Monday, May 18, 2026

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जनता दरबार बंद होने के बाद लौट रहे कई फरियादी:मुख्यमंत्री से मुलाकात नहीं होने पर नाराज दिखे फरियादी, कहा-सिर्फ आवेदन लेते हैं; सुनवाई नहीं होती


मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 15 अप्रैल को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद 17, 18, 20, 21 और 23 अप्रैल को जनता दरबार कार्यक्रम आयोजित किया था। इन कार्यक्रमों में राज्य के अलग-अलग जिलों से पहुंचे लोगों ने अपनी समस्याएं सीधे मुख्यमंत्री के सामने रखी थीं। लेकिन 23 अप्रैल के बाद से जनता दरबार का आयोजन नहीं होने के कारण अब रोजाना बड़ी संख्या में फरियादी पटना स्थित मुख्यमंत्री सचिवालय पहुंच रहे हैं। अपनी समस्याओं के समाधान की उम्मीद लेकर आने वाले लोग मुख्यमंत्री से मुलाकात नहीं होने पर निराश लौट रहे हैं। कई लोगों का कहना है कि जनता दरबार में आवेदन देने के बावजूद अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई और अब दोबारा मुख्यमंत्री से मिलने का भी मौका नहीं मिल पा रहा है। चार हजार आवेदन दे चुके, फिर भी कार्रवाई नहीं- श्रवण कुमार मधुबनी जिले से आए श्रवण कुमार ने बताया कि, वह अमरिका देवी की जमीन और मकान पर कथित कब्जे के मामले को लेकर पिछले तीन दिनों से पटना में भटक रहे हैं। उन्होंने कहा कि, ‘अमरिका देवी की पुश्तैनी खटियानी जमीन और घर पर जबरन कब्जा कर लिया गया है, लेकिन स्थानीय थाना कोई सुनवाई नहीं कर रहा। अब तक करीब चार हजार आवेदन अलग-अलग कार्यालयों में दे चुके हैं, लेकिन न तो भू-माफियाओं की गिरफ्तारी हुई और न ही प्राथमिकी दर्ज की गई।’ श्रवण कुमार ने आरोप लगाया कि, ‘मुख्यमंत्री सचिवालय में आम लोगों को अंदर तक जाने नहीं दिया जाता। मुख्य सचिव माधव सिंह के नाम से चिट्ठी मिलने के बाद उन्हें उम्मीद थी कि मुलाकात हो जाएगी, लेकिन यहां आने पर उनसे भी भेंट नहीं हो सकी।’ महिला सशक्तिकरण के लिए मदद मांगने आए थे- शैलेंद्र चौधरी हिलसा से आए शैलेंद्र चौधरी ने कहा कि, वह पिछले दस वर्षों से अपने एनजीओ के जरिए महिला सशक्तिकरण और सामाजिक कार्य कर रहे हैं। समाज सेवा के कार्य को आगे बढ़ाने के लिए सरकार की योजनाओं से सहायता की उम्मीद लेकर मुख्यमंत्री सचिवालय पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि, चार महीने पहले भी मुख्यमंत्री सचिवालय में आवेदन दिया गया था, लेकिन आज तक कोई जवाब नहीं मिला। जनता दरबार की जानकारी मिलने पर वे मुख्यमंत्री से मिलने पहुंचे थे, लेकिन अब पता चला कि मुख्यमंत्री से मुलाकात नहीं हो पाएगी। भुगतान नहीं मिलने से संस्था बंद होने की कगार पर- राजेश कुमार सासाराम से आए राजेश कुमार ने बताया कि, ‘हमारी संस्था “लोक कल्याण समिति” कई वर्षों से सामाजिक कार्य कर रही है, लेकिन सरकार से भुगतान नहीं मिलने के कारण संस्था के कर्मचारी बेरोजगार होते जा रहे हैं।’ उन्होंने कहा कि, ‘आर्थिक संकट की वजह से कई कर्मचारी काम छोड़ चुके हैं और संस्था का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। हमें भुगतान का आश्वासन तो दिया गया, लेकिन किसी को पैसा नहीं मिला।’
सड़क निर्माण में अनियमितता का आरोप मोहद्दीनगर से आए राम लाल शाह ने हाजीपुर-बछवारा सड़क निर्माण परियोजना में भारी गड़बड़ी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि, ‘सड़क निर्माण के दौरान ठेकेदार के लोग पैसे लेकर कुछ लोगों के मकान बचा रहे हैं, जबकि गरीबों के मकानों की गलत नापी कर उन्हें तोड़ा जा रहा है।’ राम लाल शाह ने आरोप लगाया कि उनका मकान भी गलत तरीके से तोड़ दिया गया। उन्होंने कहा कि, ‘अनुमंडल अधिकारी, अमीन, भू-अर्जन अधिकारी और अंचल अमीन सहित कई अधिकारी इस मामले में मिले हुए हैं।’ जनता दरबार में आवेदन दिया, कोई कार्रवाई नहीं हुई उन्होंने बताया कि 23 अप्रैल को जनता दरबार में मुख्यमंत्री से मिलकर आवेदन दिया था, लेकिन उसके बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। अब लिखित रूप से अनशन पर बैठने की चेतावनी दी है। यदि न्याय नहीं मिला तो मुख्यमंत्री सचिवालय परिसर में ही जान दे देंगे। जनता दरबार बंद होने से बढ़ी परेशानी मुख्यमंत्री सचिवालय पहुंच रहे फरियादियों का कहना है कि जनता दरबार बंद होने के बाद आम लोगों के लिए अपनी शिकायत सीधे मुख्यमंत्री तक पहुंचाना मुश्किल हो गया है। लोगों का आरोप है कि आवेदन तो लिए जा रहे हैं, लेकिन शिकायतों के समाधान की दिशा में कोई ठोस कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही। कई फरियादियों ने कहा कि वे कई दिनों से पटना में रहकर अधिकारियों और नेताओं के कार्यालयों का चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उन्हें सिर्फ आश्वासन मिल रहा है। कई फरियादियों ने कहा कि अगर हमें नया नहीं मिला तो हम यहीं पर मुख्यमंत्री सचिवालय के पास धरना पर बैठेंगे।

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