Thursday, April 23, 2026

Top 5 This Week

Related Posts

बंगाल में लोकतंत्र की ‘सुनामी’, 74 साल का रिकॉर्ड टूटा, शाम 5 बजे तक 89.93 फीसदी मतदान, क्या यह महा-परिवर्तन की आहट?

खास बातें

Bengal Election 2026 Voting Percentage: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण में बंगाल की जनता ने वो कर दिखाया है, जो भारतीय चुनावी इतिहास में विरले ही देखने को मिलता है. निर्वाचन आयोग की कड़ी मेहनत और जागरूक मतदाताओं के जोश ने इस बार वोटिंग के सारे पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिये हैं.

2021 से 8.37 प्रतिशत अधिक वोट पड़े बंगाल में

शाम 5 बजे तक के आंकड़ों के अनुसार, बंगाल में 89.93 प्रतिशत ऐतिहासिक मतदान दर्ज किया गया है. यह 2021 के चुनाव (81.56 प्रतिशत) के मुकाबले 8.37 प्रतिशत अधिक है. आंकड़ों का यह उछाल राज्य की राजनीति में किसी बड़े भूचाल या ‘महा-परिवर्तन’ की ओर इशारा कर रहा है.

2011 का रिकॉर्ड भी पीछे छूटा, जब खत्म हुआ था वामपंथ

बंगाल के चुनावी इतिहास को देखें, तो अब तक का सबसे अधिक मतदान वर्ष 2011 में हुआ था. उस समय 84.33 फीसदी वोट पड़े थे और ममता बनर्जी की लहर ने 34 साल पुराने वाम किले को ढाह दिया था. वर्ष 2026 के चुनाव ने उस ऐतिहासिक आंकड़े को भी बहुत पीछे छोड़ दिया. 5 बजे तक ही लगभग 90 प्रतिशत वोटिंग होना बताता है कि जनता इस बार किसी बड़े मुद्दे पर गोलबंद होकर बूथों तक पहुंची है.

बंगाल की खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

आजादी के बाद से अब तक वोटिंग का पैटर्न

बंगाल में मताधिकार के इस्तेमाल का ग्राफ उतार-चढ़ाव भरा रहा है, लेकिन 2026 ने एक नयी ऊंचाई छुई है.

  • शुरुआती दौर (1952-1962): 1952 के पहले चुनाव में केवल 42.23 प्रतिशत वोटिंग हुई थी, जो 1962 तक बढ़कर 55.55 प्रतिशत पहुंची.
  • 60 फीसदी का आंकड़ा : वर्ष 1967 में पहली बार 60 फीसदी की दीवार टूटी और 66.1 प्रतिशत मतदान हुआ.
  • गिरावट का दौर (1971-1977): वर्ष 1971 से 1977 के बीच मतदान में गिरावट आयी. वर्ष 1977 में केवल 56.15 प्रतिशत वोटिंग हुई. 1977 ही वह साल था, जब कांग्रेस का बंगाल में पतन शुरू हो गया. ज्योति बसु के नेतृत्व में वाममोर्चा का उदय हुआ.
  • वाम शासन और तेजी : वर्ष 1982 के बाद वोटिंग प्रतिशत में एक बार फिर उछाल आया और 1996 में यह 82.94 प्रतिशत तक जा पहुंचा.
  • ममता बनर्जी का उदय : वर्ष 2011 में बंगाल ने बंपर वोटिंग करते हुए सारे रिकॉर्ड तोड़ डाले. इस साल 84.3 प्रतिशत वोट पड़े और बुद्धदेव भट्टाचार्य के नेतृत्व में चल रही वाममोर्चा की सरकार को सत्ता से बेदखल कर ममता बनर्जी बंगाल की पहली महिला मुख्यमंत्री बनीं.

इसे भी पढ़ें : बंगाल चुनाव 2026 में बंपर वोटिंग, 3 बजे तक 78.77 प्रतिशत मतदान

Bengal Election 2026 Voting Percentage: 21वीं सदी और बदलता पैटर्न

वर्ष 2001 में मतदान गिरकर 75.29 प्रतिशत रह गया था, लेकिन 2006 के बाद से यह लगातार 80 फीसदी के ऊपर बना रहा है. पिछले 2 चुनावों (2016 और 2021) में वोटिंग प्रतिशत 82 प्रतिशत के आसपास स्थिर था, जिसे 2026 की ‘लोकतांत्रिक सुनामी’ ने पूरी तरह बदल दिया है.

2026 का पहला चरण : एक-एक जिले का आंकड़ा यहां देखें

जिले का नाम वोट प्रतिशत
कूचबिहार 92.07
अलीपुरदुआर 88.74
जलपाईगुड़ी 91.2
कलिम्पोंग 81.98
दार्जिलिंग 86.49
उत्तर दिनाजपुर 89.74
दक्षिण दिनाजपुर 93.12
मालदा 89.56
मुर्शिदाबाद 91.36
पूर्व मेदिनीपुर 88.55
पश्चिम मेदिनीपुर 90.7
झारग्राम 90.53
पुरुलिया 87.35
बांकुड़ा 89.91
पश्चिम बर्धमान 86.89
बीरभूम 91.55
स्रोत : इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया (23 अप्रैल 2026 को शाम 5 बजे तक के आंकड़े)

इसे भी पढ़ें : बंगाल चुनाव 2026: जंगलमहल में ‘वोटर लिस्ट’ पर शांति, ‘रोटी-बेटी’ पर शोर, जानें क्यों झारग्राम-पुरुलिया में बेअसर SIR का मुद्दा

क्या कहते हैं ये आंकड़े?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जब भी मतदान के प्रतिशत में इतना भारी इजाफा (8 प्रतिशत से ज्यादा) होता है, तो वह अक्सर सत्ता विरोधी लहर (Anti-incumbency) या किसी विशेष मुद्दे पर जनता के ध्रुवीकरण का परिणाम होता है. 1982 और 2011 के उदाहरणों से साफ है कि भारी मतदान बंगाल में हमेशा ‘परिवर्तन’ लाता है. अब 4 मई को आने वाले नतीजे ही बतायेंगे कि 89.93 प्रतिशत वोटिंग की यह गूंज किसके पक्ष में गयी है.

इसे भी पढ़ें : बंगाल चुनाव में दागी और करोड़पति उम्मीदवारों की बाढ़, 129 सीटें ‘रेड अलर्ट’ सीटें, पढ़ें ADR की पूरी रिपोर्ट

असम, केरलम और पुडुचेरी से भी ज्यादा वोट पड़े

वर्ष 2026 में 9 अप्रैल को असम और केरलम के साथ-साथ पुडुचेरी में भी चुनाव हुए थे. असम में 85.91 प्रतिशत, केरलम में 78.27 प्रतिशत और पुडुचेरी में 89.87 प्रतिशत वोटिंग हुई थी. बंगाल में इन दोनों राज्यों और केंद्रशासित प्रदेश पुडुचेरी से अधिक मतदान हुआ है.

इसे भी पढ़ें

उत्तर बंगाल का ‘किंगमेकर’ कौन? 40 सीटों पर राजबंशी वोटों के लिए TMC और BJP में आर-पार की जंग

बंगाल में ‘लाल दुर्ग’ की ढहती दीवारें, 2006 में 233 सीटें और 2021 में ‘शून्य’, 2026 में वामपंथ की वापसी करा पायेगी ‘युवा ब्रिगेड’?

बंगाल में ‘दलबदल’ से खुलती है जीत की राह? चौंकाने वाले संकेत दे रहे 3 चुनावों के आंकड़े

ममता बनर्जी बनाम शुभेंदु अधिकारी राउंड-2, नंदीग्राम के बाद भवानीपुर बना जंग का मैदान, दीदी के गढ़ में बदली सियासत

Spread the love

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Popular Articles