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पूर्णिया में मजदूर की बेर के पेड़ से लटकी लाश मिली है। उसके घुटने जमीन से सटे हैं। मृतक मजदूर सोमवार शाम ही गुजरात से गांव लौटा था। शव घर से 2 किलोमीटर दूर मिला। वारदात के बाद एक शख्स को हिरासत में लेने पर ग्रामीण भड़क उठे। नाराज ग्रामीणों ने सड़क जाम कर करीब एक घंटे तक प्रदर्शन किया। घटना के.नगर थाना क्षेत्र के बनभाग चुनापुर की है। मृतक की पहचान के.नगर थाना क्षेत्र के महादलित टोले के वार्ड-10 निवासी स्वर्गीय रामलाल ऋषि के बेटे रंजय ऋषि के रूप में हुई है। वारदात को लेकर परिजनों ने हत्या की आशंका जताई है। पति रंजय ऋषि और पत्नी रंभा देवी के संबंध अच्छे नहीं है। पिछले दो साल से पंजाब में मजदूरी कर रही हैं, जबकि दोनों बेटे दीपक और सेवक मुंबई में काम करते हैं। घर पर केवल उनकी शादीशुदा बेटियां और कुछ रिश्तेदार रहते हैं। घटना के वक्त घर में कोई पुरुष सदस्य मौजूद नहीं था, जिससे परिवार पूरी तरह असहाय नजर आया। मृतक के भाई ने बताया कि रंजय ऋषि 5 साल से गुजरात में मजदूरी कर अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहे थे। वे करीब छह महीने बाद सोमवार शाम अपने 12 साथियों के साथ घर लौटे थे। घर लौटने के बाद परिवार में सामान्य माहौल थ। रात करीब 9 बजे सभी ने खाना खाया और सो गए। किसी को अंदेशा तक नहीं था कि अगली सुबह इतनी भयावह खबर सामने आएगी। महिला ने पेड़ से लटका देखा शव सुबह गांव की एक महिला जब अपने मवेशी को बांधने बाहर निकली, तो उसने घर के पश्चिम दिशा में झोटे ऋषि के दरवाजे के पास एक सूखे बेर के पेड़ से रंजय ऋषि का शव लटका देखा। महिला के शोर मचाने पर आसपास के लोग दौड़े और देखते ही देखते पूरा इलाका लोगों से भर गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया और गांव में मातम पसर गया। गले पर काले गहरे निशान मिले घुटने जमीन से सटे हुए थे। करीब से देखने पर गले पर काले गहरे निशान मिले। रंजय घर से 50 हजार कैश साथ लेकर निकला था। ये कैश गायब थे। आरोप है कि रंजय की पहले हत्या की गई है। हत्या के बाद शव को बेर के पेड़ से लटका दिया गया है, ताकि हत्या को आत्महत्या का रूप दिया जा सके। घटना की सूचना मिलते ही के.नगर थाना अध्यक्ष अजय कुमार अजनबी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। एफएसएल और डॉग स्क्वायड को बुलाया गया, ताकि घटना की गहराई से जांच की जा सके। जांच के दौरान खोजी कुत्ते ने एक स्थानीय व्यक्ति मुसो ऋषि की ओर इशारा किया। पुलिस ने जैसे ही उसे हिरासत में लेने की कोशिश की, ग्रामीण भड़क उठे। ग्रामीणों ने पुलिस की कार्रवाई का विरोध करते हुए सड़क जाम कर दिया और पुलिस जीप को आगे बढ़ने से रोक दिया। ग्रामीणों का कहना था कि केवल डॉग स्क्वायड के इशारे पर किसी निर्दोष को फंसाना ठीक नहीं है। लोगों ने निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए काफी देर तक हंगामा किया। स्थिति को बिगड़ता देख पुलिस को फिलहाल पीछे हटना पड़ा, जिसके बाद किसी तरह मामला शांत हुआ। पिछले एक महीने में ये इस गांव में हुई तीसरी संदिग्ध मौत है। 5 मार्च को इस गांव से पहली घटना सामने आई। 8 अप्रैल को दूसरी जबकि 14 अप्रैल को तीसरी घटना घटी। लगातार हो रही इन वारदातों ने पूरे इलाके में डर का माहौल बना दिया है। लोग इसे सामान्य घटना मानने को तैयार नहीं हैं और इसके पीछे किसी बड़ी साजिश की आशंका जता रहे हैं। जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने एक स्वर में इलाके में स्थायी पुलिस चौकी स्थापित की जाने की मांग की है। पुलिस ने शव को कब्जे में लिया पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए पूर्णिया जीएमसीएच भेज दिया है। पुलिस का कहना है कि मामले की हर एंगल से जांच की जा रही है। आत्महत्या है या हत्या, किसी भी संभावना को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।


