रहा है। अब मेरी उम्र 75 साल से ज्यादा हो गई है। कभी-कभी मैंने पर्व-त्योहार में ढाई से 3 हजार रुपए लिए। अब सेठ ये पैसे जोड़कर मुझे लाखों का कर्जदार बता रहा है।’ गयाजी के फतेहपुर प्रखंड के गोबरदाहा गांव के रहने वाले 15 परिवारों के सदस्यों ने ये बातें कही है। दरअसल, मंगलवार को गयाजी में ईंट भट्ठे पर काम करने वाले 62 मजदूरों और उनके परिवार को मुक्त कराया गया। इनमें छोटे बच्चे भी हैं। ये लोग करीब 30 साल से बंधुआ मजदूरी कर रहे थे। जिला प्रशासन को सूचना मिली तो ईंट भट्ठे पर छापेमारी की थी। ईंट भट्ठे पर बंधक बनाकर मजदूरी कराने का मामला क्या है? रेस्क्यू कराए गए मजदूरों ने क्या कहानी बताई? आखिर इन मजदूरों को बिना पैसे के मजदूरी के लिए क्यों और कैसे मजबूर किया जा रहा था? पढ़िए, पूरी रिपोर्ट। रेस्क्यू कराए गए मजदूरों की 2 तस्वीरें देखिए सबसे पहले रेस्क्यू कराए गए बुजुर्ग की कहानी 75 साल के लालू मांझी ने बताया कि मैं जवानी से राम आशीष यादव के साथ काम कर रहा हूं। तब मेरी उम्र 40 साल थी, अब मेरी उम्र 75 साल है। पहले राम आशीष यादव यूपी में मुझसे काम करवाता था, अब अपने भट्ठे पर 30 साल से काम करा रहा था। कभी मैंने कर्ज नहीं लिया, पर्व त्योहार पर दो-चार हजार रुपए लिए थे, अब लाखों रुपए का कर्जदार मुझे बता रहा है। लालू मांझी की बहू आशा देवी ने बताया, ‘मेरे ससुर पर 42 हजार रुपए का कर्ज था। मैंने काम करके ससुर का कर्ज खत्म किया था। दिलीप यादव ने कई बार मेरे साथ मारपीट की है। पिछले 3 साल से मात्र 15 हजार रुपए दिए है, इतने पैसे में क्या होता है।’ इसके अलावा, पर्वतिया देवी ने बताया, ‘कभी काम पर नहीं जाती हूं तो हम लोगों पर एक दिन के हिसाब से 500 रुपए कर्ज चढ़ा दिया जाता है।’ सुदामा देवी ने कहा, ‘मेरे पति की तबीयत ठीक नहीं थी तो वो एक साल तक काम पर नहीं गए थे। इसके बदले राम आशीष यादव ने मेरे पति पर 30 हजार रुपए कर्ज चढ़ा दिया था।’ पुतुल देवी ने बताया, ‘मेरा बेटा बीरेंद्र ईंट भट्ठे पर ड्राइवर का काम करता था। हाल ही में मेरी बुआ सास की मौत हो गई थी। मैं अपने पति और बच्चों के साथ चेन्नई में थी। लेकिन मेरा एक बेटा और उसकी पत्नी घर पर थी। मेरी बुआ सास के अंतिम संस्कार में बेटा गया था। श्मशान से आने के बाद बेटा काम पर नहीं गया। वह पेशे से ड्राइवर है। तीन साल में एक भी रुपए सेठ ने नहीं दिए, अब मेरे बेटे के साथ मारपीट की जाती है, उसे लाखों रुपए का कर्जदार बताया जा रहा है।’ ‘मैं कमाई के लिए बाहर गया, मेरी पत्नी से कराने लगे मजदूरी’ 35 साल के प्रेमन मांझी ने बताया, ‘मैं ईंट भट्ठे पर काम करता था। लॉकडाउन के पहले से काम कर रहा था। मेरी बहन की शादी में आरोपी मालिक ने 20 हजार रुपए दिए थे। उस वक्त मुझे उससे 30 हजार रुपए लेने थे। इसके बाद मैं बाहर कमाने चला गया।’ प्रेमन के मुताबिक, ‘मैं बाहर कमाने गया तो आरोपी पिता-पुत्र ने मेरी पत्नी से ईंट भट्ठे पर काम करवाना शुरू कर दिया। जब मैं वापस आया और पत्नी की ओर से की गई मजदूरी का हिसाब मांगने गया, तो दिलीप यादव ने कहा कि तुम्हारी पत्नी को काम के लिए मैंने नहीं बुलाया है, पापा ने बुलाया है। पापा ही हिसाब देंगे। दिलीप के पिता राम आशीष यादव से हिसाब मांगा गया तो उसने कहा कि मैंने तुम्हारी पत्नी को नहीं बुलाया है, मेरे बेटे ने काम पर लगाया है, हिसाब दिलीप ही देगा।’ पैसे के लिए छोटे भाई से मारपीट की प्रेमन ने बताया, ‘मेरा छोटा भाई है, जो कभी भी ईंट भट्ठे पर न तो मजदूरी करने गया और न सेठ से पैसे लिए, फिर भी मेरे छोटे भाई पर ढाई से तीन लाख रुपए का कर्ज बताया जा रहा है। पांच दिन पहले मेरा छोटा भाई मेरी पत्नी को लेकर बाजार गया था। आरोपी ने मेरे भाई के बाइक की चाबी निकाल ली थी और मेरी पत्नी को गालियां दी थी।’ जबरन 8 लाख का कर्ज चढ़ा दिया जगदीश मांझी ने कहा, ‘राम आशीष यादव के ईंट भट्ठा पर 1998 से काम कर रहा हूं। पहले राम अशीष यादव ठेकेदारी करता था, फिर मालिक बन गया और ईंट भट्ठा खोल लिया। इसके बाद गांव के सभी लोगों को बंधक बनाकर अपने ईंट भट्ठा पर काम करवाने लगा।’ ‘कर्ज मांगा तो कहा- मेरे भरोसे बेटी पैदा की थी क्या?’ जगदीश ने बताया कि ‘राम आशीष यादव का कहना है कि तुम पर 8 लाख रुपए का कर्ज है। मैंने कभी कर्ज नहीं लिया है। अगर मेरे पास आठ लाख रुपए होते तो मैं झोपड़ी में रहता? बेटी की शादी कर रहे थे, तब राम आशीष यादव से कर्ज मांगा था। लेकिन उसने कर्ज नहीं दिया था और कहा था कि तुमने मेरे भरोसे अपनी बेटी पैदा की थी क्या?’ अब जानिए बंधक बनाकर मजदूरी कराने का मामला गयाजी के डीएम शशांक शुभंकर को सूचना मिली थी कि फतेहपुर के पूर्वी बाथन गांव के एक ईंट भट्ठे में कई साल से कुछ लोगों को बंधक बनाकर मजदूरी कराई जा रही है। डीएम ने सूचना के बाद तत्काल एक टीम बनाई। असिस्टेंट कलेक्टर डॉ. सूरज कुमार की अगुवाई में असिस्टेंट लेबर कमिश्नर, फतेहपुर बीडीओ और पुलिस की संयुक्त टीम ने मंगलवार को ‘RYC’ नाम के ईंट भट्ठे पर छापेमारी की। प्रशासन की टीम ने छापेमारी कर 62 मजदूरों का रेस्क्यू किया छापेमारी के दौरान 62 मजदूरों का रेस्क्यू किया गया। प्रशासन की टीम ने सभी मजदूरों को उनके घर भेज दिया। डॉ. सूरज ने बताया कि आरवाईसी ईंट भट्ठा राम आशीष यादव की है। आरोपी मजदूरों से पीढ़ी दर पीढ़ी बंधुआ मजदूरी करवा रहा था। उन्होंने बताया कि मजदूरों को दिए गए कर्ज चुकाने के नाम पर बंधक बनाया जाता था। छापेमारी के दौरान ईंट भट्ठा मालिक राम आशीष यादव फरार हो गया। हालांकि मौके से मुंशी देवेंद्र यादव को गिरफ्तार कर लिया गया है। मामले में डीएम के निर्देश पर गुरपा थाना में FIR दर्ज की गई है।
'जवानी से काम कर रहा था, अब बूढ़ा हो गया':गयाजी में 3 पीढ़ियों से ईंट भट्ठे पर बंधुआ मजदूरी, पीड़ित बोले- सेठ ने कर्ज में फंसाया
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