
President Draupadi Murmu: पश्चिम बंगाल में चुनावी बिगुल बज चुका है. दिल्ली के गलियारों में ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) और राष्ट्रपति भवन के बीच ‘शह-मात’ का खेल जारी है. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने एक बार फिर समय की कमी का हवाला देते हुए तृणमूल प्रतिनिधिमंडल से मिलने के अनुरोध को ठुकरा दिया है. बंगाल की सत्ताधारी पार्टी अपनी जनकल्याणकारी योजनाओं और ‘समावेशी विकास’ का रिपोर्ट कार्ड राष्ट्रपति को सौंपना चाहती है, लेकिन राष्ट्रपति भवन से मिलने का समय नहीं मिल रहा है.
राष्ट्रपति भवन को टीएमसी ने तीसरी बार लिखी चिट्ठी
- तृणमूल कांग्रेस ने सबसे पहले 9 मार्च को राष्ट्रपति को पत्र लिखकर मुलाकात का वक्त मांगा था, लेकिन 11 मार्च को समय के अभाव का हवाला देते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रतिनिधिमंडल से मिलने से इनकार कर दिया.
- ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (AITC) ने दोबारा 16 और 20 मार्च के बीच मिलने का समय मांगा, लेकिन 22 मार्च को राष्ट्रपति भवन से फिर जवाब आया- समयाभाव के चलते नहीं मिल सकतीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू.
- हार न मानते हुए ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने सोमवार (23 मार्च) को फिर से पत्र भेजकर 24 मार्च से 2 अप्रैल के बीच किसी भी दिन मुलाकात की गुहार लगायी.
आदिवासी सम्मेलन विवाद की कड़वाहट या प्रोटोकॉल?
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यह इनकार महज ‘व्यस्तता’ नहीं, बल्कि हाल ही में राष्ट्रपति की बंगाल यात्रा के दौरान हुए विवाद का नतीजा है. 7 मार्च को बंगाल दौरे पर आयीं राष्ट्रपति ने संताल समुदाय के सम्मेलन का वेन्यू (आयोजन स्थल) बदलने पर नाराजगी जतायी थी. वह इस बात से भी आहत थीं कि उनकी यात्रा के दौरान न तो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और न ही कोई कैबिनेट मंत्री वहां मौजूद था.
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ममता बनर्जी ने किया था सियासी पलटवार
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की नाराजगी पर वेस्ट बंगाल की चीफ मिनिस्टर ममता बनर्जी ने महामहिम पर ‘भाजपा के इशारे पर’ बोलने का आरोप लगाया. तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ने मणिपुर हिंसा और स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया में लाखों लोगों के नाम हटाये जाने पर राष्ट्रपति की चुप्पी साधने के आरोप लगा दिये.
पीएम मोदी और भाजपा का करारा हमला
इस विवाद ने चुनावी मोड़ ले लिया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति के प्रति तृणमूल के व्यवहार को ‘शर्मनाक और अप्रत्याशित’ करार दिया. भाजपा ने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी की सरकार ने एक आदिवासी राष्ट्रपति का अपमान करके सभी मर्यादाएं लांघ दी हैं. अब देखना यह है कि 2 अप्रैल से पहले राष्ट्रपति भवन अपने दरवाजे तृणमूल के लिए खोलता है या यह ‘लेटर वॉर’ और तेज होगा.
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