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रांची | महापर्व सरहुल शनिवार को धूमधाम से मनाया गया। सरहुल का उद्गम स्थल मोरहाबादी स्थित हातमा सरना स्थल समेत सहित शहर के सभी सरना स्थलों में परंपरागत रीति-रिवाज से सरहुल की पारंपरिक पूजा की गई। मुख्य पाहन जगलाल ने उपवास रखकर सुबह 10 बजे विधि-विधान के साथ सरहुल पूजा कराई। मुख्य पाहन जगलाल ने सरई फूल, अक्षत, अरवा चावल, हडिया, लाल साग, धुवन पूजन सामग्री से पूजा की। फिर सरना स्थल में रखे दो घड़ों में पानी को देखकर बारिश की भविष्यवाणी की। कहा कि घड़ों में पानी का स्तर सामान्य है, इसलिए इस बार सामान्य यानि की अच्छी बारिश होने की संभावना है। इस बार खेती भी अच्छी होगी। खेतों में धान लहलाएंगे। फिर लोगों ने पाहन को स्नान कराया और उनके पैर धोए। मुख्य सरना स्थल सरना टोली हातमा में पूजा के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन व केंद्रीय सरना समिति अध्यक्ष बबलू मुंडा के साथ अन्य लोग शामिल हुए। पूजा के दौरान सृष्टिकर्ता, ग्राम देवता, पूर्वजों, धरती मां, सूर्य, जल, वायु, आकाश, पेड़-पौधों और पहाड़-पर्वतों का स्मरण किया गया। सभी जीव-जंतुओं और मानव जाति के लिए सुख-शांति, पर्याप्त जल-अनाज और सृष्टि के कल्याण की प्रार्थना की गई। दोपहर 2 बजे से हातमा से भव्य शोभायात्रा निकाली गई।
जल-जंगल व जमीन को बचाएं : जगलाल मुख्य पाहन जगलाल ने कहा कि सरहुल शोभा यात्रा की शुरुआत लगभग 1967 में स्व. कार्तिक उरांव के नेतृत्व में हुई थी। इसका मुख्य उद्देश्य आदिवासियों की धर्म-संस्कृति और परंपराओं को दुनिया के सामने लाना और आपसी एकता को दर्शाना है। सरहुल पर्व प्रकृति की पूजा है। कहा कि जल, जंगल व जमीन का बचाव करें।




