पूर्णिया शहर में गुरुवार शाम 7 बजे ब्लैकआउट मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। प्रशासन के निर्देश पर घरों, दुकानों और अन्य प्रतिष्ठानों की सभी लाइटें बंद कर दी गईं, जिससे पूरा शहर कुछ ही मिनटों में अंधेरे में डूब गया। इस दौरान शहरवासियों ने प्रशासन का पूरा सहयोग किया। यह मॉक ड्रिल शाम 7 बजे शुरू हुई। प्रशासन ने पहले ही इसके लिए निर्देश जारी किए थे। लाइटें बंद होते ही बाजार से लेकर मोहल्लों तक हर जगह अंधेरा छा गया। बाजारों में खरीदारी कर रहे लोग जहां थे वहीं रुक गए, जबकि घरों में मौजूद नागरिकों ने भी अपनी रोशनी बंद कर दी। कई लोग स्थिति का जायजा लेने के लिए सड़कों और गलियों में निकले। अनुकूल मौसम के कारण गर्मी कम महसूस हुई, जिससे लोगों ने शांतिपूर्वक निर्देशों का पालन किया। मॉक ड्रिल के दौरान प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी लगातार बाजारों और मुख्य चौराहों पर मौजूद रहकर लोगों को आवश्यक निर्देश देते रहे। बाजार के दुकानदारों ने भी इस अभ्यास को सफल बनाने में प्रशासन का पूरा सहयोग किया। स्थानीय दुकानदार अविनाश शंकर ने बताया कि उन्होंने ठीक 7 बजे अपनी दुकान की सभी लाइटें बंद कर दी थीं। उस समय दुकान पर मौजूद ग्राहकों ने भी धैर्य और अनुशासन का परिचय दिया। शाम 7 बजे का समय बाजार में खरीदारी का मुख्य समय होता है, इसलिए बड़ी संख्या में महिलाएं सड़कों और बाजारों में मौजूद थीं। सब्जी, घरेलू सामान और अन्य आवश्यक वस्तुओं की खरीदारी कर रहीं महिलाओं ने भी संयम बनाए रखा और ब्लैकआउट मॉक ड्रिल को सफल बनाने में अपनी भागीदारी सुनिश्चित की। इस ब्लैकआउट मॉक ड्रिल ने लोगों को आपातकालीन परिस्थितियों में सतर्कता, अनुशासन और प्रशासनिक निर्देशों के पालन का महत्वपूर्ण संदेश दिया। शहरवासियों ने एकजुट होकर इस अभ्यास को सफल बनाया, जिससे यह पूर्णिया में जागरूकता और सहयोग का एक उदाहरण बन गई।
पूर्णिया में ब्लैकआउट मॉक ड्रिल:पूरा शहर अंधेरे में डूबा, नागरिकों ने किया सहयोग
पूर्णिया शहर में गुरुवार शाम 7 बजे ब्लैकआउट मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। प्रशासन के निर्देश पर घरों, दुकानों और अन्य प्रतिष्ठानों की सभी लाइटें बंद कर दी गईं, जिससे पूरा शहर कुछ ही मिनटों में अंधेरे में डूब गया। इस दौरान शहरवासियों ने प्रशासन का पूरा सहयोग किया। यह मॉक ड्रिल शाम 7 बजे शुरू हुई। प्रशासन ने पहले ही इसके लिए निर्देश जारी किए थे। लाइटें बंद होते ही बाजार से लेकर मोहल्लों तक हर जगह अंधेरा छा गया। बाजारों में खरीदारी कर रहे लोग जहां थे वहीं रुक गए, जबकि घरों में मौजूद नागरिकों ने भी अपनी रोशनी बंद कर दी। कई लोग स्थिति का जायजा लेने के लिए सड़कों और गलियों में निकले। अनुकूल मौसम के कारण गर्मी कम महसूस हुई, जिससे लोगों ने शांतिपूर्वक निर्देशों का पालन किया। मॉक ड्रिल के दौरान प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी लगातार बाजारों और मुख्य चौराहों पर मौजूद रहकर लोगों को आवश्यक निर्देश देते रहे। बाजार के दुकानदारों ने भी इस अभ्यास को सफल बनाने में प्रशासन का पूरा सहयोग किया। स्थानीय दुकानदार अविनाश शंकर ने बताया कि उन्होंने ठीक 7 बजे अपनी दुकान की सभी लाइटें बंद कर दी थीं। उस समय दुकान पर मौजूद ग्राहकों ने भी धैर्य और अनुशासन का परिचय दिया। शाम 7 बजे का समय बाजार में खरीदारी का मुख्य समय होता है, इसलिए बड़ी संख्या में महिलाएं सड़कों और बाजारों में मौजूद थीं। सब्जी, घरेलू सामान और अन्य आवश्यक वस्तुओं की खरीदारी कर रहीं महिलाओं ने भी संयम बनाए रखा और ब्लैकआउट मॉक ड्रिल को सफल बनाने में अपनी भागीदारी सुनिश्चित की। इस ब्लैकआउट मॉक ड्रिल ने लोगों को आपातकालीन परिस्थितियों में सतर्कता, अनुशासन और प्रशासनिक निर्देशों के पालन का महत्वपूर्ण संदेश दिया। शहरवासियों ने एकजुट होकर इस अभ्यास को सफल बनाया, जिससे यह पूर्णिया में जागरूकता और सहयोग का एक उदाहरण बन गई।

