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बेगूसराय के पावन गंगा तट सिमरिया घाट पर अंतिम संस्कार के लिए आने वाले लोगों को अब परेशान नहीं होना पड़ेगा। उन्हें गंगा नदी के किनारे सही जगह खोजने की कोई जरूरत नहीं है। आज केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने सिमरिया धाम में 2 विद्युत शव दाह गृह और 4 लकड़ी शव दाह गृह का उद्घाटन किया है। मौके पर उन्होंने कहा कि सिमरिया धाम आस्था और संस्कृति का महत्वपूर्ण केंद्र है। यहां आधुनिक सुविधाओं का विकास श्रद्धालुओं -आमजनों के लिए उपयोगी होगा। विद्युत शवदाह गृह के संचालन से पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा और अंतिम संस्कार की प्रक्रिया अधिक सुविधाजनक होगी। गंगा तट को निर्मल रखना केवल सरकार का नहीं, बल्कि पूरे समाज का दायित्व है, इसका निर्वहन करें। लकड़ी वाले शवदाहगृह में मात्र डेढ़ क्विंटल लकड़ी से दो घंटे में शव जलेगी। जबकि विद्युत शवदाहगृह में एक घंटा समय लगेगा। शव जलने के बाद गंगा में प्रवाहित करने के लिए उसका थोड़ा सा राख परिजनों को मिलेगा। पौधरोपण भी कराने का दिया आदेश शवदाह गृह चालू होने से गंगा के साथ-साथ वायु प्रदूषण भी कम होगा। बीहट नगर परिषद के कार्यपालक अधिकारी सिमरिया धाम में शवदाहगृह चालू रहने से संबंधित बोर्ड सिमरिया धाम के मोड़ पर लगाएं। जिससे यहां आने वाले सभी शव का अंतिम संस्कार शवदाह गृह में हो सके। शेड और पौधरोपण भी संबंधित अधिकारी कराएं। मौके पर डीएम श्रीकांत शास्त्री ने कहा कि शवदाहगृह का निर्माण करने वाली एजेंसी बुडको की ओर से सप्ताह भर बाद इसे संचालन के लिए बीहट नगर परिषद को सौपेंगे। इस अवसर पर एडीएम ब्रजकिशोर चौधरी, बीहट नगर परिषद के उप मुख्य पार्षद ऋषिकेश कुमार, बीडीओ अनुरंजन कुमार सहित अन्य उपस्थित थे। इस दौरान मल्लिक समाज के लोगों ने नवनिर्मित शवदाहगृह का संचालन देने की मांग गिरिराज सिंह से किया है। राजन मल्लिक सहित अन्य ने कहा है कि शवदाह गृह में अंतिम संस्कार होने से हमारे समाज के स्थानीय 200 से अधिक लोग बेरोजगार हो जाएंगे। इसलिए उक्त शवदाहगृह में काम करने के लिए हमलोगों को रखा जाए। बता दें कि सिमरिया धाम के पूर्वी छोर गंगा तट पर मुख्यमंत्री सात निश्चय-दो में नगर विकास के फंड से 10 करोड़ की लागत से लकड़ी से जलने वाली चार शेड और बिजली पर जलने वाली दो शेड का निर्माण किया गया है। शवदाह के दौरान लोगों के बैठने के लिए वेटिंग रूम, पेयजल, लाईट और शौचालय की व्यवस्था रहेगी। इसके साथ ही शवदाह से संबंधित सामानों की दुकानें भी खुलेगी। शव जलाने और इसकी सफाई , देख-रेख को लेकर जल्द ही कर्मचारियों को तैनात किया जाएगा। बुडको के अभियंता ने बताया कि शवदाहगृह की खासियत है कि कम लकड़ी में बेहतर ढंग से शव जलेगी। लकड़ी के अपेक्षा विद्युत शवदाह में कम खर्च पड़ेगी।


