पश्चिमी सिंहभूम जिले के सारंडा जंगल में आईईडी विस्फोट में गंभीर रूप से घायल एक दंतैल हाथी की दस दिन के इलाज के बाद मौत हो गई। इस घटना से वन विभाग और वन्यजीव प्रेमियों में चिंता बढ़ गई है। पिछले एक वर्ष के भीतर सारंडा जंगल में आईईडी विस्फोटों से यह छठी हाथी की मौत है, जिससे हाथियों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जानकारी के अनुसार, सारंडा वन क्षेत्र के कोलबोंगा इलाके में यह दंतैल हाथी आईईडी की चपेट में आ गया था। विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि हाथी के एक पैर में गंभीर चोट आई, जिससे वह ठीक से चल-फिर नहीं पा रहा था और उसकी हालत लगातार बिगड़ रही थी। विशेषज्ञ चिकित्सकों की एक टीम कैंप कर रही थी घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की मेडिकल टीम मौके पर पहुंची और लगातार हाथी की निगरानी व उपचार में जुटी थी। पिछले दस दिनों से विशेषज्ञ चिकित्सकों की एक टीम वहीं कैंप कर रही थी, जो हाथी को इंजेक्शन, दवाइयां और आवश्यक उपचार दे रही थी। उसकी सेहत सुधारने के लिए प्रतिदिन एक से डेढ़ क्विंटल सब्जियां और अन्य भोजन भी उपलब्ध कराया जा रहा था। वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि लगातार प्रयासों के बावजूद हाथी की स्थिति में सुधार नहीं हो सका और अंततः उसने दम तोड़ दिया। मृत हाथी के शव का पोस्टमॉर्टम किया जाएगा, जिसके बाद अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। सुबह से ही वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी मौके पर मौजूद हैं। सारंडा जंगल में आईईडी विस्फोटों के कारण हाथियों की लगातार हो रही मौतों ने इस क्षेत्र में वन्यजीव सुरक्षा और वन क्षेत्रों में विस्फोटक उपकरणों के खतरे को लेकर गंभीर चिंताएं बढ़ा दी हैं।
सारंडा जंगल में आईईडी विस्फोट से हाथी की मौत:दस दिन चला इलाज, पैर में आई थी गंभीर चोट; एक साल में 6 हाथियों की हुई मौत
पश्चिमी सिंहभूम जिले के सारंडा जंगल में आईईडी विस्फोट में गंभीर रूप से घायल एक दंतैल हाथी की दस दिन के इलाज के बाद मौत हो गई। इस घटना से वन विभाग और वन्यजीव प्रेमियों में चिंता बढ़ गई है। पिछले एक वर्ष के भीतर सारंडा जंगल में आईईडी विस्फोटों से यह छठी हाथी की मौत है, जिससे हाथियों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जानकारी के अनुसार, सारंडा वन क्षेत्र के कोलबोंगा इलाके में यह दंतैल हाथी आईईडी की चपेट में आ गया था। विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि हाथी के एक पैर में गंभीर चोट आई, जिससे वह ठीक से चल-फिर नहीं पा रहा था और उसकी हालत लगातार बिगड़ रही थी। विशेषज्ञ चिकित्सकों की एक टीम कैंप कर रही थी घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की मेडिकल टीम मौके पर पहुंची और लगातार हाथी की निगरानी व उपचार में जुटी थी। पिछले दस दिनों से विशेषज्ञ चिकित्सकों की एक टीम वहीं कैंप कर रही थी, जो हाथी को इंजेक्शन, दवाइयां और आवश्यक उपचार दे रही थी। उसकी सेहत सुधारने के लिए प्रतिदिन एक से डेढ़ क्विंटल सब्जियां और अन्य भोजन भी उपलब्ध कराया जा रहा था। वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि लगातार प्रयासों के बावजूद हाथी की स्थिति में सुधार नहीं हो सका और अंततः उसने दम तोड़ दिया। मृत हाथी के शव का पोस्टमॉर्टम किया जाएगा, जिसके बाद अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। सुबह से ही वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी मौके पर मौजूद हैं। सारंडा जंगल में आईईडी विस्फोटों के कारण हाथियों की लगातार हो रही मौतों ने इस क्षेत्र में वन्यजीव सुरक्षा और वन क्षेत्रों में विस्फोटक उपकरणों के खतरे को लेकर गंभीर चिंताएं बढ़ा दी हैं।
