झमाझम बारिश में खूब थिरका सरहुल

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मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपनी पत्नी कल्पना सोरेन और बच्चों के साथ आदिवासी कॉलेज छात्रावास करमटोली व मुख्य सरनास्थल सिरमटोली पहुंचे और विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने कहा, “सरहुल महोत्सव प्रकृति से जुड़ाव और पूर्वजों की परंपराओं को आगे बढ़ाने का पर्व है। हमारे पूर्वजों ने जो परंपराएं हमें सौंपी हैं, उन्हें अगली पीढ़ी तक पहुंचाना हमारी जिम्मेदारी है। प्रकृति से बड़ी कोई पूजा नहीं है। प्रकृति में ही सभी चीजों का सृजन होता है और अंततः उसी में विलय हो जाता है। अगर प्रकृति सुरक्षित रहेगी तभी मानव जीवन और संसार के जीव-जंतु सुरक्षित रहेंगे।” उन्होंने जोर देकर कहा कि आज के भौतिकवादी युग में भी हमें अपनी जड़ों से जुड़ा रहना होगा। बारिश भी नहीं रोक पाई उत्साह का सैलाब सखुआ के फूलों की महक और मांदर की गूंज के बीच शनिवार को रांची का हर अखरा जीवंत हो उठा। हातमा सरना स्थल पर मुख्य पाहन जगलाल ने घड़ों के पानी को देखकर अच्छी बारिश और बंपर फसल की भविष्यवाणी की, जिस पर मानों इंद्रदेव ने खुद मुहर लगा दी। दोपहर होते ही शहर में झमाझम बारिश और ओलों की फुहारें गिरने लगीं, लेकिन सरहुल का उत्साह कम नहीं हुआ। लाल पाड़ साड़ी में थिरकती युवतियां और पारंपरिक परिधानों में सजे युवाओं ने बारिश के बीच भी अपनी परंपरा का परचम लहराए रखा। अलबर्ट एक्का चौक से सिरमटोली तक निकले जुलूस में लोग भीगते हुए नाचते-गाते रहे। झांकियों के जरिए ‘प्रकृति बचाओ, खुशियां मनाओ’ का संदेश भी दिया गया।

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