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सारंडा अंतर्गत छोटानागरा थाना अंतर्गत बालिबा के पास चडराडेरा के जंगल में नक्सलियों से हुई मुठभेड़ के बाद सुरक्षाबलों ने सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया है।
सूत्र बताते हैं कि फोर्स ने नक्सलियों को चारों ओर से घेर रखा है। उनके भागने के सभी रास्ते को सील कर दिया गया है। साथ ही आसमान से भी कड़ी नजर रखी जा रही है। एक अन्य सूत्र की मानें तो नक्सलियों की संख्या सौ से ज्यादा है। इसमें एक करोड़ का इनामी नक्सली मिसिर बेसरा भी शामिल है। वहीं, मामले को लेकर जिले के एसपी अमित रेनू नेभी बताया कि अभी सर्च अभियान चल रहा है। जंगल से अभी कोई अपडेट नहीं मिला है। अब तक 6 जवान हो चुके हैं घायल
मुठभेड़ में कोबरा बटालियन-205 के इंस्पेक्टर सत्य प्रकाश समेत 6 जवान घायल हो गए। घायलों में इंस्पेक्टर सत्य प्रकाश, जवान जितेंद्र राय, उत्तम कुमार सेनापति, शैलेश कुमार दुबे, प्रेम शामिल और अभिनय कुमार हैं। चार हजार जवानों को तैनात किया गया
सर्च अभियान के दौरान आईईडीको लेकर फोर्स पूरी तरह से सतर्कता और सावधानी बरत रही है। दस किमी एरिया में 15 सौ से ज्यादा तेजतर्रार कमांडोज ने घेराबंदी कर रखी है। वहीं, चार हजार जवान तैनात किए गए हैं। इधर, आपात स्थिति के मद्देनजर सामुदायिक स्वास्थ्यकेंद्र को भी अलर्ट मोड पर रखा गया है। सीएचसी प्रभारी डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि उन्हें यहां की एंबुलेंस को हमेशा तैयार रखने को कहा गया है। ताकि आपात स्थिति में उनका इस्तेमाल किया जासके। लेकिन सीएचसी में एंबुलेंस की बड़ी समस्या है। लिहाजा किसी अन्य मरीज की आपात और रेफरल स्थिति में एंबुलेंस से मरीज को रेफर करना मजबूरी हो जाती है। ऐसे समझे मुठभेड़ स्थल का इलाका
जराइकेला थाना के बाबूडेरा, छोटानागरा थाना केदलाईगढ़ा और बालिबा गांव केबीच विगत बुधवार को मुठभेड़ हुई थी। यह इलाका दोनों थाना क्षेत्रों के सीमाने पर स्थित है। यह क्षेत्र नक्सलियों के लिए पूरी तरह से मुफीद माना जाता रहा है। अब यहां सुरक्षा बलों की दबिश ने नक्सलियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कहा तो यह भी जा रहा है कि फोर्स ने इस पूरे इलाके के अलावा सारंडा के सभी महत्वपूर्ण क्षेत्र को घेर और सील कर रखा है। यहां कभी दिन में नक्सलियों का लगता था डेरा
झारखंड के सारंडा क्षेत्र का बालिबा गांव, जो कभी नक्सल गतिविधियों का मजबूत गढ़ माना जाता था। आज भी कई बुनियादी समस्याओं से जूझ रहा है। ग्रामीणों के अनुसार, एक समय था, जब यहां दिनदहाड़े सौ से अधिक नक्सली हथियारों के साथ पहुंचते थे और गांव में बैठक करते थे। धीरे-धीरे उनकी संख्या घटी और वे शाम के वक्त आने लगे। कौन है मिसिर बेसरा
मिसिर बेसरा का जीवन एक कट्टरपंथी आदिवासी छात्र से लेकर एक रणनीतिक कमांडर की कहानी है । झारखंड के गिरीडीह जिले के पीरटांड निवासी मिसिर बेसरा पीके राय धनबाद से हिंदी में बीए ऑर्नस की है। 1980 के दशक की शुरुआत में, जब बेसरा कॉलेज की पढ़ाई कर रहा था, तब उसके गांव भगनाडीह में एक विशाल कटहल के पेड़ को गांव के दबंग लोगों ने काट दिया था। उसकी लकड़ी ले जाने की लड़ाई के बाद वह नक्सली बन गया। अक्टूबर 1985 में, उसने एक नक्सली सांस्कृतिक समूह ‘अखिल भारतीय क्रांतिकारी सम्मेलन’ के कार्यक्रम में हिस्सा लिया। 1987 में उसने औपचारिक रूप से सशस्त्र विंग पहली बार बंदूक पकड़ी। मिसिर बेसरा को भास्कर, सुनील, सुनिर्मल, सागर, विवेक के नाम पर भी जाना जाता है। बालिबा में 29 पुलिसकर्मियों को मारा था
मिसिर बेसरा ने सारंडा के बालीबा में अप्रैल 2004 को सबसे बड़े नक्सली कांड को अंजाम दिया था। यह हमला बेसरा के करियर का सबसे हिंसक अध्याय माना जाता है। इस हमले में 29 से 32 पुलिसकर्मी शहीद हुए थे। एक बार पकड़ाया था लेकिन बिहार के लखीसराय पुलिस पिकेट हमला में पेशी के दौरान कोर्ट से भाग गया था।


