![]()
नवादा जिले में हिसुआ-नवादा मार्ग पर स्थित वाटर पार्क के पास नगर परिषद का कचरा डंपिंग पॉइंट स्थानीय निवासियों और राहगीरों के लिए परेशानी का सबब बन गया है। यहां से दिन-रात लगातार उठने वाला जहरीला धुआँ लोगों के लिए सांस लेना मुश्किल कर रहा है। इससे घुटन, आंखों में जलन और सांस लेने में दिक्कत हो रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कचरे के ढेर में बार-बार आग लगाई जा रही है, जिससे डाइऑक्सिन और अन्य विषैली गैसें निकल रही हैं। उनका कहना है कि नगर परिषद की लापरवाही के कारण नवादा के लोगों को इस जहरीले धुएं का सामना करना पड़ रहा है। निस्तारण के लिए कोई वैज्ञानिक व्यवस्था मौजूद नहीं शहर में प्रतिदिन निकलने वाले कचरे के निस्तारण के लिए कोई वैज्ञानिक व्यवस्था मौजूद नहीं है। डंपिंग साइट पर न तो कचरे का उचित प्रबंधन किया जाता है और न ही आग लगने पर तुरंत कार्रवाई की जाती है। करोड़ों रुपये के सफाई बजट के बावजूद स्थिति में सुधार नहीं हो रहा है। स्थानीय निवासियों और राहगीरों के अनुसार, इस धुएं के कारण सांस संबंधी बीमारियां बढ़ रही हैं। बच्चे, बुजुर्ग और सांस के मरीज विशेष रूप से प्रभावित हो रहे हैं। कई लोगों ने वीडियो बनाकर जिला प्रशासन और बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से कार्रवाई की अपील की है, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। जमीनी स्तर पर स्थिति में कोई बदलाव नहीं दिख रहा विशेषज्ञों का कहना है कि खुले में कचरा जलाने से निकलने वाला धुआं न केवल वायु प्रदूषण बढ़ाता है, बल्कि लंबे समय में कैंसर और श्वसन रोगों का कारण भी बन सकता है। नवादा में कचरा प्रसंस्करण संयंत्र (वेस्ट प्लांट) बनाने की चर्चाएं चल रही हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति में कोई बदलाव नहीं दिख रहा है। नवादा के लोगों ने जिला प्रशासन और नगर परिषद से इस मामले का तुरंत संज्ञान लेने की अपील की है। उनकी मांग है कि डंपिंग साइट पर आग बुझाने, कचरा प्रबंधन को वैज्ञानिक बनाने और आग लगाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो यह जहरीला धुआं जिंदगियों को निगल सकता है।नगर परिषद को जवाबदेह बनाना होगा। आम लोगों की सेहत और जान से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। प्रशासन को अब खोखले दावों से ऊपर उठकर ठोस समाधान देना चाहिए।

