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मधुबनी जिले में कालाजार रोग की रोकथाम और नियंत्रण के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा चलाए जा रहे इंडोर रेजिडुअल स्प्रे (आईआरएस) अभियान का जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी (डीवीबीडीसीओ) डॉ. डी.एस. सिंह ने निरीक्षण किया। उन्होंने बासोपट्टी प्रखंड के फेंट गांव का दौरा कर अभियान का जायजा लिया। जिले में 16 मार्च से आईआरएस छिड़काव कार्यक्रम का पहला चरण शुरू हुआ है। इस अभियान के तहत, वर्ष 2025 में चिन्हित कालाजार मरीजों के आधार पर चयनित गांवों में दवा का विशेष छिड़काव किया जा रहा है। इसका उद्देश्य रोग फैलाने वाली बालू मक्खी (सैंड फ्लाई) को नष्ट करना है। निरीक्षण के दौरान डॉ. सिंह ने बताया कि पहले चरण में कलुआही, बासोपट्टी, झंझारपुर, घोघरडीहा और मधेपुर सहित जिले के पांच प्रखंडों के चिन्हित गांवों में छिड़काव कार्य चल रहा है। उन्होंने कर्मियों को निर्देश दिए कि सभी घरों में पूरी सतह पर सही तरीके से छिड़काव सुनिश्चित करें और कोई भी घर छूटना नहीं चाहिए। डॉ. सिंह ने जोर दिया कि कालाजार सैंड फ्लाई के काटने से फैलने वाला एक गंभीर लेकिन नियंत्रणीय रोग है, और इसके बचाव के लिए घरों की दीवारों व कोनों में दवा का छिड़काव अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने टीमों के पास पर्याप्त दवा, उपकरण और सुरक्षा सामग्री की उपलब्धता भी सुनिश्चित की। इस अवसर पर बीडीसीओ पुरुषोत्तम कुमार ने ग्रामीणों से अपील की कि वे छिड़काव के दौरान अपने घरों के सभी कमरों को खुला रखें और अभियान दल को पूरा सहयोग दें। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि छिड़काव के बाद कुछ घंटों तक दीवारों को न छुआ जाए और न ही धोया जाए, ताकि दवा का प्रभाव बना रहे। डॉ. सिंह ने आम जनता से कालाजार उन्मूलन के लिए सामुदायिक सहयोग की अपील की। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति में लगातार बुखार, वजन कम होना या कमजोरी जैसे लक्षण दिखें, तो तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराएं। समय पर पहचान, उपचार और छिड़काव के माध्यम से इस बीमारी पर प्रभावी नियंत्रण संभव है। इस दौरान एसीएमओ डॉ. एस.एन. झा, लक्ष्मीकांत और अन्य संबंधित कर्मी भी उपस्थित थे।
डीवीबीडीसीओ ने कालाजार छिड़काव अभियान का निरीक्षण किया:बासोपट्टी के फेंट गांव का दौरा किया, कर्मचारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए
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