![]()
झारखंड में एक बार फिर पेपर लीक के नाम पर ठगी का बड़े रैकेट पकड़ा गया है। इस बार गिरोह के निशाने पर थे झारखंड उत्पाद सिपाही मुख्य परीक्षा-2023 में शामिल होनेवाले अभ्यर्थी। कुख्यात अंतरराज्यीय गिरोह के सरगना बिहार के जहानाबाद निवासी अतुल वत्स ने अपने नेटवर्क के जरिए 159 अभ्यर्थियों को इस तरह जाल में फंसाया कि वे लाखों रुपए दांव पर लगाने को तैयार हो गए। गिरोह ने अभ्यर्थियों को भरोसा दिलाया कि परीक्षा से पहले उन्हें लीक प्रश्नपत्र और उसके उत्तर रटवाए जाएंगे। इस झांसे में आकर अभ्यर्थियों ने 10 से 15 लाख रुपए तक की डील की। कई से एडवांस में चेक भी लिए गए। इस पूरे खेल की अनुमानित रकम करीब 18 करोड़ रुपए से अधिक है। गिरोह ने योजना को अंजाम देने के लिए रांची के तमाड़ और सरायकेला-खरसावां जिले की सीमा के रड़गांव स्थित एक निर्माणाधीन नर्सिंग कॉलेज भवन को चुना गया, ताकि किसी को शक न हो। एजेंटों ने अभ्यर्थियों को प्रश्न पत्र मिलने का भरोसा दिलाया था
सूचना के बाद रांची एसएसपी राकेश रंजन ने सिटी एसपी, ग्रामीण एसपी व ट्रैफिक एसपी नेतृत्व में एक टीम तैयार की। टीम पुलिस बल के साथ रड़गांव पहुंची। इस कार्रवाई में सरगना अतुल वत्स समेत उसके सहयोगियों को गिरफ्तार कर लिया गया। जांच में सामने आया कि गिरोह ने बेहद सुनियोजित तरीके से अभ्यर्थियों को टारगेट किया था। एजेंटों के जरिए संपर्क कर उन्हें ओरिजलन पेपर मिलने का भरोसा दिलाया गया। फिर मोटी रकम तय कर उन्हें इस गुप्त स्थान पर बुलाया गया, जहां फर्जी प्रश्न-उत्तर रटवाकर उन्हें परीक्षा में पास कराने का सपना दिखाया जा रहा था। अगर पुलिस सही समय पर कार्रवाई नहीं करती, तो यह गिरोह करोड़ों रुपए की ठगी कर फरार हो जाता। सीजीएल में भी हुई थी ठगी
झारखंड में इस तरह का खेल नया नहीं है। इससे पहले सीजीएल परीक्षा में माफियाओं ने अभ्यर्थियों को झांसे में लेकर संभावित प्रश्नपत्र के नाम पर लाखों रु. की ठगी की थी। कई जगहों पर अभ्यर्थियों को इकट्ठा कर फर्जी प्रश्न रटवाए गए थे। उनसे 20-20 लाख रु. तक वसूले गए थे। सीआईडी ने मामले की जांच कर खुलासा किया था कि अभ्यर्थियों को फर्जी प्रश्न पत्र रटवाकर पैसे ठगे गए थे। इससे साफ है कि झारखंड अब पेपर लीक माफियाओं के लिए एक सॉफ्ट टारगेट बनता जा रहा है, जहां बाहर के राज्यों के गिरोह आकर अभ्यर्थियों को आसानी से फंसा रहे हैं। इस बार रांची पुलिस ने न सिर्फ एक बड़े नेटवर्क को ध्वस्त किया, बल्कि कई अभ्यर्थियों को ठगी का शिकार होने से भी बचा लिया। गेम चेंजर : रड़गांव में बड़ी संख्या में युवाओं और गाड़ियों की मौजूदगी से लोगों को शक हुआ आगे क्या… नर्सिंग कॉलेज का भवन किसने दिलवाया, उसकी हो रही तलाश पुलिस अब इस मामले की जांच में जुटी है कि पेपर लीक माफियाओं को रड़गांव में अर्धनिर्मित नर्सिंग कॉलेज का भवन किसने दिलवाया। साथ ही उन एजेंटों की भी तलाश कर रही है, जो झारखंड के अलग-अलग जिलों सहित राज्य के बाहर के सफल अभ्यर्थियों को प्रश्न उत्तर उपलब्ध कराने का झांसा देकर लाए थे। पुलिस इनके पास से जब्त मोबाइल फोन की जांच कर रही है। मोबाइल में कई लोगों के नंबर और वाट्सएप चैट मिले हैं। इस मामले की जांच के लिए एक विशेष टीम भी बनाई जा सकती है, जो पूरे मामले में आगे का अनुसंधान करेगी। 159 अभ्यर्थियों को बस में भरकर रड़गांव लाया गया था। वहां उनसे कथित प्रश्न-उत्तर रटवाए जा रहे थे। माफिया ने अभ्यर्थियों के मोबाइल फोन और एडमिट कार्ड अपने कब्जे में ले लिया था, ताकि कोई बाहरी संपर्क न कर सके और पूरा मिशन गुप्त रहे। लेकिन, इस बार माफियाओं की चाल स्थानीय लोगों की सतर्कता के आगे नहीं टिकी। रड़गांव में अचानक बड़ी संख्या में युवाओं और गाड़ियों की मौजूदगी ने स्थानीय लोगों को शक हुआ। स्थानीय लोगों को जल्द समझ आ गया कि यहां कुछ संदिग्ध गतिविधियां चल रही हैं। लोगों ने यहां गतिविधियों का न सिर्फ वीडियो बनाकर सबूत जुटाए, बल्कि तुरंत पुलिस को सूचना भी दी। इसके बाद पुलिस ने छापेमारी की।


