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झारखंड में विश्वविद्यालयों में वीसी-प्रोवीसी की नियुक्ति को लेकर लोकभवन व सरकार के बीच चल रहा गतिरोध खत्म हो गया। राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने शुक्रवार को झारखंड राज्य विश्वविद्यालय विधेयक-2026’ पर अपनी स्वीकृति दे दी। अब वीसी-प्रोवीसी की नियुक्ति केवल राज्यपाल का विशेषाधिकार नहीं रहेगा, बल्कि राज्यपाल और मुख्यमंत्री संयुक्त रूप से इस पर फैसला लेंगे। इससे पहले राज्यपाल मुख्यमंत्री की सलाह लेकर इनकी नियुक्ति करते थे। इस पर कई बार खींचतान हो जाती थी। अब ‘सलाह’ की जगह ‘संयुक्त रूप से विचार’ शब्द ने ले ली है। यानी नियुक्ति प्रक्रिया में सरकार और लोकभवन का पलड़ा बराबर होगा। चयन प्रक्रिया रिक्ति से छह माह पूर्व शुरू होगी नए अधिनियम के मुताबिक वीसी-प्रोवीसी की चयन प्रक्रिया पद खाली होने से न्यूनतम छह माह पूर्व आरंभ होगी। ताकि वीसी के चयन में देरी न हो। समिति के सदस्य सचिव के तौर पर कुलसचिव का यह दायित्व होगा कि पद खाली होने से एक माह पहले नियुक्ति प्रक्रिया पूरी हो जाए। 45 दिन के भीतर रिजल्ट जारी होगा : नए अधिनियम लागू होने से सीनेट की बैठक अब साल में दो बार होगी। जरूरत पड़ने पर दो बार से अधिक भी बैठक बुलाई जा सकती है। परीक्षा का रिजल्ट 30 दिनों में जारी किया जाएगा। हालांकि इसकी अधिकतम सीमा 45 दिन निर्धारित की गई है। पैनल में होंगे 3 से 5 नाम अब सर्च कमेटी कुलपति के चयन के लिए 3 से 5 नामों का एक पैनल बनाएगी। पैनल में शामिल लोगों के नाम की अनुशंसा बंद लिफाफे में दी जाएगी। अनुशंसित व्यक्तियों की कोई वरीयता नहीं दर्शायी जाएगी। पैनल बनाते समय यदि सदस्यों के बीच मतों की समानता होती है, तो समिति के अध्यक्ष का मत निर्णायक होगा।


