बाबा कुशेश्वरनाथ मंदिर में डेढ़ लाख श्रद्धालुओं ने किया जलाभिषेक:पूरी रात चलता रहा भजन-कीर्तन और सांस्कृतिक कार्यक्रम; शिव बारात में हजारों लोग हुए शामिल

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दरभंगा के बाबा कुशेश्वरनाथ मंदिर में महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर रविवार को श्रद्धालुओं की आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। करीब डेढ़ लाख श्रद्धालुओं ने बाबा का जलाभिषेक कर सुख-समृद्धि की कामना की। सुबह 4 बजे से जलाभिषेक प्रारंभ हुआ, जो शाम छह बजे तक अनवरत चलता रहा। मंदिर परिसर और आसपास लगभग एक किलोमीटर लंबी लाइन लगी रही। ‘हर-हर महादेव’ और ‘बम-बम भोले’ के जयघोष से पूरा मिथिलांचल गूंजता रहा। शाम में मंदिर से सटे बरगांव से 5 किलोमीटर तक भगवान शिव की भव्य बारात निकाली गई। गाजे-बाजे के साथ निकली बारात झांकियों के माध्यम से शिव-पार्वती विवाह की पौराणिक कथा को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया। भगवान भोलेनाथ, हनुमान, भूत-प्रेत और शिवगणों की वेशभूषा में सजे युवकों ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। गाजे-बाजे, ढोल-नगाड़े और बैंड की धुन पर हजारों लोग नाचते-गाते आगे बढ़ते रहे। ग्रामीणों ने फूल बरसाए और आरती से बारात का स्वागत किया। बाबा कुशेश्वर सेवा संस्था और बरगांव की ओर से निकाली गई इस बारात में स्थानीय व्यवसायियों के सहयोग से झांकी सजाई गई। कोलकाता से आए कलाकारों की टीम ने भी विशेष प्रस्तुति दी। पूरी रात चला भजन-कीर्तन और सांस्कृतिक कार्यक्रम मंदिरों में पूरी रात शिव-विवाह का आयोजन होता रहा। छोटे-बड़े आयोजनों में भजन-कीर्तन, मंगल गीत और नृत्य-नाटिका प्रस्तुत की गई। बहेड़ी के ददरवारा में मिथिलांचल की सुप्रसिद्ध गायिका जूली झा और उनकी टीम ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत कर श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। श्रद्धालु भक्ति संगीत का आनंद लेते नजर आए। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन एवं मंदिर न्यास समिति ने व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की थी। निगरानी के 44 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे। करीब 500 पुलिसकर्मियों की तैनाती, शिवगंगा घाट पर विशेष बैरिकेडिंग और घेराबंदी की गई थी। शिवगंगा घाट पर भव्य गंगा आरती महाशिवरात्रि की संध्या शिवगंगा घाट पर भव्य गंगा आरती का आयोजन हुआ। वैदिक मंत्रोच्चारण, शंखनाद और दीपों की रोशनी से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। आकर्षक लाइटिंग से सजा घाट रातभर जगमगाता रहा। महाशिवरात्रि पर कुशेश्वरस्थान में श्रद्धा, उत्साह और भव्यता का अद्भुत संगम देखने को मिला। प्रशासन और स्थानीय समिति के सहयोग से यह पर्व शांतिपूर्ण, सुरक्षित और सुव्यवस्थित वातावरण में संपन्न हुआ। मिथिला की धरती पर महादेव के जयघोष से आस्था की अलख जगमगा उठी।

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