बिहार सरकार द्वारा सरकारी डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस पर रोक लगाने के निर्देश को लेकर डॉक्टरों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। इसी मुद्दे को लेकर सुपौल सदर अस्पताल परिसर स्थित सीएस कार्यालय वेश्म में की बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिले भर से बड़ी संख्या में सरकारी डॉक्टर शामिल हुए और सरकार के प्रस्तावित निर्णय पर अपनी आपत्ति जताई। बैठक के दौरान डॉक्टरों ने कहा कि सरकार जिस तरह से बिना बातचीत किए निर्णय थोपने की कोशिश कर रही है, उससे चिकित्सकों में असंतोष है। निजी प्रैक्टिस पर रोक का फैसला गलत डॉक्टरों का कहना था कि किसी भी बड़े फैसले से पहले सरकार को संबंधित पक्षों से संवाद करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि सरकार डॉक्टरों के साथ चर्चा करती और आपसी सहमति से कोई रास्ता निकलता, तो स्थिति बेहतर होती। बैठक में मौजूद चिकित्सकों ने कहा कि सरकारी डॉक्टर पहले से ही सीमित संसाधनों और भारी कार्यभार के बीच काम कर रहे हैं। ऐसे में निजी प्रैक्टिस पर पूरी तरह रोक लगाने का फैसला कई व्यावहारिक समस्याएं पैदा कर सकता है। डॉक्टरों ने कहा कि सरकार को चिकित्सकों की समस्याओं और जरूरतों को भी समझना चाहिए। 17 तारीख को पटना में होगा सम्मेलन डॉक्टरों ने बताया कि सरकार के इस फैसले के विरोध में आगामी 17 तारीख को राज्यभर के चिकित्सक पटना जाएंगे, जहां राज्यस्तरीय सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। सम्मेलन में आगे की रणनीति तय की जाएगी और सरकार के समक्ष डॉक्टरों की मांगों को रखा जाएगा। डॉक्टरों ने संकेत दिया कि यदि उनकी बातों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जा सकता है। इस संबंध में सुपौल के सिविल सर्जन ने कहा कि सरकारी डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस पर रोक को लेकर अभी तक विभाग की ओर से कोई विधिवत निर्देश प्राप्त नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि सिविल सर्जन, भाषा के पदेन अध्यक्ष होते हैं और यदि डॉक्टरों द्वारा कोई लिखित सूचना या मांगपत्र दिया जाता है तो उसे सरकार तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।
सरकारी डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस पर रोक का विरोध:सरकार पर निर्णय थोपने का लगाया जा रहा आरोप, 17 को पटना में राज्यस्तरीय सम्मेलन
बिहार सरकार द्वारा सरकारी डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस पर रोक लगाने के निर्देश को लेकर डॉक्टरों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। इसी मुद्दे को लेकर सुपौल सदर अस्पताल परिसर स्थित सीएस कार्यालय वेश्म में की बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिले भर से बड़ी संख्या में सरकारी डॉक्टर शामिल हुए और सरकार के प्रस्तावित निर्णय पर अपनी आपत्ति जताई। बैठक के दौरान डॉक्टरों ने कहा कि सरकार जिस तरह से बिना बातचीत किए निर्णय थोपने की कोशिश कर रही है, उससे चिकित्सकों में असंतोष है। निजी प्रैक्टिस पर रोक का फैसला गलत डॉक्टरों का कहना था कि किसी भी बड़े फैसले से पहले सरकार को संबंधित पक्षों से संवाद करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि सरकार डॉक्टरों के साथ चर्चा करती और आपसी सहमति से कोई रास्ता निकलता, तो स्थिति बेहतर होती। बैठक में मौजूद चिकित्सकों ने कहा कि सरकारी डॉक्टर पहले से ही सीमित संसाधनों और भारी कार्यभार के बीच काम कर रहे हैं। ऐसे में निजी प्रैक्टिस पर पूरी तरह रोक लगाने का फैसला कई व्यावहारिक समस्याएं पैदा कर सकता है। डॉक्टरों ने कहा कि सरकार को चिकित्सकों की समस्याओं और जरूरतों को भी समझना चाहिए। 17 तारीख को पटना में होगा सम्मेलन डॉक्टरों ने बताया कि सरकार के इस फैसले के विरोध में आगामी 17 तारीख को राज्यभर के चिकित्सक पटना जाएंगे, जहां राज्यस्तरीय सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। सम्मेलन में आगे की रणनीति तय की जाएगी और सरकार के समक्ष डॉक्टरों की मांगों को रखा जाएगा। डॉक्टरों ने संकेत दिया कि यदि उनकी बातों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जा सकता है। इस संबंध में सुपौल के सिविल सर्जन ने कहा कि सरकारी डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस पर रोक को लेकर अभी तक विभाग की ओर से कोई विधिवत निर्देश प्राप्त नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि सिविल सर्जन, भाषा के पदेन अध्यक्ष होते हैं और यदि डॉक्टरों द्वारा कोई लिखित सूचना या मांगपत्र दिया जाता है तो उसे सरकार तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।

