झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने जनगणना 2027 में आदिवासी/सरना धर्म को अलग पहचान देने की मांग को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को विस्तृत पत्र लिखा है। इस पत्र की कॉपी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और राज्यपाल संतोष गंगवार को भी भेजी गई है।
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मुख्यमंत्री ने पत्र में कहा है कि सरना धर्म आदिवासी समाज की आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक पहचान का प्रमुख आधार है, इसलिए इसे जनगणना में पृथक कोड देकर मान्यता दी जानी चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार इस मांग पर गंभीरता से विचार करेगी।
जनगणना को बताया नीति निर्धारण का आधार
सीएम सोरेन ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में जनगणना 2027 की शुरुआत के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि तथ्य आधारित नीति निर्माण किसी भी राष्ट्र के संतुलित विकास के लिए जरूरी है। उन्होंने कहा कि 2021 में प्रस्तावित जनगणना विभिन्न कारणों से टल गई थी, लेकिन अब इसे शुरू किया जाना महत्वपूर्ण कदम है।
उन्होंने यह भी बताया कि राज्य सरकार इस प्रक्रिया में पूर्ण सहयोग कर रही है। उन्होंने स्वयं स्व-गणना कर इस अभियान में भागीदारी निभाई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सटीक आंकड़ों के अभाव में किसी भी समाज के विकास से जुड़ी नीतियों पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
आदिवासी पहचान और सरना परंपरा का उल्लेख
पत्र में मुख्यमंत्री ने सरना धर्म की विशिष्टताओं का विस्तार से उल्लेख करते हुए कहा कि आदिवासी समाज की अपनी अलग पूजा पद्धति, प्रकृति पूजा, ग्राम देवता, कूल देवता और पारंपरिक त्योहार इस धर्म को अलग पहचान देते हैं। उन्होंने बताया कि स्वतंत्रता पूर्व जनगणना में विभिन्न धर्मों की अलग-अलग पहचान दर्ज की जाती थी।
लेकिन आजादी के बाद आदिवासी धर्म को अलग श्रेणी में शामिल नहीं किया गया। उन्होंने 2011 की जनगणना का हवाला देते हुए कहा कि अलग कोड नहीं होने के बावजूद देशभर के करीब 50 लाख लोगों ने स्वयं को ‘सरना’ धर्म से जुड़ा बताया था, जो इस मांग की गंभीरता को दर्शाता है।
विधानसभा संकल्प और राज्य की आकांक्षा का हवाला
मुख्यमंत्री ने पत्र में झारखंड विधानसभा के संकल्प और राज्य की आकांक्षाओं का जिक्र करते हुए कहा कि झारखंड का गठन ही आदिवासी पहचान के आधार पर हुआ है। इसलिए यहां की नीतियों और योजनाओं में आदिवासी समाज की सांस्कृतिक और धार्मिक विशेषताओं को शामिल करना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि आज जब देश डिजिटल तकनीक में आगे बढ़ रहा है, तो जनगणना में सरना धर्म को अलग कोड देना तकनीकी रूप से भी संभव और व्यावहारिक है। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि जनगणना के दूसरे चरण में धर्म संबंधी कॉलम में सरना धर्म को अलग पहचान दी जाए, ताकि आदिवासी समाज की पहचान और अधिकार सुरक्षित रह सकें।

