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हाई लेवल कमेटी की जांच में हुआ बड़ा खुलासा:पशुपालन के 2 कर्मियों ने भी फर्जी तरीके से निकाले 2.94 करोड़, एक गिरफ्तार


झारखंड में ट्रेजरी घोटाले की आंच अब राजधानी रांची तक पहुंच गई है। इंस्टीट्यूट ऑफ एनिमल हेल्थ एंड प्रोडक्शन (आईएएचपी) के दो कर्मचारियों द्वारा ​वेतन बिल में हेराफेरी कर रांची ट्रेजरी से 2.94 करोड़ रुपए की अवैध निकासी किए जाने का मामला सामने आया है। रांची डीसी मंजूनाथ भजंत्री के निर्देश पर बनाई गई उच्चस्तरीय कमेटी ने यह खुलासा किया है। कार्यपालक दंडाधिकारी मो. जफर हसनात ने कोतवाली थाने में केस दर्ज कराया है। पुलिस ने अकाउंटेंट मुनीन्द्र कुमार को गिरफ्तार ​कर लिया है। संजीव फरार है। जांच में पता चला कि आईएएचपी के अकाउंटेंट मुनीन्द्र कुमार ने अपने दो अलग-अलग बैंक खाता एसबीआई खाता संख्या 1175766109 व एक्सिस बैंक खाता संख्या 919010086568922 में कुल 1,52,43,572 रु. ट्रांसफर कराए। वहीं, संजीव कुमार ने अपने बैंक खाते 923010010228484 में 1,41,79,480 रुपए ट्रांसफर कराए। यह राशि उनके निर्धारित वेतन से अधिक है। इस तरह हेराफेर कर दोनों ने कुल 2.94 करोड़ रुपए के घोटाले को अंजाम दिया। कुबेर पोर्टल से हुए वेतन भुगतान में अंतर से घोटाले का खुलासा पिछले तीन साल में स्वीकृत बिल की जांच के लिए रांची डीसी ने हाई लेवल कमेटी बनाई है। जांच में कार्यपालक दंडाधिकारी जफर हसनात को आईएएचपी के दो कर्मियों को भुगतान किए गए वेतन पर शक हुआ। जांच की तो पता चला कि कुबेर पोर्टल पर दोनों को मिले वेतन और वास्तविक भुगतान में काफी अंतर है। 3 साल पहले के बिल की भी होगी जांच जांच टीम को वित्तीय वर्ष 2023-24, 2024-25 और ​2025-26 के वेतन भुगतान की जांच में 2.94 करोड़ रुपए का घोटाला मिला है। पता चला कि दोनों कर्मचारियों ने अपने मूल वेतन की राशि को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया निकासी कर ली। अब डीसी ने तीन साल पुराने बिलों की भी जांच का निर्देश दिया है। पेयजल विभाग के अकाउंटेंट ने भी निकाला था 23 करोड़: रांची ट्रेजरी से अवैध निकासी का मामला पहले भी सामने आ चुका है। पूर्व में भी पेयजल स्वच्छता प्रमंडल के अकाउंटेंट ने ट्रेजरी के कर्मचारियों की मिलीभगत से करीब 23 करोड़ रुपए का घोटाला किया था। इस मामले की जांच ईडी भी कर रहा है। 37,200 रुपए बेसिक पे वाला कर्मचारी कुछ ही महीनों में पाने लगा 12 लाख रु. रांची ट्रेजरी में गड़बड़ी को लेकर प्रधान महालेखाकार (ऑडिट) इंदु अग्रवाल ने वित्त सचिव प्रशांत कुमार को सोमवार को गोपनीय रिपोर्ट भेजी थी। इसके आधार पर जांच हुई तो घोटाला सामने आया। पीएजी रिपोर्ट के मुताबिक, नवंबर 2023 में 37,200 रुपए बेसिक पे वाला कर्मचारी का वेतन कुछ ही महीनों में 12 लाख रुपए तक पहुंच गया। मार्च-अप्रैल 2024 में उसकी ग्रॉस सैलरी 20 लाख रु. से अधिक रही। अगस्त 2023 से दिसंबर 2025 के बीच करीब 1.54 करोड़ रु. का भुगतान हुआ। जिस बैंक खाते में यह राशि जा रही थी, उसी खाते में अन्य कर्मियों के भी पैसे ट्रांसफर किए गए। कुल 39 ट्रांजेक्शन में 1.82 करोड़ एक ही खाते में गई, जो सिस्टम में बैंक वेरिफिकेशन की खामी को दिखाता है। सबसे बड़ा खेल हजारीबाग ट्रेजरी में मिला। 29 बैंक खातों में 239 कर्मचारियों की सैलरी के नाम पर 31.47 करोड़ ट्रांसफर किए गए। इनमें से 18 खाते तो कर्मचारी मास्टर डेटा में थे ही नहीं। 614 कर्मचारियों को एक ही महीने में दो-दो बार वेतन मिला, जिससे 7.67 करोड़ रुपए का अतिरिक्त भुगतान हुआ। आईएफएमएस सिस्टम के कर्मचारी डेटा में बड़े पैमाने पर बदलाव किए गए। जन्मतिथि, जॉइनिंग डेट और पैन नंबर तक बदल दिए गए। ट्रेजरी से अवैध निकासी करने वाले को बख्शा नहीं जाएगा: उपायुक्त ट्रेजरी से स्वीकृत सभी बिल की जांच के लिए हाई लेवल कमेटी बनाई गई है। इंटरनल जांच में वेतन विपत्र में हेरफेर करके अधिक और अवैध निकासी का मामला सामने आया है। उसमें प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दे दिया गया है। आगे पुलिस कार्रवाई करेगी। इस तरह की गतिविधियों में शामिल किसी भी कर्मचारी-पदाधिकारी को नहीं बख्शा जाएगा। आने वाले समय में जांच का दायरा बढ़ेगा। -मंजूनाथ भजंत्री, डीसी

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