
प्रतिनिधि, हिरणपुर. झारखंड सहायक आचार्य भर्ती (विज्ञापन संख्या 13/2023) को लेकर अभ्यर्थियों में भारी नाराजगी है. अभ्यर्थी ओम प्रकाश भारती ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर आरोप लगाया कि शिक्षा विभाग और जेएसएससी के निर्णयों से हजारों अभ्यर्थी नियुक्ति से वंचित हो गये हैं. कहा कि विज्ञापन में स्पष्ट था कि टेट केवल अर्हता होगी और मुख्य परीक्षा के अंकों के नॉर्मलाइजेशन के आधार पर मेरिट सूची तैयार की जायेगी. अभ्यर्थियों का कहना है कि परीक्षा सीबीटी मोड में कई चरणों में आयोजित होने से उन्हें दूर-दराज शहरों में जाकर परीक्षा देनी पड़ी, जिससे आर्थिक और मानसिक दबाव बढ़ा. इसी बीच, हाईकोर्ट के आदेश से सीटीईटी अभ्यर्थियों को शामिल करने के निर्णय के खिलाफ मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां इसे निरस्त कर केवल जेटेट अभ्यर्थियों को ही मान्य किया गया. विवाद तब और गहराया जब दस्तावेज सत्यापन और जिला आवंटन के बाद, नियुक्ति से ठीक पहले शिक्षा सचिव ने परिणाम रोकते हुए सुप्रीम कोर्ट के एक अन्य फैसले का हवाला देकर आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को सामान्य श्रेणी से बाहर कर दिया. इससे एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के हजारों अभ्यर्थी प्रभावित हुए. आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया के बीच नियम बदलना न्यायसंगत नहीं है. उन्होंने हाल के न्यायिक स्पष्टीकरण का हवाला देते हुए सरकार से निर्णय पर पुनर्विचार कर प्रभावित अभ्यर्थियों को न्याय देने की मांग की है.
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