ओपन यूनिवर्सिटी: चार हजार छात्र, पर कोई शिक्षक नहीं, सिर्फ वीसी ही स्थाई

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आपके द्वारा साझा किए गए समाचार आलेख में वर्तनी (Spelling), टाइपिंग की अशुद्धियां (जैसे ‘आेपन’, ‘कर्मचा​री’ के बीच अनावश्यक स्पेस) और कुछ व्याकरण संबंधी त्रुटियां थीं। यहाँ पूरी तरह शुद्ध और व्यवस्थित पाठ दिया गया है: झारखंड स्टेट ओपन यूनिवर्सिटी: 8 साल बाद भी उधार के कमरों और संविदा के भरोसे देशभर में ओपन यूनिवर्सिटी उच्च शिक्षा का एक मजबूत विकल्प बन चुकी है, जहाँ लाखों छात्र नियमित रूप से शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। लेकिन झारखंड में यह मॉडल आठ साल बाद भी मजबूती से जमीन पर खड़ा नहीं हो पाया है। यह एक ऐसी यूनिवर्सिटी है, जहाँ केवल कुलपति ही स्थायी हैं; न अपना स्थायी कैंपस है, न ही स्थायी शिक्षक और कर्मचारी। वर्तमान में राज्यभर में इसके 193 स्टडी सेंटर संचालित हैं और चार हजार से ज्यादा छात्र नामांकित हैं, जबकि यहाँ केवल दर्जनभर कर्मचारी संविदा (कॉन्ट्रैक्ट) पर कार्यरत हैं। स्थापना और संघर्ष का सफर झारखंड में उच्च शिक्षा का दायरा बढ़ाने के लिए वर्ष 2018 में ‘झारखंड स्टेट ओपन यूनिवर्सिटी’ की स्थापना की गई थी। इसका उद्देश्य उन छात्रों तक शिक्षा पहुँचाना था जो नियमित कॉलेज नहीं जा पाते। वर्ष 2022 में यहाँ शैक्षणिक सत्र की शुरुआत हुई, लेकिन अब तक बुनियादी ढांचे और नियुक्तियों का अभाव है। कैंपस: शुरुआत बिरसा एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी (BAU) के कमरों से हुई थी, जिसे अब खाली कर कांके रोड स्थित किराए के भवन में शिफ्ट कर दिया गया है। विवाद: दो करोड़ की लागत से बना स्टूडियो शुरू होने से पहले ही शिफ्टिंग के कारण चर्चा में रहा। नियुक्तियों में गड़बड़ी के आरोपों के बाद राजभवन ने परीक्षा परिणामों पर रोक लगा दी है। यूनिवर्सिटी का वर्तमान ढांचा मुख्य चुनौतियां और वर्तमान स्थिति 1. अनगड़ा में जमीन आवंटित, पर काम बंद: राज्य सरकार ने यूनिवर्सिटी के स्थायी कैंपस के लिए रांची के अनगड़ा में 6.18 एकड़ जमीन आवंटित की है। अधिकारियों ने कई बार जमीन का निरीक्षण किया है, लेकिन निर्माण कार्य अब तक शुरू नहीं हो पाया है। 2. यूजीसी की शर्तें और कोर्स का विस्तार: यूजीसी (UGC) ने जनजातीय राज्य होने के नाते विशेष अनुमति के तहत 5 यूजी-पीजी कोर्स शुरू करने की अनुमति दी है। हालांकि, स्पष्ट शर्त रखी गई है कि अन्य कोर्स तभी शुरू किए जा सकेंगे जब स्थायी फैकल्टी की नियुक्ति प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। 3. ‘उधार’ के कमरों से किराए के भवन तक: बीएयू (BAU) में नए कुलपति की नियुक्ति के बाद ओपन यूनिवर्सिटी को वहां से हटने का निर्देश मिला। कुलपति प्रो. अभय कुमार सिंह ने पुष्टि की है कि अब यूनिवर्सिटी कांके रोड स्थित किराए के कमरों में शिफ्ट हो चुकी है।

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