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सीवान के बड़हरिया थाना क्षेत्र स्थित लकड़ी दरगाह गांव में गुरुवार को पुराना विवाद हिंसक झड़प में बदल गया। दो पक्षों के बीच हुई इस मारपीट में एक युवक गंभीर रूप से घायल हो गया, जबकि दूसरे को मामूली चोटें आईं। हालांकि घटना से ज्यादा चर्चा पुलिस की कार्रवाई को लेकर हो रही है, जिस पर अब गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। पुराने विवाद में भड़की हिंसा जानकारी के अनुसार, लकड़ी दरगाह गांव में पहले से चल रहे विवाद ने अचानक उग्र रूप ले लिया। देखते ही देखते दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए और जमकर मारपीट होने लगी। इस घटना में अहमद अली के 25 वर्षीय पुत्र निजाम अहमद गंभीर रूप से घायल हो गए, जबकि वीरेंद्र प्रसाद के 30 वर्षीय पुत्र रोहित कुमार को हल्की चोटें आईं। पुलिस ने दोनों को अपनी कस्टडी में लेकर इलाज के लिए पहले स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र और फिर सदर अस्पताल में भर्ती कराया। घटना के बाद गांव में तनाव, लोगों ने किया हंगामा मारपीट की घटना के बाद गांव में तनावपूर्ण माहौल बन गया। बड़ी संख्या में ग्रामीण इकट्ठा हो गए और पुलिस के खिलाफ विरोध जताने लगे। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुलिस ने बिना पूरी जांच के जल्दबाजी में एकतरफा कार्रवाई करते हुए सिर्फ एक पक्ष को आरोपी बना दिया, जिससे लोगों में आक्रोश फैल गया। वीडियो सामने आने से बदला पूरा मामला मामले ने उस समय नया मोड़ लिया जब घटना का एक वीडियो सामने आया। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि रोहित कुमार और उसके दो साथी मिलकर निजाम अहमद के साथ बेरहमी से मारपीट कर रहे हैं। वीडियो में यह भी दिख रहा है कि निजाम को जमीन पर गिराकर घसीटा जा रहा है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि हमला एकतरफा था। इस खुलासे के बाद पुलिस की शुरुआती कार्रवाई पर सवाल खड़े होने लगे। पीड़ित का आरोप- गाड़ी रोककर किया हमला घायल निजाम अहमद का कहना है कि वह अपने बंद पड़े घर को देखने गांव आया था। इसी दौरान रोहित कुमार और उसके साथियों ने उसकी गाड़ी रोक ली और उस पर हमला कर दिया। निजाम ने आरोप लगाया कि हमलावरों ने फायरिंग की और बाद में उल्टा उसी पर गोली चलाने का आरोप लगा दिया। मेडिकल रिपोर्ट ने पुलिस की थ्योरी पर उठाए सवाल सदर अस्पताल के डॉक्टर रजनीकांत तिवारी ने जांच के बाद स्पष्ट किया कि रोहित कुमार को गोली लगने का कोई सबूत नहीं मिला है। डॉक्टर की इस पुष्टि के बाद पुलिस की शुरुआती थ्योरी संदेह के घेरे में आ गई है। मौके पर पहुंचे एसपी, जांच का दायरा बढ़ा घटना की सूचना मिलते ही एसपी पूरन कुमार झा मौके पर पहुंचे और स्थिति को नियंत्रित किया। एसपी ने बताया कि शुरुआती साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई की गई थी, लेकिन वीडियो सामने आने के बाद जांच का दायरा बढ़ा दिया गया है। पुलिस की कार्रवाई पर उठ रहे बड़े सवाल इस घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि जब वीडियो में साफ तौर पर मारपीट दिखाई दे रही थी, तो पुलिस ने इतनी जल्दबाजी में एक पक्ष को आरोपी क्यों बना दिया। क्या यह लापरवाही थी या किसी दबाव में लिया गया फैसला—इसको लेकर गांव में तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। ग्रामीणों में आक्रोश, निष्पक्ष जांच की मांग ग्रामीणों का कहना है कि अगर वीडियो सामने नहीं आता, तो निर्दोष को ही आरोपी बनाकर मामला खत्म कर दिया जाता। फिलहाल पुलिस ने दोनों पक्षों से आवेदन लेकर केस दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, लेकिन लोगों का गुस्सा अब भी शांत नहीं हुआ है। कानून-व्यवस्था और निष्पक्षता पर सवाल यह घटना न सिर्फ कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़ी करती है, बल्कि पुलिस की निष्पक्षता पर भी गंभीर चिंता पैदा करती है। अब देखना होगा कि जांच में सच्चाई सामने आती है या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह ठंडे बस्ते में चला जाता है।

