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जामताड़ा में धान खरीद योजना में बड़ा खेल:राइस मिल ने नहीं चुकाए ₹1.37 करोड़, अनियमितता की जांच शुरू


जामताड़ा जिले में धान अधिप्राप्ति योजना के तहत एक बड़ी वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया है। रानी सती राइस मिल पर करोड़ों रुपए की गड़बड़ी का आरोप लगा है, जिसमें ₹1.37 करोड़ से अधिक की राशि अब भी बकाया है। सरकारी दस्तावेजों के अनुसार, वर्ष 2012-13 में इस मिल को कुल ₹1,64,19,743 की राशि आवंटित की गई थी। इसके बदले कस्टम मिल्ड राइस (सीएमआर) के समायोजन के तहत राशि जमा करनी थी, लेकिन अब तक केवल ₹27,00,000 ही जमा किए गए हैं। शेष ₹1,37,19,743 की बड़ी राशि अब भी सरकार को देय है, जिसे लेकर प्रशासन गंभीर हो गया है। पत्र के जरिए उजागर हुआ मामला यह मामला तब सामने आया जब झारखंड राज्य खाद्य निगम, दुमका के जिला प्रबंधक ने 7 जनवरी 2026 को एक पत्र के माध्यम से इस अनियमितता की जानकारी दी। पत्र मिलते ही जामताड़ा जिला प्रशासन हरकत में आया और पूरे मामले को संज्ञान में लिया गया। जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त कार्यालय, जामताड़ा (जिला आपूर्ति शाखा) ने इसे गंभीर वित्तीय अनियमितता मानते हुए तत्काल जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अंचल अधिकारी को जांच का जिम्मा, रिपोर्ट तलब मामले की जांच के लिए जिला आपूर्ति पदाधिकारी ने अंचल अधिकारी, जामताड़ा को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। उन्हें रानी सती राइस मिल की वर्तमान स्थिति मिल चालू है या बंद की जानकारी जुटाने, प्रोपराइटर का नाम और पता सत्यापित करने तथा पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट जल्द से जल्द प्रस्तुत करने को कहा गया है। प्रशासन यह भी पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि इतने वर्षों तक इतनी बड़ी राशि लंबित कैसे रही और निगरानी में कहां चूक हुई। निगरानी व्यवस्था पर उठे सवाल, कार्रवाई के संकेत इस पूरे प्रकरण ने सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इतनी बड़ी राशि का वर्षों तक बकाया रहना सिस्टम की कमजोरियों को उजागर करता है। प्रशासन ने साफ संकेत दिए हैं कि जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी और हर हाल में बकाया राशि की वसूली सुनिश्चित की जाएगी। इस मामले के सामने आने के बाद अन्य मिलों की भी जांच की संभावना जताई जा रही है, ताकि ऐसी अनियमितताओं पर पूरी तरह अंकुश लगाया जा सके।

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