
खास बातें
Jamaat Rise in Bangladesh Helped BJP Win: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों से राजनीतिक पंडित हैरान हैं. आखिर भारत-बांग्लादेश सीमा से सटे गांवों में कैसे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को प्रचंड बहुमत मिली? इन इलाकों में भाजपा की प्रचंड जीत के पीछे केवल ‘मोदी लहर’ नहीं, बल्कि सीमा पार बांग्लादेश में जमात-ए-इस्लामी जैसी कट्टरपंथी ताकतों का बढ़ता प्रभाव और घुसपैठ का गहरा डर सबसे बड़ा कारण रहा. सीमावर्ती मतदाताओं ने इस बार ‘वोट’ को एक सुरक्षा कवच (Fence) की तरह इस्तेमाल किया, ताकि राज्य में एक ऐसी सरकार आये, जो राष्ट्रीय सुरक्षा और सीमा प्रबंधन को प्राथमिकता दे.
सीमा पार का तनाव और बंगाल का ‘ध्रुवीकरण’
बांग्लादेश के सीमावर्ती जिलों में हाल के महीनों में हुई राजनीतिक उथल-पुथल का सीधा असर बंगाल के मतदाताओं पर पड़ा है. सीमा पर बसे गांवों के लोगों का मानना है कि बांग्लादेश में कट्टरपंथियों के मजबूत होने से सीमा पार से अवैध घुसपैठ और तस्करी का खतरा बढ़ गया है. मतदाताओं के एक बड़े वर्ग का मानना है कि केवल भाजपा ही केंद्र के साथ तालमेल बिठाकर सीमा सुरक्षा बल (BSF) को मजबूत कर सकती है और घुसपैठ पर लगाम लगा सकती है.
घुसपैठ रोकने के लिे अभेद्य दीवार का जरिया बना ‘वोट’
रिपोर्ट्स के अनुसार, जिन इलाकों में कभी तृणमूल कांग्रेस (TMC) का एकतरफा दबदबा था, वहां इस बार समीकरण पूरी तरह बदल गये. स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर गुस्सा और डर था कि अनियंत्रित घुसपैठ से इलाके की जनसांख्यिकी (Demography) बदल रही है. भाजपा के एनआरसी और सीएए जैसे मुद्दों ने यहां निर्णायक भूमिका निभायी.
इसे भी पढ़ें : बंगाल में भाजपा की जीत से ढाका में हड़कंप, बांग्लादेशी मीडिया ने बताया ‘बड़ा संकट’, सांसद को डराने लगा शरणार्थी संकट
जमात का असर और और सिंडिकेट राज पर चोट
बांग्लादेश में कट्टरपंथी ताकतों के उभरने की खबरों ने सीमावर्ती हिंदू आबादी के साथ-साथ कई शांतिप्रिय स्थानीय मुस्लिमों को भी सुरक्षा के नाम पर एकजुट किया. सीमावर्ती इलाकों में मवेशी तस्करी और अवैध कारोबार को मिलने वाले कथित राजनीतिक संरक्षण के खिलाफ जनता ने भाजपा को चुनकर अपना विरोध दर्ज कराया.
बंगाल की खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
Jamaat Rise in Bangladesh Helped BJP Win: राष्ट्रीय सुरक्षा बना चुनावी मुद्दा
अमित शाह और शुभेंदु अधिकारी ने अपने प्रचार अभियान में लगातार यह संदेश दिया कि ‘सुरक्षित बंगाल ही सुरक्षित भारत की गारंटी है.’ चुनाव विश्लेषकों का मानना है कि सीमावर्ती जिलों (जैसे उत्तर और दक्षिण 24 परगना, नदिया, मालदा) में भाजपा को मिली बढ़त यह दिखाती है कि लोगों ने स्थानीय मुद्दों से ऊपर उठकर ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ और ‘सांस्कृतिक पहचान’ को वोट दिया है.
शुभेंदु अधिकारी की सरकार से सीमा पर बसे लोगों की उम्मीदें
अब जब बंगाल में भाजपा की सरकार बन चुकी है, तो सीमावर्ती जिलों की उम्मीदें मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी पर टिकी हैं. लोगों को उम्मीद है कि अब सीमाओं पर ‘पॉलिटिकल फेंसिंग’ के साथ-साथ सुरक्षा की ऐसी दीवार खड़ी होगी, जिसे भेदना घुसपैठियों के लिए नामुमकिन होगा.
इसे भी पढ़ें
The post बंगाल में घुसपैठ के डर ने सीमावर्ती गांवों में भाजपा के पक्ष में हुई राजनीतिक ‘घेराबंदी’, जानें इनसाइड स्टोरी appeared first on Prabhat Khabar.


