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बेंगलुरु से मुर्शिदाबाद आ रहे प्रवासी श्रमिक को ट्रेन से फेंका, टीएमसी ने लगाये गंभीर आरोप

बेंगलुरु से मुर्शिदाबाद आ रहे प्रवासी श्रमिक को ट्रेन से फेंका, टीएमसी ने लगाये गंभीर आरोप

Bengali Youth Thrown from Train: पश्चिम बंगाल के एक युवक को कथित तौर पर बांग्ला बोलने की वजह से ट्रेन से फेंक दिया गया. इस बार घटना पश्चिम बंगाल के ही पश्चिम मेदिनीपुर जिले में हुई है. इस मामले को तृणमूल कांग्रेस ने भाषा के नाम पर अपराध से जोड़ा है. सोशल मीडिया साइट एक्स पर एक पोस्ट करते हुए अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (AITC) ने कहा है कि बेंगलुरु से मुर्शिदाबाद लौट रहे युवक पर जानलेवा हमला हुआ है. उसे चलती ट्रेन से फेंक दिया गया.

तृणमूल कांग्रेस ने दी कड़ी प्रतिक्रिया

एक न्यूज चैनल की क्लिप शेयर करते हुए पश्चिम बंगाल की रूलिंग पार्टी ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी. कहा कि ऐसे हमले बंद होने चाहिए. किसी भारतीय नागरिक को उसकी पहचान के आधार पर प्रताड़ित नहीं किया जाना चाहिए. उस पर हमला नहीं होना चाहिए. कानून का राज कायम रहे और दोषियों के खिलाफ जवाबदेही तय होनी चाहिए.

बाखराबाद स्टेशन पर हुई घटना

दरअसल, पश्चिम मेदिनीपुर के बेलदा इलाके में बाखराबाद स्टेशन के पास शेख मनिरुल को ट्रेन से बाहर फेंक दिया गया. उसके हाथ, छाती और पैर में चोट लगी है. उसने पत्रकारों को बताया कि वह बेंगलुरु से हावड़ा जा रही ट्रेन में सवार था. वह वॉशरूम की तरफ जा रहा था. तभी 2 युवकों ने उससे पहचान पत्र मांगा. पैन कार्ड या आधार कार्ड दिखाने को कहा. उसने आधार और पैन दोनों दिखाया. इसके बाद युवक को ट्रेन से बाहर फेंक दिया गया.

बांग्लादेशी नागरिक होने के शक में किया हमला

शेख मनिरुल ने कहा कि युवकों को शक था कि वह (मनिरुल) बांग्लादेशी नागरिक है. इसी संदेह के आधार पर उसके साथ यह अमानवीय व्यवहार किया गया. उसने बताया कि उसे जान से मार डलाने की कोशिश की गयी थी, लेकिन ऊपरवाले की मेहरबानी से वह बच गया. मनिरुल को डिंडा के सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसका इलाज किया.

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पहचान आधारित अपराध पर TMC ने खड़े किये सवाल

जैसे ही यह खबर मीडिया में आयी, ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस हमलावर हो गयी. पार्टी ने अपने ऑफिशियल एक्स हैंडल @AITCofficial से एक पोस्ट किया. इसमें लिखा- पुणे में सुखेन महतो की निर्मम हत्या के बाद भाजपा ने दावा किया था कि बंगाल के लोगों के खिलाफ पहचान आधारित अपराध नहीं हो रहे हैं. एक और चिंताजनक घटना ने इस दावे पर सवाल खड़े कर दिये हैं.

बेंगलुरु से अपने घर लौट रहा था प्रवासी श्रमिक

पार्टी ने आगे लिखा- बताया गया है कि बेंगलुरु से अपने घर मुर्शिदाबाद लौट रहे एक युवा प्रवासी मजदूर से ट्रेन में पैन और आधार जैसे पहचान पत्र मांगे गये. इसके बाद उसे चलती ट्रेन से धक्का दे दिया गया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया.

देश में खत्म हो अविश्वास और शत्रुता का माहौल – टीएमसी

पोस्ट में कहा गया है कि इस तरह की घटनाएं अचानक नहीं होतीं, बल्कि उस राजनीतिक माहौल का परिणाम हैं, जहां बंगालियों और बांग्लादेशियों के बीच फर्क को लेकर भ्रम और संदेह पैदा किया जाता है. जब भाषा और पहचान को शक की नजर से देखा जाता है, तब आम नागरिकों को अपने ही देश में अपनी नागरिकता और पहचान बार-बार साबित करने के लिए मजबूर होना पड़ता है. पार्टी ने इस तरह के अविश्वास और शत्रुता के माहौल को खत्म करने की मांग की है.

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