भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में हुई ट्रेड डील पर कई सवाल अभी भी अनसुलझे हैं. यह समझौता अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच फोन बातचीत के बाद सामने आया, जिसमें अमेरिका ने भारत से आने वाले सामान पर टैरिफ घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया. ट्रंप ने इसे तुरंत प्रभावी बताया और कहा कि इससे यूक्रेन युद्ध खत्म करने में मदद मिलेगी. ट्रंप इसे ‘फादर ऑफ ऑल डील’ बता रहे हैं. PM मोदी ने अपनी प्रतिक्रिया में सिर्फ 18 प्रतिशत टैरिफ कम होने की खुशी जताई और दोनों बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के सहयोग से लोगों को फायदा होने की बात कही, लेकिन ट्रंप के अन्य दावों का कोई जिक्र नहीं किया. इससे 5 बड़े सवाल उठते हैं…
सवाल 1: अमेरिका-भारत व्यापार समझौता कहां है?
जवाब: ट्रंप ने इसे व्यापार सौदा कहा, लेकिन यह नहीं बताया कि यह सिर्फ टैरिफ कटौती है या PM मोदी की 2025 अमेरिका यात्रा के बाद शुरू हुई फ्री ट्रेड एग्रीमेंट की पहली किस्त. रातों-रात ट्रंप का मूंड बदल गया और उन्होंने भारत पर टैरिफ कम कर दिया. कुल मिलाकर उन्होंने PM मोदी की दोस्ती याद की और उनकी तारीफ कर दी. बहरहाल इस समझौते में टैरिफ, गैर-टैरिफ बाधाएं, बाजार पहुंच और निवेश जैसे मुद्दे शामिल होने चाहिए थे, लेकिन दोनों सरकारों ने इसकी कोई जानकारी नहीं दी. यूरोपीय संघ (EU) के साथ हुए समझौते के उलट यहां पूरी जानकारी नहीं दी गई. कृषि क्षेत्र जैसे सोयाबीन और डेयरी में बाजार पहुंच पर भी कोई स्पष्टता नहीं है, जहां भारत खुलने से हिचकिचाता रहा है.
सवाल 2: क्या 18 प्रतिशत टैरिफ भारत की क्षेत्रीय असमानता को दूर करेगा?
जवाब: अप्रैल 2025 में लगाया गया 25 प्रतिशत टैरिफ बांग्लादेश और वियतनाम (20 प्रतिशत), पाकिस्तान (19 प्रतिशत) से ज्यादा था. नया 18 प्रतिशत बेहतर है, लेकिन पड़ोसी देशों को GSP के तहत 5 प्रतिशत की छूट मिलती है, जिससे भारत को अभी भी नुकसान है. निर्यातक क्षेत्रों में अभी भी चुनौतियां बनी हुई हैं.
सवाल 3: रूसी तेल आयात का क्या होगा?
जवाब: ट्रंप ने कहा कि PM मोदी ने रूसी तेल बंद करने और वेनेजुएला से ज्यादा तेल खरीदने पर सहमति दी, लेकिन विदेश मंत्रालय ने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की. सरकार हमेशा कहती रही है कि तेल खरीद व्यावसायिक और बाजार आधारित है. यह ऊर्जा सुरक्षा के लिए जरूरी है. अगस्त 2026 में विदेश मंत्रालय ने रूसी तेल पर अमेरिकी पेनाल्टी टैरिफ को ना इंसाफी बताया था. हाल के आंकड़ों से पता चलता है कि रूसी तेल आयात पहले से कम हो रहा है, जैसे अक्टूबर में 38 प्रतिशत की गिरावट और हाल ही में 29 प्रतिशत की कमी, लेकिन पूरी तरह बंद करने की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है.
सवाल 4: क्या भारत अमेरिकी प्रतिबंधों के आगे झुक रहा है?
जवाब: यह ऊर्जा खरीद में भारत की आजादी पर सवाल उठाता है. 2019 में ट्रंप के दबाव के बाद ईरान और वेनेजुएला से तेल खरीद शून्य हो गई थी. हाल में वेनेजुएला के मामले में बदलाव की संभावना है, लेकिन ईरान पर 25 प्रतिशत टैरिफ की धमकी और चाबहार बंदरगाह पर छूट वापस लेने से भारत प्रभावित हो सकता है. चाबहार पर बजट में कोई आवंटन नहीं है, जो 23 साल पुरानी परियोजना से पीछे हटने का संकेत दे सकता है.
सवाल 5: भारत ने अमेरिका में कितना निवेश करने का वादा किया है?
जवाब: ट्रंप ने 500 अरब डॉलर से ज्यादा की खरीद का दावा किया, लेकिन विदेश मंत्रालय ने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया. यह आंकड़ा कई सालों और क्षेत्रों में फैला हो सकता है. वर्तमान में दोनों देशों का द्विपक्षीय व्यापार 131 अरब डॉलर है और भारत का अमेरिका में निवेश करीब 40 अरब डॉलर है, इसलिए इतना बड़ा वादा कंफर्म होने की जरूरत है.




