गंगा नदी बिहार में 445 km दूर तक बहती है। यह छपरा (सारण) के पास प्रवेश करती और मनिहारी (कटिहार) के पास से बाहर निकलती है। इस वक्त बिहार में गंगा नदी पर 7 पुल (कुल 22 लेन) हैं।
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2027 तक बिहार में गंगा नदी पर 23913 करोड़ रुपए से अधिक खर्च कर 8 नए पुल बन जाएंगे। इनपर कुल मिलाकर 38 लेन होंगे। औसतन गंगा पर करीब हर 30 km पर एक पुल होगा। इससे उत्तर बिहार और दक्षिण बिहार के बीच कनेक्टिविटी बेहतर होगी।
बिहार में गंगा नदी पर कौन से पुल बन रहे हैं? ये कितने लेन के होंगे? क्या फायदा होगा? कितनी लागत आएगी? पढ़िए खास रिपोर्ट…।

सबसे पहले जानिए, बिहार में गंगा नदी पर कौन से 8 नए पुल बन रहे? कितना काम हुआ?
1- शेरपुर-दिघवारा 6 लेन पुल
पटना जिला के शेरपुर से सारण जिला के दिघवारा के बीच गंगा नदी पर 6 लेन पुल बन रहा है। NH-139W के तहत बन रहा यह पुल जेपी सेतु के समानांतर पश्चिम दिशा की तरफ जाएगा।
पुल और एप्रोच रोड सहित इसकी लंबाई 14.5 km है। इसके निर्माण पर लगभग 4250 करोड़ रुपए खर्च हो रहे हैं। इंजीनियरिंग प्रोक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन (EPC) मोड में यह काम हो रहा है। 4 सितंबर 2027 तक इसे पूरा करने का लक्ष्य है।
क्या फायदा होगा? पटना और सारण के बीच सीधा और फास्ट रोड कनेक्शन बनेगा। पुल बनने से दक्षिण बिहार और उत्तर बिहार के बीच आना-जाना आसान होगा। सामान ढोने में आसानी होगी।
यह पटना को उत्तर बिहार के बड़े बाजारों और NH के नेटवर्क से सीधे जोड़ेगा। बड़े ट्रकों के लिए गंगा पार करना कठिन नहीं रह जाएगा। अभी जेपी सेतु पर ट्रक-बस नहीं चलते। पटना में ट्रक-बसों के लिए गंगा पर एक मात्र पुल गांधी सेतु है।
2- जेपी सेतु के समानांतर 6 लेन पुल
पटना के दीघा को सारण के सोनपुर से जोड़ने वाले जयप्रकाश नारायण सेतु (जेपी सेतु) के समानांतर गंगा नदी पर 6 लेन पुल बनाया जा रहा है। इसे दो लेन पुराने रेल-सह-सड़क जेपी सेतु के पश्चिम में 180 मीटर की दूरी पर बनाया जा रहा है।
पुल की लंबाई एप्रोच पथ सहित 4.556 km है। यह 6 लेने का एक्स्ट्रा डोज केबल-स्टेयड ब्रिज बनेगा। पुल NH-139 W और NH-31 से सीधे जुड़ेगा। इनका निर्माण स्वर्णिम चतुर्भुज गलियारा के तहत हो रहा है। लगात 3006 करोड़ रुपए है। 2027 के अंत तक इसे पूरा करने का लक्ष्य है।
क्या फायदा होगा?
पटना और उत्तर बिहार के बीच सड़क कनेक्टिविटी आसान और तेज होगी। मुख्य मकसद भारी वाहन और सामान्य ट्रैफिक को अगर कर ट्रैफिक जाम खत्म करना है। उत्तर बिहार के सारण, वैशाली, मुजफ्फरपुर और पश्चिम व पूर्वी चंपारण जैसे जिलों तक जाना आसान बनाएगा। आर्थिक गतिविधियां काफी बढ़ेंगी।

3. महात्मा गांधी सेतु के समानांतर 4 लेन पुल
पटना और हाजीपुर के बीच महात्मा गांधी सेतु के समानांतर इसे तैयार किया जा रहा है। यह महात्मा गांधी सेतु का लोड कम करेगा। इस समय गांधी सेतु पर बस-ट्रक ज्यादा होने से जाम की समस्या बन जाती है।
यही कारण है कि इसके समानांतर 4 लेन का नया पुल बनाया जा रहा है। एप्रोच सहित इसकी लंबाई 14.5 km होगी। NH-19 के तहत इसका निर्माण किया जा रहा है। इस पुल के दोनों छोरों यानी पटना की ओर जीरो माइल से लेकर हाजीपुर के पास तक की सड़कें डेवलप की जा रही हैं।
इसमें 4 वाहन अंडरपास, एक रेल ओवरब्रिज, फ्लाईओवर, बस शेल्टर्स और कई जंक्शन होंगे। इसका निर्माण 2026 के अंत या 2027 के शुरू तक पूरा करने का लक्ष्य है।
क्या फायदा होगा?
पटना और हाजीपुर के बीच यातायात तेज और बेहतर हो सकेगी। जाम की परेशानी खत्म होगी। दक्षिण बिहार से उत्तर बिहार की यात्रा कम समय में आराम से पूरी होगी। माल ढुलाई में आसानी होगी।
4. कच्ची दरगाह-बिदुपुर 6 लेन पुल
एशियन डेवलपमेंट बैंक की मदद से NH-30 से लगे कच्ची दरगाह से NH-103 से लगे बिदुपुर के बीच गंगा नदी पर 6 लेन का पुल बनाया जा रहा है। इस ग्रीनफिल्ड पुल के निर्माण पर 4988.40 करोड़ रुपए खर्च हो रहे हैं। पुल की लंबाई 9.76 km और पहुंच पथ की लंबाई 10 km है। पुल 2026 में तैयार कर लेना है।
क्या फायदा होगा?
यह पुल NH-31 और NH-322 को जोड़ेगा। पहले चरण में जनवरी 2025 में कच्ची दरगाह से राघोपुर दियारा तक काम पूरा कर यातायात के लिए खोला जा चुका है।
यह पुल पटना को वैशाली और उत्तर बिहार से सीधा जोड़ रहा है। इससे राघोपुर को पूरे साल पटना-हाजीपुर से कनेक्टिविटी मिलेगी। अभी बाढ़ के दिनों में राघोपुर टापू बन जाता है।
5. बख्तियारपुर-ताजपुर 4 लेन पुल
इस पुल का निर्माण पीपीपी मोड पर किया जा रहा है। NH-31 के प्रस्तावित बाईपास में करजान गांव से NH-28 से लगे ताजपुर के बीच इसे बनाया जा रहा है। इसे तैयार करने की लागत 3923 करोड़ रुपए है। लंबाई 5.55 km है। इस पुल का पहुंच पथ 45.39 km लंबा है। काम पूरा करने का लक्ष्य जून 2027 है।
क्या फायदा होगा?
इस पुल के बन जाने से पटना शहर में जाम की समस्या कम होगी। गांधी सेतु पर ट्रैफिक का दबाव कम होगा। समस्तीपुर, पटना और नालंदा के बीच संपर्क बेहतर होगा।
6. अगुवानी घाट-सुल्तानगंज 4 लेन पुल
खगड़िया के अगुआनी घाट और भागलपुर जिले के सुल्तानगंज के बीच गंगा नदी पर 4 लेन पुल बन रहा है। इसकी लंबाई 3.16 km है। इसमें केबल-स्टे स्ट्रक्चर भी शामिल है। पुल के दोनों तरफ 25 km लंबी एप्रोच रोड बनाई जा रही है।
NH- 31 और NH-107 को जोड़ रहे इस पुल को बनाने में 1710 करोड़ रुपए खर्च हो रहे हैं। इस पुल का निर्माण 23 फरवरी 2014 को शुरू हुआ था। बाढ़, भूमि अधिग्रहण, धंसाव आदि की वजह से निर्माण कार्य में बाधा आई। पुल के कई हिस्से कई बार गिर गए। 30 अप्रैल 2022, 4 जून 2023 और 17 अगस्त 2024 को ऐसी घटनाएं हुईं।
इसका फाउंडेशन और सब स्ट्रक्चर ठीक है। इसे इंजीनियरिंग प्रोक्योरमेंट कंस्ट्रक्शन (ईपीसी मोड) पर बनाया जा रहा है। आईआईटी रुड़की के वैज्ञानिकों ने सप्ताह भर पहले वेक कैप और सब स्ट्रक्चर डिजाइन और ड्राइंग तैयार किया था। इसके अनुसार पुल निगम ने एजेंसी को काम करने का निर्देश दिया है।
सरकार ने पुल निर्माण कार्य में तेजी लाने का निर्देश दिया है। मई 2027 तक इसे पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। अभी तक 14. 54 km एप्रोच पथ में से 8% काम पूरा हुआ है। पसहारा डायवर्सन का निर्माण हो गया है। परसाहा NH- 31 पर इंटरचेंज का निर्माण शुरू किया गया है।
क्या फायदा होगा? मिथिलांचल और कोसी क्षेत्र से मुंगेर- खगड़िया भगवानपुर मार्ग की दूरी 100 km तक घट जाएगी। यात्रा में समय कम लगेगा। लोगों को डायरेक्ट लिंक रोड मिल रहा है।
NH- 31 और NH- 80 इससे जुड़ जाएंगे। इस पर गंगा में डॉल्फिन देखने के लिए ‘हैंगिंग डॉल्फिन ऑब्जरवेटरी’ भी बनेगी। पुल से विक्रमशिला सेतु पर ट्रैफिक लोड काफी घट जाएगा।

7. विक्रमशिला सेतु के समानांतर 4 लेन पुल
विक्रमशिला सेतु (NH-80) पर बढ़ते ट्रैफिक दबाव को कम करने और भागलपुर क्षेत्र की कनेक्टिविटी मजबूत करने के लिए इसके समानांतर एक नया 4-लेन पुल बनाया जा रहा है।
यह परियोजना बिहार के पूर्वी हिस्से और कोसी-सीमांचल क्षेत्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। गंगा नदी पर भागलपुर के दक्षिणी तट से लेकर नवगछिया के उत्तरी तट को यह जोड़ने वाला है।
पुल मौजूदा विक्रमशिला सेतु के समानांतर बन रहा है। एप्रोच पथ सहित इसकी लंबाई 4.8 km है। इसे तैयार करने में 1110 करोड़ रुपए खर्च हो रहे हैं। केंद्र सरकार के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अधीन इसका निर्माण चल रहा है। निर्माण एजेंसी NHAI (नेशनल हाइवे ऑथोरिटी ऑफ इंडिया) है।
क्या फायदा होगा?
कोसी और सीमांचल क्षेत्र के लिए वैकल्पिक मार्ग की जरूरत पूरी हो सकेगी। भागलपुर, कटिहार, पूर्णिया के बीच आवाजाही तेज और सुगम होगी। ट्रेड में वृद्धि होगी।
8. साहेबगंज मनिहारी 4 लेन पुल
यह पुल झारखंड के साहेबगंज और बिहार के कटिहार जिले के मनिहारी को जोड़ना। यह बिहार और झारखंड के बीच कनेक्टिविटी बेहतर करेगा। 22 km लंबे इस पुल को बनाने में 2000 करोड़ रुपए खर्च हो रहे हैं।
यह पुल NH 133B और NH 131- A को जोड़ेगा। राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग के तहत हाइब्रिड एन्युइटी मोड पर इसे बनाया जा रहा है। पुल को 2026 के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य है।
क्या फायदा होगा?
इससे बिहार और झारखंड के बीच सड़क कनेक्टिविटी बेहतर होगी। दोनों राज्यों में व्यापार को बढ़ावा मिलेगा। झारखंड से गिट्टी और दूसरे भारी सामान लाने में आसानी होगी।
पटना को उत्तर बिहार से जोड़ने के लिए बन रहे 4 नए पुल
बिहार में गंगा नदी पर बन रहे 8 नए पुल में से चार पटना जिले में बन रहे हैं। इससे राजधानी को जाम से मुक्ति मिलेगी। ट्रक बिना शहर में प्रवेश किए गंगा पार जा सकेंगे।
वर्तमान में पटना से उत्तर बिहार जाने के लिए दो पुल हैं। एक है गांधी सेतु और दूसरा जेपी सेतु। 4 लेन वाले गांधी सेतु पर बस और ट्रक चल सकते हैं। यहां भारी ट्रैफिक के चलते जाम की परेशानी होती है। वहीं, जेपी सेतु पर सिर्फ छोटे वाहन चलते हैं।
दिघवारा-शेरपुर 6 लेन पुल, जेपी सेतु के समानांतर 6 लेन पुल, महात्मा गांधी सेतु के समानांतर 4 लेन पुल और कच्ची दरगाह-बिदुपर 6 लेन पुल बन जाने से पटना से उत्तर बिहार जाने वाले पुलों की संख्या 6 हो जाएगी। कुल 22 नए लेन जुड़ेगे। इससे किसी एक पुल पर ज्यादा ट्रैफिक लोड नहीं रह जाएगा।
बिहार में गंगा नदी पर पहला पुल गांधी सेतु बना था। इसका उद्घाटन 1982 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने किया था। इससे पहले गंगा पार करने के लिए लोग नाव का इस्तेमाल करते थे।
अब जानिए, पटना में बन रहे 2 एलिवेटेड कॉरिडोर पर कितना काम हुआ

दानापुर से कोइलवर तक बन रहे एलिवेटेड कॉरिडोर का 45% काम हो गया है। इसपर 1969 करोड़ रुपए खर्च हो रहे हैं।
1- दानापुर बिहटा एलिवेटेड कॉरिडोर
यह कॉरिडोर 25 km लंबा होगा। इसे देश की सबसे लंबी एलिवेटेड रोड परियोजनाओं में से एक माना जा रहा है। इसका 45% से अधिक काम हो गया है। यह पटना के दानापुर रेलने स्टेशन से शुरू होकर बिहटा और कोइलवर तक जा रहा है।
इसके बन जाने के बाद पटना से पश्चिम बिहार के लिए रोड रूट और बेहतर हो जाएगा। दानापुर के पास आरओबी और डबल डेकर ब्रिज जैसे स्ट्रक्चर के जरिए जुड़ेगा।
दानापुर स्टेशन के पास 4, नेउरागंज में 2 और एयरपोर्ट से कोइलवर पर एक रैंप बनेंगे। दानापुर वाला रैंप सबसे ऊंचा (25 मीटर) होगा। पूरे कॉरिडोर में 389 पीलर खड़े होंगे। इसे तैयार करने में 1969 करोड़ रुपए की लागत आ रही है।
क्या फायदा होगा?
यह एलिवेटेड कॉरिडोर पटना के पश्चिमी हिस्से और आसपास के इलाकों को बेहतर तरीके से जोड़ेगा। लोगों को जाम से राहत मिलेगी। एम्स से लेकर आईआईटी और एनआईटी जैसे संस्थानों तक पहुंचना आसान होगा।
पटना से यूपी और दिल्ली की दूरी कम होगी। सितंबर 2026 तक इसका निर्माण पूरा करना था। अब नया लक्ष्य जून 2027 रखा गया है।

पटना के मीठापुर से महुली तक बन रहे एलिवेटेड कॉरिडोर की लागत 1467.74 करोड़ रुपए है।
2- मीठापुर-महुली एलिवेटेड कॉरिडोर
इस कॉरिडोर में मीठापुर बस स्टैंड क्षेत्र से रामगोविंद सिंह महुली हॉल्ट तक 8.86 km लंबे 4 लेन एलिवेटेड रोड का लोकार्पण हो चुका है। इसे 1030.59 करोड़ रुपए की लागत से पूरा किया गया है।
इसके अतिरिक्त मीठापुर-सिपारा- मगहुली- पुनपुन तक रेलवे लाइन के पूरब में मीठापुर से सिपारा तक, सिपारा में टू वे आरओबी सहित 4 लेन एलिवेटेड पथ बन रहा है, जिसकी लंबाई 2.10 km है।
रामगोविंद सिंह महुली हॉल्ट से पुनपुन लक्ष्मण झूला तक 4 लेन एलिवेटेड रोड बन रह है, जिसकी लंबाई 2.20 km है। यानी कुल लंबाई 4.30 km है। इस पर 437.15 करोड़ रुपए खर्च हो रहे हैं। महुली हॉल्ट से पुनपुन तक कुछ जगहों पर काम पूरा हो गया है। बाकी का काम चल रहा है।
क्या फायदा होगा?
इससे पटना को जाम से काफी राहत मिलेगी। पटना के दक्षिणी और पूर्वी हिस्से को सीधी व बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी। रेल लाइन और भीड़भाड़ वाले इलाके को बायपास कर सकेंगे।
गंगा नदी पर इन तीन पुलों का निर्माण प्रस्तावित है
- बक्सर में वर्तमान पुल के समानांतर गंगा नदी पर अतिरिक्त 3 लेन पुल
- हल्दिया एक्सप्रेस वे पर मटिहानी-साम्हो के बीच 6 लेन पुल
- कहलगांव में गंगा नदी पर 4 लेन पुल




