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नवादा के गोविंदपुर प्रखंड स्थित माधोपुर गांव में जंगली हाथियों का आतंक पिछले एक महीने से जारी है। मंगलवार की अहले सुबह हाथियों ने फिर उत्पात मचाया और कई मकानों को क्षति पहुंचाई। इस दौरान एक गर्भवती गाय भी उनके हमले का शिकार हुई। हाथियों के लगातार हमलों से आक्रोशित स्थानीय लोग रोजाना सड़क जाम कर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। वे प्रशासन से हाथियों को पूरी तरह खदेड़ने और यदि आवश्यक हो तो उन्हें मारने की मांग कर रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग की टीम हाथियों को रोकने में प्रभावी कार्रवाई नहीं कर पा रही है। 15 घरों को पूरी तरह किया ध्वस्त ग्रामीणों के अनुसार, 20 से 30 हाथियों का एक झुंड रात के समय गांव में घुस आता है और बड़े पैमाने पर तबाही मचाता है। अब तक हाथियों ने 10 से 15 घरों को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है। खेतों में खड़ी फसलों को रौंदने से किसानों को लाखों रुपए का नुकसान हुआ है। इससे पहले हाथियों के झुंड ने 70 वर्षीय बुजुर्ग महिला मुन्ना देवी को कुचलकर मार डाला। मुन्ना देवी खेत में गेहूं काट रही थीं। हाथियों ने उन्हें सूंड से पटककर कुचला, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग ग्रामीणों का कहना है कि हाथी बार-बार लौट रहे हैं, जिससे उनकी जान-माल का खतरा बना हुआ है। उन्होंने वन विभाग और जिला प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। प्रशासन द्वारा इलाके में वनकर्मियों की तैनाती बढ़ाने और हाथियों को जंगल की ओर वापस भेजने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन स्थानीय लोगों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है। यह घटना बिहार के कई इलाकों में बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष को दर्शाती है, जिस पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है।


