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पाकुड़ के महेशपुर थाना क्षेत्र में एक चौकीदार के शव को दफनाने को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया। विवाद के कारण शहरग्राम मुख्य सड़क करीब 12 घंटे तक जाम रही। गुरुवार सुबह प्रशासन ने हस्तक्षेप कर सड़क जाम समाप्त कराया। हालांकि शव दफनाने को लेकर दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन सकी है। प्रशासन लगातार ग्रामीणों और मृतक के स्वजनों से बातचीत कर रहा है। मृतक की पहचान शहरग्राम निवासी चौकीदार भीम सोरेन के रूप में हुई है। उनका निधन पाकुड़ सदर अस्पताल में इलाज के दौरान हुआ था। बुधवार को स्वजन शव को पैतृक गांव पीपरजोड़ी में दफनाने ले गए थे। इसी दौरान विवाद शुरू हो गया। ग्रामीणों के विरोध के बाद सड़क पर रखा शव जानकारी के अनुसार भीम सोरेन के स्वजन पीपरजोड़ी गांव में दफनाने के लिए जमीन पर गड्ढा खोद रहे थे। तभी गांव के कुछ ग्रामीणों ने इसका विरोध शुरू कर दिया। देखते ही देखते मामला बढ़ गया। ग्रामीण शव को वहां दफनाने देने के लिए तैयार नहीं हुए। इसके विरोध में परिजनों ने बुधवार दोपहर चौकीदार के शव को शहरग्राम मुख्य सड़क पर रख दिया। इसके बाद सड़क जाम कर प्रदर्शन शुरू कर दिया गया। सड़क जाम होने से आवागमन पूरी तरह प्रभावित हो गया। सूचना मिलते ही बीडीओ सिद्धार्थ शंकर यादव, सीओ संजय कुमार सिन्हा और थाना प्रभारी रवि शर्मा पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन देर रात तक कोई समाधान नहीं निकल सका। बाद में पाकुड़ के सिविल एसडीओ साइमन मरांडी भी घटनास्थल पहुंचे और ग्रामीणों से बातचीत की। जमीन विवाद को लेकर बढ़ा मामला गुरुवार सुबह प्रशासन ने सड़क से शव हटवाकर जाम समाप्त कराया। मौके पर मौजूद सिविल एसडीओ साइमन मरांडी ने कहा कि शव दफनाने को लेकर ग्रामीणों के बीच आपसी विवाद था। इसी कारण सड़क जाम की स्थिति बनी। उन्होंने कहा कि सभी संबंधित पक्षों के साथ वार्ता जारी है। सहमति बनने के बाद शव दफनाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। ग्रामीणों के अनुसार चौकीदार भीम सोरेन के पिता पीपरजोड़ी गांव में घर जमाई थे। करीब 20 वर्ष पहले किसी विवाद के कारण ग्रामीणों ने भीम सोरेन को उसकी जमीन से बेदखल कर दिया था। अब उनकी मौत के बाद जब स्वजन उसी जमीन में दफनाने पहुंचे तो ग्रामीणों ने इसका विरोध कर दिया। इसी के बाद पूरा मामला विवाद में बदल गया।


