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नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर प्रदेश कांग्रेस के महासचिव सह मीडिया प्रभारी राकेश सिन्हा ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि महिलाओं को सशक्त करने के नाम पर लाया गया कानून वास्तविक अधिकार देने के बजाय राजनीतिक लाभ का साधन बनता दिख रहा है। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण का विचार नया नहीं है और पहले भी संसद में इसे आगे बढ़ाया गया था। अब केंद्र सरकार इसके क्रियान्वयन को जनगणना और परिसीमन से जोड़कर इसे टालने की नीति बना रही है। इससे यह आशंका पैदा होती है कि यह कानून 2029 या उससे भी आगे तक लागू नहीं हो पाएगा, जिससे महिलाओं को तत्काल कोई लाभ नहीं मिलेगा। यह महिलाओं को उनके अधिकारों से दूर रखना एक तरह का छल है। कांग्रेस ने यह भी आपत्ति जताई कि अधिनियम में ओबीसी महिलाओं के लिए अलग प्रावधान नहीं है। कांग्रेस का कहना है कि सामाजिक न्याय के बिना महिला आरक्षण से यह अधिनियम अधूरा रहेगा। सरकार ने सभी दलों के साथ व्यापक चर्चा नहीं की राकेश सिन्हा ने कहा कि केंद्र सरकार ने इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर सभी दलों के साथ व्यापक चर्चा नहीं की। लोकतंत्र में ऐसे बड़े फैसले सर्वसम्मति से और गंभीर विमर्श के बाद लिए जाने चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए केवल आरक्षण ही पर्याप्त नहीं है। उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और आर्थिक अवसर भी मिलना चाहिए। उन्होंने केंद्र सरकार से नारी शक्ति वंदन अधिनियम में ओबीसी महिलाओं के लिए अलग से प्रावधान करने की भी मांग की।

