'एप खरीदने के लिए पापा के पास 1800रु. नहीं थे':इंटर टॉपर के पिता बोले- जमीन बेचकर बेटी को पढ़ाएंगे, 12वीं टॉपर की सक्सेस स्टोरी

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‘पापा पेशे से किसान हैं, दादा भी किसान थे। इनकम का कोई सोर्स नहीं है। पापा से एक बार मैंने कहा कि मुझे टारगेट बोर्ड का एजुकेशन एप खरीदना है, जिसकी मदद से मैं पढ़ाई करूंगी। पापा ने पूछा कि कितने का आएगा, मैंने बताया कि 1800 रुपए कीमत है। पापा को ये 1800 रुपए जुटाने में एक महीने से अधिक का समय लगा। इस दौरान मैं कभी परेशान नहीं हुई, क्योंकि मुझे पता था कि पापा की आर्थिक हालत बिल्कुल ठीक नहीं है। अब जब मैं आर्ट्स में टॉप कर गई हूं, मम्मी-पापा, दादा-दादी सभी का कहना है कि आगे तुम जो भी पढ़ाई करना चाहोगी, हम कराएंगे, तुम्हारी पढ़ाई नहीं रुकेगी, भले खेत और घर बेचना पड़े।’ गयाजी मुख्यालय से करीब 25 किलोमीटर दूर खिजरसराय के लोदीपुर के रहने वाली निशु कुमारी (17) ने ये बातें दैनिक भास्कर से बातचीत में कही। निशु की पढ़ाई का शेड्यूल क्या था, निशु के माता-पिता क्या करते हैं, नाना के मौत के बाद भी निशु ने एग्जाम की तैयारी कैसे की, रिजल्ट से पहले एग्जामिनेशन बोर्ड ने उन्हें पटना बुलाकर क्या बातचीत की? पढ़िए पूरी रिपोर्ट। निशु के घर की 3 तस्वीरें देखिए… अब जानिए किन परिस्थितियों में निशु ने एग्जाम की तैयारी की? निशु कुमारी अपनी भाई-बहन, माता-पिता, दादा-दादी के साथ 5 कमरों वाले मकान में रहती है। मकान बाहर से ठीक-ठाक है, लेकिन अंदर की दीवारों पर प्लास्टर नहीं है, दीवारें खुरदरी हैं। 5 कमरों में एक कमरे में निशु अपनी बहन, भाई के साथ रहती हैं, जबकि दूसरे कमरे में चाचा-चाची, तीसरे कमरे में मम्मी-पापा, चौथे कमरे में अनाज का स्टोर और पांचवें कमरे में किचन है। निशु जिस कमरे में पढ़ाई करती है, उसकी लंबाई चौड़ाई 8×10 है। इस कमरे की दीवारों में 5×3 का अलमारी है, जिसमें निशु, उसके भाई और बहन की किताबें रखी हैं। वहीं खुरदरी दीवारों पर बिहार और भारत का मैप लगा है, जिसे देखकर निशु अपनी पढ़ाई करती है। इसी कमरे में पढ़ाई कर निशु ने इंटर में आर्ट्स से बिहार में टॉप किया है। निशु को 500 में से 479 मार्क्स मिले हैं। पढ़िए निशु की पूरी सक्सेस स्टोरी 10वीं में 2 नंबर से टॉपर बनने से चूक गई थी, इस बार मौका नहीं छोड़ना चाहती थी खिजरसराय यशवंत इंटर स्कूल की स्टूडेंट निशु कुमारी बताती हैं, ‘मैट्रिक में 465 नंबर थे। टॉप होने से चूक गई थी। उसी समय ठान लिया था कि इंटर में टॉप करना है। लेक्चर सुनती थी और रिवीजन-प्रैक्टिस भी किया करती थी। मेरे दादा, पापा, स्कूल के टीचर ने मुझसे कहा था कि तुम और बेहतर तरीके से तैयारी करो, पढ़ाई करो, देखना इंटर में तुम टॉप कर जाओगी। इसी लक्ष्य को लेकर मैंने 8 से 10 घंटे पढ़ाई की और नतीजा सबके सामने है।’ निशु बताती हैं, ‘24 घंटे में सबसे ज्यादा बहन के साथ रहती हूं। मेरी बुआ बीएड कर रही हैं, मैं उनसे प्रेरणा लेकर आगे की तैयारी करती हूं। मेरी और मुझसे कम उम्र की जो लड़कियां हैं, अगर मैं गांव में रहकर ऐसा रिजल्ट ला सकती हूं, तो आप लोग भी ईमानदार मेहनत से काफी कुछ बेहतर कर सकती हैं।’ निशु बताती हैं, ‘जब नाना की डेथ हुई थी, तब मेरी मां रो रही थी। इस दौरान मेरे मन में ख्याल आ रहा था कि जो हुआ वो तो गलत हुआ। मैंने सोचा कि मां अपने पापा के निधन से दुखी है, लेकिन मैं बेहतर रिजल्ट दूंगी, जिससे मम्मी के चेहरे पर खुशी आ सके।’ नाना के निधन में ननिहाल गई, लेकिन 3 दिनों में ही वापस लौट गई निशु ने बताया, ‘एग्जाम से 20 दिन पहले मेरे नाना का निधन हो गया था। घर का माहौल बिलकुल ठीक नहीं था। मम्मी अपने पापा के लिए बार-बार रो रही थी। मैं नाना को मिस कर रही थी, लेकिन एग्जाम की वजह से मुझे नाना के घर जाने का मन नहीं हो रहा था। हालांकि, मम्मी पापा के जिद पर मुझे ननिहाल जाना पड़ा, लेकिन 3 दिनों में ही वापस लौट गई। मुझे पता था कि नाना के घर रहूंगी तो मेरा गोल पूरा नहीं हो पाएगा। इसलिए जल्दी वापस घर आ गई। हालांकि, नाना के दशकर्म में नाना के घर गई। इस दौरान मैंने पढ़ाई बिलकुल भी नहीं की।’ निशु ने बताया- ऑनलाइन पढ़ाई कर भूगोल में मिले 100 मार्क्स स्कूल में भूगोल के टीचर नहीं हैं, फिर भी 100 में 100 नंबर लाने वाले सवाल पर निशु ने बताया, ‘ये बिल्कुल सही है कि मैं जिस स्कूल में पढ़ाई करती हूं, वहां भूगोल के टीचर नहीं है। कॉमर्स की पिंकी मैम हैं, वो हम लोगों को जितना हो सकता था, समझाती थी। मैंने भूगोल का कोर्स खरीदा था। ऑनलाइन पढ़ाई करके भूगोल की तैयारी की। मेरी अंग्रेजी थोड़ी कमजोर है, वजह है कि शुरुआत से ही कमजोर है।’ मेरी सफलता में मम्मी-पापा की सोच का बड़ा रोल निशु बताती हैं, ‘मेरी सफलता में मम्मी-पापा की सोच का बड़ा रोल है। इसके अलावा दादा-दादी का भी पूरा योगदान है। पापा कभी-कभी कुछ चीजें पूरा नहीं कर पाते थे, तब दादा-दादी से मदद मांगती थी। फिर उस जरूरत को दादा-दादी पूरा कर देते थे। समाज में अब भी कुछ ऐसे लोग हैं, जो बेटियों को घर से बाहर नहीं निकालना चाहते हैं, लेकिन ये सोच गलत है। समाज काफी विकसित हो चुका है।’ अब जानिए रिजल्ट से पहले निशु को पटना क्यों बुलाया गया निशु को रिजल्ट आने से तीन दिन पहले यानी 19 मार्च को पटना बुलाया गया था। बिहार बोर्ड ने पटना में निशु का इंटरव्यू लिया। यहां निशु की हैंडराइटिंग चेक की गई, उसके आंसरशीट से इसे मिलाया गया। एग्जाम में जो सवाल आए थे, उसका मौखिक जवाब भी निशु से पूछा गया। निशु ने अधिकारियों के सभी सवालों के सही जवाब दिए। घर लौटने के बाद निशु ने माता-पिता और दादा-दादी को बता दिया था कि रिजल्ट का इंतजार कीजिए, मैं ही टॉप करूंगी। अब जानिए निशु की सफलता पर माता-पिता और दादा का क्या कहा निशु की मां रिंकी देवी ने बताया कि मैंने बेटी को एक साल पहले ही मोबाइल दिया था। इससे पहले पापा के मोबाइल से पढ़ाई करती थी। मुझे बेटी पर पूरा भरोसा था कि जो करेगी, बेहतर करेगी। आगे बेटी पढ़ाई के लिए जो कुछ कहेगी, करूंगी। भले ही बेटी की पढ़ाई के लिए मुझे अपना घर और जमीन बेचना पड़े। निशु के पिता आमोद प्रसाद ने बताया कि निशु का स्कूल घर से 1 किलोमीटर दूर है। बेटी को रेग्यूलर स्कूल भेजा। वो पैदल ही अकेले स्कूल चली जाती थी। बचपन में निशु प्राइवेट स्कूल में पढ़ाई करती थी। वहां भी निशु का प्रदर्शन अच्छा रहता था। इसके बाद घर की स्थिति ऐसी नहीं थी, जिसे मेरी बेटी ने खुद समझा और कोरोना काल के दौरान बेटी ने कहा कि मेरा एडमिशन सरकारी स्कूल में करा दीजिए। बेटी ने ही प्राइवेट स्कूल से बिहार बोर्ड में एडमिशन कराने की बात कही थी। निशु के पिता बोले- कभी-कभी किताब-कॉपी के लिए कर्ज लेना पड़ता था पेशे से किसान आमोद प्रसाद ने कहा कि खेती-किसानी में ज्यादा कमाई नहीं होती है। बेटी के स्कूल फीस के लिए तो नहीं, लेकिन कॉपी-किताब के लिए कभी-कभी कर्ज जरूर लेना पड़ता था। निशु के दादा रामाशीष प्रसाद ने कहा कि मुझे पूरी उम्मीद थी कि पोती टॉप करेगी। पोती जब एग्जाम देकर आई थी, तभी बता दिया था कि मैं बिहार टॉप करूंगी। रामाशीष प्रसाद बताते हैं कि दो से तीन बीघा खेती है, जिसमें बेटा भी साथ देता है। किसी तरह परिवार चलता है। मेरे बेटे और निशु के पिता ने निशु की पढ़ाई में कोई कसर नहीं छोड़ी। उन्होंने बताया था कि पैसे इतने नहीं थे कि निशु कोचिंग जाए। उसने घर पर ही खुद से पढ़ाई कर ये सफलता हासिल की है। ‘शिक्षा मंत्री का नाम पूछा गया था, कन्फ्यूज हो गई थी, मुझे पता था’ एक यूट्यूबर ने बिहार के शिक्षा मंत्री का नाम पूछ लिया था, जिसका जवाब निशु नहीं दे पाई थी। इसके बारे में पूछने पर निशु बताती हैं कि इंसान से गलती होती है, सभी को सब कुछ पता नहीं होता है।

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