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पश्चिमी सिंहभूम जिले के गुवा क्षेत्र में 12 गांवों के मुंडा-मानकी के बैनर तले चल रहा आंदोलन शनिवार सुबह 72 घंटे की भूख हड़ताल समाप्त होने के बाद और उग्र हो गया है। सोमवार सुबह करीब 4 बजे से आंदोलनकारियों ने मुख्य मार्गों को जाम कर दिया, जिससे खदान क्षेत्र का आवागमन पूरी तरह ठप हो गया। तीन दिनों तक चली भूख हड़ताल के दौरान न तो गुवा प्रशासन और न ही सेल प्रबंधन का कोई अधिकारी ग्रामीणों से वार्ता के लिए पहुंचा। इससे ग्रामीणों में असंतोष बढ़ गया। भूख हड़ताल समाप्त होने के बाद हुई बैठक में ग्रामीणों ने 20 अप्रैल को चक्का जाम करने का निर्णय लिया था। आंदोलनकारियों की मुख्य मांग क्षेत्र के 500 बेरोजगार युवकों को रोजगार प्रदान करना है। उनका कहना है कि जब तक इस संबंध में लिखित आश्वासन नहीं मिलता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सेल प्रबंधन की ओर से एचआर महाप्रबंधक प्रवीण कुमार सिंह, डीजीएम सीएसआर अनिल कुमार और अमित तिर्की मौके पर पहुंचे। उन्होंने आंदोलनकारियों से वार्ता की और प्रत्येक गांव से 2-3 लोगों को रोजगार देने का प्रस्ताव रखा। हालांकि, ग्रामीण इस प्रस्ताव पर सहमत नहीं हुए और अपनी 500 बेरोजगार युवकों को रोजगार देने की मूल मांग पर अड़े रहे। वार्ता बेनतीजा रहने पर आंदोलन जारी है, जिससे खदान से डिस्पैच और बसों का परिचालन ठप है। इससे उत्पादन प्रभावित हो रहा है और क्षेत्र में तनाव की स्थिति बनी हुई है।

