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- The State Paid Rs 12,000 Crore In Income Tax: Dhoni Became Jharkhand’s Biggest Taxpayer This Time Too, Paying Rs 40 Crore In Taxes.
रांची20 घंटे पहले
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झारखंड में वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान करीब 12 हजार करोड़ रुपए का आयकर संग्रह हुआ है। इसमें पड़ोसी राज्य बिहार का योगदान लगभग 8 हजार करोड़ रुपए रहा। प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त, बिहार-झारखंड डॉ. डी. सुधाकर राव ने गुरुवार को बताया कि दोनों राज्यों के लिए संयुक्त रूप से 18,500 करोड़ रुपए का लक्ष्य तय किया गया था। इस बार भी भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धौनी सबसे बड़े व्यक्तिगत आयकरदाता रहे। अनुमानित 40 करोड़ रुपए से अधिक टैक्स भुगतान के साथ धौनी ने झारखंड में सबसे ज्यादा व्यक्तिगत आयकर चुकाया।
झारखंड में आयकर संग्रह की सबसे बड़ी ताकत पब्लिक सेक्टर यूनिट्स (पीएसयू) और बड़े उद्योग रहे। सबसे अधिक टैक्स देने वालों में सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (सीसीएल), भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल) और सेंट्रल माइन प्लानिंग एंड डिजाइन इंस्टीट्यूट (सीएमपीडीआई) शामिल हैं। वहीं निजी क्षेत्र में टाटा कुमिंस और टाटा टिनप्लेट ने भी बड़े स्तर पर टैक्स भुगतान किया। -शेष पेज 9 पर
‘त्रिनेत्र’ तकनीक से टैक्स चोरी पर सख्त नजर एआईएस: एआईएस में पैन से जुड़ी सभी वित्तीय जानकारियां होती हैं। इसमें बैंक ब्याज, डिविडेंड, शेयर ट्रांजेक्शन व विदेश भेजी गई रकम तक का ब्योरा रहता है। अगर कोई आईटीआर में जानकारी छिपाता है, तो विभाग नोटिस भेज सकता है।
रांची, धनबाद और जमशेदपुर में चलेगा आउटरीच प्रोग्राम
आयकर विभाग ने गुरुवार को रांची में बिहार-झारखंड के 100 से अधिक अधिकारियों के साथ कार्यशाला आयोजित की। इसमें नए आयकर अधिनियम-2025 की जानकारी दी गई। करदाताओं की शंकाएं दूर करने के लिए विभाग मई और जून में विशेष आउटरीच प्रोग्राम चलाएगा। रांची, धनबाद और जमशेदपुर में विभाग के अधिकारी सेमिनार और कैंप लगाएंगे। इसमें लोगों को बताया जाएगा कि वे एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (एआईएस) कैसे देखें। पोर्टल पर नज (संदेशों) का जवाब कैसे दें।
एआईयू: एआईयू (फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट) संदिग्ध नकद लेनदेन पर नजर रखती है। अगर कोई व्यक्ति अचानक बैंक खाते में बड़ी रकम जमा करता है या महंगी संपत्ति खरीदता है, तो इसकी सूचना आयकर विभाग तक पहुंच जाती है।
नज : नज आयकर विभाग का सॉफ्ट रिमाइंडर है। जब विभाग को एआईएस या एआईयू के डेटा में गड़बड़ी दिखती है, तो कार्रवाई से पहले करदाता को मैसेज भेजा जाता है। आईटीआर में गलती सुधारने का मौका मिलता है।


