![]()
भोजपुर जिले के अमराई नवादा गांव से निकलकर बिहार की राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाने वाले आरा विधायक संजय सिंह टाइगर एक बार फिर मंत्री बन गए हैं। पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में उन्होंने दूसरी बार मंत्री पद की शपथ ली। संजय सिंह टाइगर की पहचान सिर्फ एक नेता के रूप में नहीं है। उनकी जिंदगी सादगी, त्याग, ईमानदारी और समाजसेवा की ऐसी मिसाल है, जिसकी चर्चा अब गांव से लेकर पूरे बिहार में हो रही है। बचपन से ही देश सेवा का जज्बा रखने वाले संजय सिंह शुद्ध शाकाहारी हैं। शादी नहीं की, अपनी आंख और किडनी दान कर चुके हैं। हर छह महीने पर रक्तदान करते हैं। पोस्ट ग्रेजुएट हैं संजय सिंह 55 वर्षीय संजय सिंह टाइगर स्वर्गीय माधव सिंह के पुत्र हैं। उनके पिता पटना एजी ऑफिस में ऑडिटर थे। परिवार राजनीतिक और सामाजिक रूप से सक्रिय रहा है। उनके बड़े भाई स्वर्गीय धर्मपाल सिंह दो बार विधायक रहे। पहली बार उन्होंने 1990 में निर्दलीय चुनाव लड़कर राजद के सीनियर नेता रहे शिवानंद तिवारी को हराया था। बाद में वह राजद के टिकट पर भी विधायक चुने गए। दूसरे भाई कृष्णा सिंह आरा के क्षत्रिय स्कूल से क्लर्क पद से रिटायर हुए हैं, जबकि तीसरे भाई विजय सिंह ठेकेदारी का काम करते हैं। परिवार में सबसे छोटे होने के कारण संजय सिंह सभी के दुलारे थे। उनकी मां उमा देवी गृहिणी थीं। गांव में पले-बढ़े संजय सिंह ने आगे की पढ़ाई के लिए पटना का रुख किया। एएन कॉलेज से 1993 में बैचलर ऑफ आर्ट्स की पढ़ाई पूरी की। बाद में पोस्ट ग्रेजुएशन भी किया। ‘टाइगर’ नाम से मिली नई पहचान संजय सिंह टाइगर को ‘टाइगर’ नाम गांव से मिला। उनके चाचा भरत सिंह बताते हैं कि गांव में होने वाले खेलकूद प्रतियोगिताओं और आयोजनों का नाम ‘टाइगर’ रखा जाता था। युवाओं के बीच सक्रिय रहने वाले संजय को धीरे-धीरे लोग टाइगर कहकर बुलाने लगे। 2010 के विधानसभा चुनाव में जब दो प्रत्याशियों का नाम संजय सिंह था, तब उन्होंने अपने नाम के साथ स्थायी रूप से ‘टाइगर’ जोड़ लिया। आज यही नाम उनकी पहचान बन चुका है। मंझले भाई कृष्ण कुमार सिंह बताते हैं कि बचपन से ही उनमें देश सेवा की भावना थी। वह मांस-मछली का सेवन नहीं करते और पूरी तरह शुद्ध शाकाहारी भोजन पसंद करते हैं। परिवार ने कई बार उनकी शादी कराने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने साफ कह दिया कि वह शादी के बंधन में नहीं बंधेंगे। उनका मानना था कि उन्हें अपना जीवन समाज और देश सेवा को समर्पित करना है। परिवार वालों के अनुसार, संजय सिंह ने मजाक में कई बार कहा था कि वह टिकुली-सिंदूर में नहीं लटपटाएंगे। यही कारण है कि 55 साल की उम्र में भी उन्होंने विवाह नहीं किया। बड़े भाई भी विधायक रह चुके हैं संजय सिंह के जीवन का सबसे खास पहलू उनका सामाजिक समर्पण है। परिवार के लोगों का दावा है कि वह अपनी आंख और किडनी दान कर चुके हैं। इसके अलावा वह नियमित रूप से हर छह महीने पर रक्तदान भी करते हैं। उनके भाई बताते हैं कि बेहद ईमानदार स्वभाव के इंसान हैं और झूठ या गलत काम उन्हें बिल्कुल पसंद नहीं है। परिवार का कोई सदस्य भी अगर उनसे गलत काम करने को कहे तो वह साफ इनकार कर देते हैं। पढ़ाई में भी वह बचपन से काफी तेज थे और उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद राजनीति में सक्रिय हो गए। उनकी राजनीतिक यात्रा भी काफी दिलचस्प रही है। जब उनके बड़े भाई धर्मपाल सिंह विधायक बने, तभी से संजय सिंह राजनीति में सक्रिय हो गए थे। वर्ष 1985 में उन्होंने भाजपा ज्वॉइन की। उस दौर में अभिनेता और नेता शत्रुघ्न सिंह फैंस क्लब संगठन के अध्यक्ष थे। इसके बाद 2010 के बिहार विधानसभा चुनाव में भाजपा के टिकट पर संदेश विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीतकर वह पहली बार विधायक बने। बाद में उन्होंने आरा विधानसभा क्षेत्र से भी अपनी मजबूत राजनीतिक पकड़ बनाई। पिछले करीब 20 वर्षों से वह आरा शहर में किराए के मकान में रहकर राजनीति कर रहे हैं। क्षेत्र को लोगों को काफी उम्मीदें परिवार के लोग बताते हैं कि मंत्री बनने के बावजूद उनके जीवन में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया है। कृष्ण कुमार सिंह का दावा है कि उन्के बैंक खाते में आज भी सिर्फ 16 से 17 हजार रुपए ही हैं। लोगों ने हमेशा उन्हें निष्काम भाव से समर्थन दिया है और अब क्षेत्र के लोग उनसे विकास की उम्मीद लगाए बैठे हैं। परिवार चाहता है कि वह अपने क्षेत्र में ऐसा काम करें, जिससे आने वाली पीढ़ियां भी उन्हें याद रखें। संजय सिंह के चाचा भरत सिंह कहते हैं कि उन्होंने कभी चापलूसी की राजनीति नहीं की। दोनों चुनाव उन्होंने अपनी ईमानदार छवि के दम पर जीते। गांव और क्षेत्र के लोग उम्मीद कर रहे हैं कि मंत्री बनने के बाद वह सड़क, नाली, शिक्षा, कृषि और कानून व्यवस्था जैसे मुद्दों पर बेहतर काम करेंगे। युवाओं का मानना है कि संजय सिंह टाइगर जैसे नेता आज की राजनीति में कम देखने को मिलते हैं। गांव में उत्सव का माहौल ग्रामीण रौशन कुमार कहते हैं कि संजय सिंह के मंत्री बनने से युवाओं में खास उत्साह है। उनके अनुसार संजय सिंह साफ-सुथरी छवि के नेता हैं और उनसे पूरे शाहाबाद क्षेत्र को काफी उम्मीदें हैं। पड़ोसी श्याम कुमार कहते हैं कि संजय सिंह सादा जीवन और उच्च विचार वाले व्यक्ति हैं, जो समाज के अंतिम पायदान पर खड़े लोगों के लिए काम करने में विश्वास रखते हैं। संजय सिंह टाइगर के मंत्री बनने के बाद उनके पैतृक गांव अमराई नवादा में उत्सव जैसा माहौल है। ग्रामीण इसे होली और दिवाली एक साथ मनाए जाने जैसा बता रहे हैं। घरों में पटाखे फोड़े गए, लोगों ने एक-दूसरे को अबीर लगाकर बधाई दी। गांव के लोगों को उम्मीद है कि उनका “टाइगर” अब मंत्री बनकर पूरे भोजपुर और बिहार का नाम रोशन करेगा।


