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नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) ने बुधवार को ताजा रिपोर्ट जारी की। इसमें 2024 में हुए अपराधों का ब्योरा है। रिपोर्ट में कानून-व्यवस्था की चुनौतीपूर्ण तस्वीर सामने आई है। वर्ष 2024 में संज्ञेय (गंभीर) अपराधों में करीब 5.8% की गिरावट आई है, लेकिन आर्थिक अपराध, हत्या, गुमशुदगी और रेलवे क्षेत्र से जुड़े अपराधों में वृद्धि ने पुलिस की चिंता बढ़ा दी है। जालसाजी, धोखाधड़ी और बैंक फ्रॉड के मामलों ने राज्य में पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। धोखाधड़ी के 1,927 और जालसाजी के 535 नए मामले सामने आए हैं। 2023 में धोखाधड़ी के 1,630 और जालसाजी के 460 मामले दर्ज हुए थे। वहीं संज्ञेय अपराध 2024 में घटकर 47,250 रह गए। जो 2023 में 50,187 थे। रेलवे अपराध, नया उभरता खतरा रेलवे पुलिस के अधिकार क्षेत्र में अपराधों में तेजी से बढ़ोतरी देखी गई है। ट्रेनों और स्टेशनों पर चोरी, लूट और अन्य आपराधिक घटनाओं ने सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती दी है। वर्ष 2023 में झारखंड में रेलवे पुलिस द्वारा कुल 745 मामले दर्ज किए गए थे। वर्ष 2024 में यह संख्या बढ़कर 1,058 हो गई है। एससी/एसटी के खिलाफ अपराध घटे अनुसूचित जाति और जनजाति के खिलाफ अपराधों में 2024 में कमी दर्ज की गई है। एसटी के खिलाफ 260 और एससी के खिलाफ 566 मामले सामने आए हैं, जो पिछले वर्षों की तुलना में कम हैं। यह गिरावट सकारात्मक संकेत है, लेकिन इन मामलों में चार्जशीट दर अपेक्षाकृत कम होने से न्याय प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। गुमशुदा बच्चों की सुरक्षा बड़ा सवाल 2024 में राज्य से 1,042 बच्चे लापता हुए, जिनमें 639 लड़कियां शामिल हैं। यह आंकड़ा बाल सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। हालांकि, पुलिस ने पुराने मामलों सहित 2,262 लोगों को खोज निकाला है। इसके बावजूद गुमशुदगी की घटनाओं में वृद्धि समाज और प्रशासन दोनों के लिए चिंता का विषय है। मानव तस्करी का दाग नहीं धुल रहा झारखंड के लिए मानव तस्करी एक पुरानी और गंभीर समस्या रही है। 2024 के आंकड़े बताते हैं कि राज्य में एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट्स ने कुल 97 मामले दर्ज किए हैं। इन मामलों में 185 पुरुषों और 97 महिलाओं समेत कुल 282 पीडितों को तस्करों के चंगुल से छुड़ाया गया या वे तस्करी का शिकार हुए।


