Sunday, March 29, 2026

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झारखंड में आज प्रकृति पर्व सरहुल की धूम:परंपरा-आस्था के रंग में डूबा जनजातीय समाज, घड़े के पानी से होगी वर्षा की भविष्यवाणी


झारखंड के आदिवासी बहुल इलाकों में प्रकृति पर्व सरहुल पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है। यह पर्व सूर्य और पृथ्वी के मिलन का प्रतीक माना जाता है। इस अवसर पर साल (सखुआ) वृक्ष की विशेष पूजा की जाती है। आदिवासी समाज की मान्यता है कि इसी वृक्ष में सरना मां का निवास होता है, जो गांव को प्राकृतिक आपदाओं से बचाती हैं। सरना स्थल पर सखुआ और महुआ के फूलों से पूजा कर प्रकृति के प्रति आभार प्रकट किया जाता है। सरहुल के मौके पर गांव के पाहन (पुजारी) द्वारा सरना स्थल में विधि-विधान से पूजा की जाती है। इस दौरान मिट्टी के घड़ों में पवित्र जल भरा जाता है। आज पाहन इन घड़ों के पानी की स्थिति देखकर वर्षा का अनुमान लगाएगें। परंपरा के अनुसार यदि पानी कम हो जाता है तो कम बारिश की संभावना मानी जाती है, जबकि पानी यथावत रहने पर अच्छी वर्षा का संकेत माना जाता है। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है। आज भी समाज में इसका विशेष महत्व है। हातमा से सिरमटोली तक निकलेगी भव्य शोभायात्रा राजधानी रांची में सरहुल पर्व की विशेष धूम देखने को मिलती है। आज हातमा स्थित सरना स्थल में पूजा-अर्चना के बाद आदिवासी समाज के लोग सिरमटोली तक भव्य शोभायात्रा निकालते हैं। दोपहर दो बजे से शोभायात्रा की शुरुआत हो जाएगी। इस दौरान पारंपरिक वेशभूषा में सजे लोग नृत्य और गीत के माध्यम से अपनी संस्कृति का प्रदर्शन करते हैं। रांची में सरहुल शोभायात्रा की शुरुआत की बात करें तो यह 1967 में कार्तिक उरांव के नेतृत्व में शुरू हुई थी। इसका उद्देश्य आदिवासी जमीन और संस्कृति की रक्षा करना था। आज यह शोभायात्रा पूरे राज्य में पहचान बना चुकी है। सरहुल के दौरान गांव के अखड़ा में सामूहिक नृत्य होता है, जिसमें महिलाएं, पुरुष और बच्चे बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं। रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधानों में सजे लोग हर्षोल्लास के साथ नृत्य करते हैं। यह पर्व प्रकृति, संस्कृति और सामूहिकता का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है। राजधानी में हाई अलर्ट, ड्रोन और सीसीटीवी से होगी निगरानी प्रकृति पर्व सरहुल और ईद को लेकर राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद कर दी गई है। शहर के चप्पे-चप्पे पर नजर रखने के लिए ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों का व्यापक इंतजाम किया गया है। एसएसपी राकेश रंजन ने बताया कि पुलिस मुख्यालय से अतिरिक्त बल उपलब्ध कराया गया है। जिला पुलिस के अलावा आईआरबी, जैप, होमगार्ड्स और केंद्रीय बलों के जवानों को विभिन्न स्थानों पर तैनात किया गया है। संवेदनशील इलाकों में विशेष निगरानी रखी जा रही है, ताकि पर्व के दौरान किसी भी प्रकार की अव्यवस्था न हो। सरहुल शोभायात्रा को लेकर ट्रैफिक व्यवस्था में बदलाव सरहुल शोभायात्रा के मद्देनजर शहर के कई प्रमुख मार्गों पर वाहनों के परिचालन पर रोक लगाई गई है। कांके रोड, रातू रोड, बोड़ेया रोड से रेडियम चौक, शहीद चौक, अलबर्ट एक्का चौक, मेन रोड, सुजाता चौक और मुंडा चौक होते हुए सिरमटोली सरना स्थल तक वाहन नहीं चलेंगे। इसी तरह नामकुम, खूंटी रोड, बिरसा चौक, डोरंडा ओवरब्रिज और अरगोड़ा-हरमू-कडरू मार्ग से आने वाले रास्तों पर भी प्रतिबंध रहेगा। रात 10:30 बजे तक रांची शहरी क्षेत्र में भारी वाहनों का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। सभी भारी वाहनों को रिंग रोड से होकर गुजरने का निर्देश दिया गया है। पुलिस प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे निर्धारित नियमों का पालन करें और वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करें। दोपहर 12:30 बजे से कई प्रमुख मार्ग रहेंगे बंद दोपहर 12:30 बजे से एसएसपी आवास चौक से कचहरी चौक, शहीद चौक, जाकिर हुसैन पार्क से कमिश्नर चौक, अपर बाजार, चडरी तालाब, पुरुलिया रोड, चर्च रोड, कर्बला, राजेंद्र चौक सहित कई प्रमुख मार्गों पर आवागमन बंद रहेगा। इन मार्गों पर केवल शोभायात्रा से जुड़े वाहन ही चल सकेंगे। ट्रैफिक व्यवस्था सुचारु रखने के लिए डायवर्जन प्लान लागू किया गया है। सर्कुलर रोड से आने वाले वाहन केवल जेल चौक तक आ सकेंगे। जमशेदपुर रोड से आने वाले वाहनों को चुटिया केतारी बगान होकर बहुबाजार की ओर मोड़ा जाएगा। कांटाटोली और पिस्का मोड़ से आने वाले वाहनों के लिए भी वैकल्पिक मार्ग निर्धारित किए गए हैं।

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