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केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और किसान संगठनों के आह्वान पर बुलाए गए देशव्यापी भारत बंद का असर भागलपुर में व्यापक रूप से देखा गया। इस दौरान शहर में बैंकिंग सेवाएं पूरी तरह प्रभावित रहीं, जिससे आम उपभोक्ताओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। बैंक कर्मचारियों ने अपनी-अपनी शाखाओं के बाहर एकजुट होकर केंद्र सरकार की श्रम नीतियों के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में बैनर और तख्तियां लेकर श्रमिक विरोधी कानूनों को वापस लेने की मांग की। बंद में इंटक, एआईटीयूसी, एचएमएस, सीआईटीयू, एआईयूटीयूसी, टीयूसीसी, सेवाकर्मियों की यूनियन, एआईसीसीटीयू, एलपीएफ और यूटीयूसी सहित 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने सक्रिय भागीदारी की। कर्मचारियों के अधिकारों में कटौती का आरोप ट्रेड यूनियन नेताओं के अनुसार, केंद्र सरकार की ओर से लागू किए गए चार नए श्रम कोड ने 29 पुराने श्रम कानूनों का स्थान ले लिया है। उनका आरोप है कि इन नए कानूनों से कर्मचारियों के अधिकारों में कटौती हुई है, नौकरी की सुरक्षा कमजोर हुई है, और नियोक्ताओं को कर्मचारियों को आसानी से नियुक्त करने तथा निकालने की छूट मिल गई है, जो श्रमिक हितों के खिलाफ है। बैंक बंद रहने के कारण लोगों को नकद निकासी, चेक क्लियरेंस और अन्य आवश्यक लेन-देन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। विशेष रूप से बुजुर्गों, छोटे व्यापारियों और दैनिक लेन-देन पर निर्भर लोगों को सर्वाधिक परेशानी हुई। कई उपभोक्ता बिना काम कराए ही बैंक शाखाओं से लौटने को मजबूर हुए। प्रदर्शनकारी कर्मचारियों ने सरकार से श्रम कोड वापस लेने, श्रमिकों के हितों की रक्षा करने और रोजगार सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की। यूनियन नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं करती है, तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
भागलपुर में भारत बंद से बैंकिंग सेवाएं ठप:केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन, कर्मचारियों ने कानून वापस लेने की मांग की
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