सीटें बढ़ी तो रिम्स में 250 व 3 मेडिकल कॉलेजों में 150-150 सीटों पर दाखिला

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मंजूरी पर टिकी नजर: रिम्स में 250 और तीन मेडिकल कॉलेजों में 150-150 सीटों पर दाखिले का प्रस्ताव
झारखंड में चिकित्सा शिक्षा के विस्तार की दिशा में राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के कुलपति की नियुक्ति के ठीक अगले दिन, सरकार ने विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में यूजी (UG) और पीजी (PG) सीटों में बढ़ोतरी के लिए नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) को प्रस्ताव भेजा है। इसका लक्ष्य आगामी शैक्षणिक सत्र से सीटें बढ़ाकर राज्य में डॉक्टरों की कमी को दूर करना है। रिम्स में 250 सीटों पर दाखिले की तैयारी यदि अगले सत्र से सीटों में बढ़ोतरी होती है, तो रिम्स में यूजी और पीजी दोनों पाठ्यक्रमों में 250-250 सीटों पर दाखिला लिया जा सकेगा। हालांकि, रिम्स में यूजी सीटों को 180 से बढ़ाकर 250 करने की योजना पुरानी है। वर्ष 2019 में एनएमसी ने एकेडमिक बिल्डिंग और फैकल्टी की कमी के कारण इसकी अनुमति नहीं दी थी। अब कुछ कमियों को दूर कर सरकार ने पुनः प्रस्ताव भेजा है। यदि इस बार मंजूरी मिलती है, तो यह राज्य के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थान की क्षमता में बड़ी वृद्धि होगी। पीजी सीटों में भी बढ़ोतरी का प्रस्ताव सरकार ने पोस्ट ग्रेजुएट (PG) सीटों के विस्तार पर भी जोर दिया है। जमशेदपुर में पीजी सीटें 45 से बढ़कर 51 हो चुकी हैं। वहीं, धनबाद में सीटों की संख्या 9 से बढ़ाकर 19 कर दी गई है और इसे 25 तक ले जाने का प्रस्ताव है। इसके अलावा दुमका, हजारीबाग और पलामू के नए मेडिकल कॉलेजों में भी पीजी कोर्स शुरू करने की तैयारी है। तकनीकी मानकों और कमियों के कारण यह मामला लंबे समय से लंबित था, जिसे अब गति दी जा रही है। दुमका, हजारीबाग और धनबाद में सीटें बढ़ेंगी जमशेदपुर के एमजीएम मेडिकल कॉलेज में इस साल यूजी सीटें 100 से बढ़ाकर 150 कर दी गई हैं। इसी तर्ज पर दुमका, हजारीबाग और धनबाद मेडिकल कॉलेजों में भी सीटों को 100 से बढ़ाकर 150 करने का प्रस्ताव भेजा गया है। सरकार का मानना है कि इससे स्थानीय स्तर पर विशेषज्ञ डॉक्टर तैयार हो सकेंगे। स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह के अनुसार, सीटों में बढ़ोतरी से राज्य की चिकित्सा शिक्षा मजबूत होगी। इससे न केवल विशेषज्ञ डॉक्टरों की संख्या बढ़ेगी, बल्कि ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में भी बेहतर इलाज उपलब्ध हो सकेगा, जिससे मरीजों को इलाज के लिए राज्य से बाहर नहीं जाना पड़ेगा।

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