सीवान में एक ही परिवार के 4 लोगों का रविवार को एक साथ अंतिम संस्कार हुआ। मामला सिसवन थाना क्षेत्र के ग्यासपुर गांव में रविवार की है। घटना उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में पूर्वांचल एक्सप्रेस वे पर खड़े पार्सल ट्रेलर में उनकी कार पीछे से जा भिड़ी। जिसमें एक बुजुर्ग के छोटे बेटे, बहु और 2 पोतियों की मौत हो गई। मृतकों की पहचान ग्यासपुर निवासी प्रेमलाल श्रीवास्तव के बेटे मनीष कुमार श्रीवास्तव (43), उनकी पत्नी कंचन देवी (40), बेटी आस्था (16) और अदिति (11) के रूप में हुई। हादसे में मनीष के दोस्त रघुनाथपुर थाना क्षेत्र के संठी गांव निवासी मनोज कुमार सिंह की भी मौत हो गई। 4 लोगों का एक साथ अंतिम संस्कार…. अब जानें पूरी घटना…. मृतक के बड़े भाई जीवन ने बताया कि मनीष करीब 20 सालों से हरियाणा के फरीदाबाद में रहकर नौकरी करता था। वह पूरे परिवार के साथ अपने नाना के श्राद्धकर्म में शामिल होने 12 मई को हरियाणा के फ़रीदाबाद से छपरा के मशरख थाना के हंसामठ गांव आया था। जहां 13 मई को श्राद्धकर्म में शामिल होने के बाद 14 मई को छपरा स्तिथ अपने ससुराल चला गया और बीते शनिवार 16 मई को करीब 10 बजे अपने एक दोस्त मनोज व पूरे परिवार के साथ खुद के डिजायर कार से फरीदाबाद के लिए निकला तभी दोपहर करीब 2-3 के बीच में यूपी के आजमगढ़ में पूर्वांचल एक्सप्रेस वे पर खड़े पार्सल ट्रेलर में उनकी कार पीछे से जा भिड़ी। टक्कर इतनी भयावह थी कि कार पूरी तरह चकनाचूर हो गई और सभी की मौके पर ही मौत हो गई। ”ऐसा लग रहा था जैसे पूरा शरीर सुन्न पड़ गया हो” मृतक के बड़े भाई जीवन श्रीवास्तव ने बताया कि घटना की सूचना मोबाइल पर मिली तो पहले विश्वास नहीं हुआ। भाई को लगातार फोन लगाया, लेकिन उसने फोन नहीं उठाया। बाद में किसी दूसरे व्यक्ति ने फोन उठाकर हादसे की जानकारी दी। इसके बाद सिसवन थाना और चौकीदार से पुष्टि हुई तो वह दोस्तों के साथ आजमगढ़ के लिए रवाना हो गया। जीवन ने बताया कि जब पुलिस ने जब घटनास्थल पर बनाये वीडियो शव दिखाए तो उनके रोंगटे खड़े हो गए। किसी के चेहरे की पहचान नहीं हो रही थी। शरीर पूरी तरह क्षत-विक्षत हो चुके थे। सिर्फ कपड़े, गाड़ी और आईडी कार्ड से पहचान हो सकी। उन्होंने रोते हुए कहा कि “ऐसा लग रहा था जैसे पूरा शरीर सुन्न पड़ गया हो।” सभी का चेहरा पूरी तरह चिपट गया था और शरीर कई जगह से टूट गया था। भगवान मेरे बेटे को जिंदा कर दे, भले मुझे मौत दे दे – पिता गांव में सबसे दर्दनाक दृश्य उस समय देखने को मिला जब चारों अर्थियों की तैयारी हो रही थी। बुजुर्ग पिता प्रेमलाल बार-बार लोगों से पूछ रहे थे कि आखिर चार अर्थियां एक साथ क्यों सज रही हैं। किसी में उन्हें सच बताने की हिम्मत नहीं हो रही थी। मनीष परिवार का सबसे छोटा बेटा था, पिता बार बार मनीष और जीवन को फोन लगाने के लिए बोल रहे थे। इसी बीच जब एक साथ 2 एम्बुलेंस गांव पहुंची और बेटे-बहू व पोतियों का शव दरवाजे पर उतारा गया तो पिता फूट कर रो पड़े। उन्होंने कांपती आवाज में कहा, “जिस बेटे को जन्म दिया, पाला-पोसा कि वह मुझे कंधा देगा, आज मैं उसी को मुखाग्नि कैसे दूं… भगवान मेरे बेटे को जिंदा कर दे, भले मुझे मौत दे दे।” यह सुन वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें भर आईं। पिता ने मुखाग्नि देने से मना कर दिया मां शिला देवी बार-बार बेहोश हो रही थीं। वह शवों के पास तक नहीं जा सकीं। वहीं जीवन की पत्नी रोते हुए सिर्फ इतना कह रही थी, “अब मुझे बड़ी मां कौन कहेगा?” वहीं जीवन बात करते करते रोने लग रहे थे और बार बार बस ये कह रहे थे कि, ‘मनीष घर का सबसे छोटा बेटा था और सबका दुलारा था। अब उसका पूरा परिवार एक साथ समाप्त हो गया इस जन्म में मेरा अब कोई न भाई रहा और न उसका परिवार। भगवान ने उसको तो परिवार से छीना ही उसके पूरे परिवार को भी छीन लिया अब मुझे भैया-बड़े पापा कहने वाला कोई नहीं बचा।’ अंतिम संस्कार के समय भी माहौल बेहद भावुक हो गया। परिजनों और ग्रामीणों ने पिता से मुखाग्नि देने की बात कही, लेकिन पिता ने इंकार कर दिया, जिसके बाद वहां मौजूद लोंगो ने पिता की भावनाओं को समझते हुए जीवन श्रीवास्तव के बेटे आशीष ने अपने चाचा, चाची और दोनों बहनों की चिता को मुखाग्नि दिलाई। श्मशान घाट पर भी पिता एकदम शान्त और स्तब्ध दिखे कुछ पूछे जाने पर पूछने वाले का चेहरा देखते और घुटते नजर आए। ‘’2 दिन पहले तक पूरा परिवार हंसते-बोलते गांव में था” उधर उसके पड़ोसी विनय त्रिपाठी ने बताया की मनीष फरीदाबाद में विजयनगर सेक्टर 91 में अपने परिवार के साथ रहता था और हम लोग लगभग 15 साल से एक साथ रहते थे। फिलहाल वह दिल्ली के ओखला तुगलकाबाद ICD के एक विदेशी कम्पनी ट्रु वैल्यू कस्टम में एकाउंटेंट का काम करता था। उसकी मौत की खबर से हम सभी गमगीन हैं व फरीदाबाद के आसपास के लोग भी सदमे में है। गांव में हर तरफ सिर्फ सन्नाटा और मातम पसरा है। लोग बार-बार यही कह रहे हैं कि “दो दिन पहले तक पूरा परिवार हंसते-बोलते गांव में था, किसी ने नहीं सोचा था कि वापसी में पूरा परिवार ही खत्म हो जाएगा।”
रोड एक्सीडेंट में मौत, एक साथ उठी 4 अर्थी:सीवान में छोटे बेटे, बहू और पोतियों का अंतिम संस्कार; पिता बोला– भगवान मुझे मौत दे दें
सीवान में एक ही परिवार के 4 लोगों का रविवार को एक साथ अंतिम संस्कार हुआ। मामला सिसवन थाना क्षेत्र के ग्यासपुर गांव में रविवार की है। घटना उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में पूर्वांचल एक्सप्रेस वे पर खड़े पार्सल ट्रेलर में उनकी कार पीछे से जा भिड़ी। जिसमें एक बुजुर्ग के छोटे बेटे, बहु और 2 पोतियों की मौत हो गई। मृतकों की पहचान ग्यासपुर निवासी प्रेमलाल श्रीवास्तव के बेटे मनीष कुमार श्रीवास्तव (43), उनकी पत्नी कंचन देवी (40), बेटी आस्था (16) और अदिति (11) के रूप में हुई। हादसे में मनीष के दोस्त रघुनाथपुर थाना क्षेत्र के संठी गांव निवासी मनोज कुमार सिंह की भी मौत हो गई। 4 लोगों का एक साथ अंतिम संस्कार…. अब जानें पूरी घटना…. मृतक के बड़े भाई जीवन ने बताया कि मनीष करीब 20 सालों से हरियाणा के फरीदाबाद में रहकर नौकरी करता था। वह पूरे परिवार के साथ अपने नाना के श्राद्धकर्म में शामिल होने 12 मई को हरियाणा के फ़रीदाबाद से छपरा के मशरख थाना के हंसामठ गांव आया था। जहां 13 मई को श्राद्धकर्म में शामिल होने के बाद 14 मई को छपरा स्तिथ अपने ससुराल चला गया और बीते शनिवार 16 मई को करीब 10 बजे अपने एक दोस्त मनोज व पूरे परिवार के साथ खुद के डिजायर कार से फरीदाबाद के लिए निकला तभी दोपहर करीब 2-3 के बीच में यूपी के आजमगढ़ में पूर्वांचल एक्सप्रेस वे पर खड़े पार्सल ट्रेलर में उनकी कार पीछे से जा भिड़ी। टक्कर इतनी भयावह थी कि कार पूरी तरह चकनाचूर हो गई और सभी की मौके पर ही मौत हो गई। ”ऐसा लग रहा था जैसे पूरा शरीर सुन्न पड़ गया हो” मृतक के बड़े भाई जीवन श्रीवास्तव ने बताया कि घटना की सूचना मोबाइल पर मिली तो पहले विश्वास नहीं हुआ। भाई को लगातार फोन लगाया, लेकिन उसने फोन नहीं उठाया। बाद में किसी दूसरे व्यक्ति ने फोन उठाकर हादसे की जानकारी दी। इसके बाद सिसवन थाना और चौकीदार से पुष्टि हुई तो वह दोस्तों के साथ आजमगढ़ के लिए रवाना हो गया। जीवन ने बताया कि जब पुलिस ने जब घटनास्थल पर बनाये वीडियो शव दिखाए तो उनके रोंगटे खड़े हो गए। किसी के चेहरे की पहचान नहीं हो रही थी। शरीर पूरी तरह क्षत-विक्षत हो चुके थे। सिर्फ कपड़े, गाड़ी और आईडी कार्ड से पहचान हो सकी। उन्होंने रोते हुए कहा कि “ऐसा लग रहा था जैसे पूरा शरीर सुन्न पड़ गया हो।” सभी का चेहरा पूरी तरह चिपट गया था और शरीर कई जगह से टूट गया था। भगवान मेरे बेटे को जिंदा कर दे, भले मुझे मौत दे दे – पिता गांव में सबसे दर्दनाक दृश्य उस समय देखने को मिला जब चारों अर्थियों की तैयारी हो रही थी। बुजुर्ग पिता प्रेमलाल बार-बार लोगों से पूछ रहे थे कि आखिर चार अर्थियां एक साथ क्यों सज रही हैं। किसी में उन्हें सच बताने की हिम्मत नहीं हो रही थी। मनीष परिवार का सबसे छोटा बेटा था, पिता बार बार मनीष और जीवन को फोन लगाने के लिए बोल रहे थे। इसी बीच जब एक साथ 2 एम्बुलेंस गांव पहुंची और बेटे-बहू व पोतियों का शव दरवाजे पर उतारा गया तो पिता फूट कर रो पड़े। उन्होंने कांपती आवाज में कहा, “जिस बेटे को जन्म दिया, पाला-पोसा कि वह मुझे कंधा देगा, आज मैं उसी को मुखाग्नि कैसे दूं… भगवान मेरे बेटे को जिंदा कर दे, भले मुझे मौत दे दे।” यह सुन वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें भर आईं। पिता ने मुखाग्नि देने से मना कर दिया मां शिला देवी बार-बार बेहोश हो रही थीं। वह शवों के पास तक नहीं जा सकीं। वहीं जीवन की पत्नी रोते हुए सिर्फ इतना कह रही थी, “अब मुझे बड़ी मां कौन कहेगा?” वहीं जीवन बात करते करते रोने लग रहे थे और बार बार बस ये कह रहे थे कि, ‘मनीष घर का सबसे छोटा बेटा था और सबका दुलारा था। अब उसका पूरा परिवार एक साथ समाप्त हो गया इस जन्म में मेरा अब कोई न भाई रहा और न उसका परिवार। भगवान ने उसको तो परिवार से छीना ही उसके पूरे परिवार को भी छीन लिया अब मुझे भैया-बड़े पापा कहने वाला कोई नहीं बचा।’ अंतिम संस्कार के समय भी माहौल बेहद भावुक हो गया। परिजनों और ग्रामीणों ने पिता से मुखाग्नि देने की बात कही, लेकिन पिता ने इंकार कर दिया, जिसके बाद वहां मौजूद लोंगो ने पिता की भावनाओं को समझते हुए जीवन श्रीवास्तव के बेटे आशीष ने अपने चाचा, चाची और दोनों बहनों की चिता को मुखाग्नि दिलाई। श्मशान घाट पर भी पिता एकदम शान्त और स्तब्ध दिखे कुछ पूछे जाने पर पूछने वाले का चेहरा देखते और घुटते नजर आए। ‘’2 दिन पहले तक पूरा परिवार हंसते-बोलते गांव में था” उधर उसके पड़ोसी विनय त्रिपाठी ने बताया की मनीष फरीदाबाद में विजयनगर सेक्टर 91 में अपने परिवार के साथ रहता था और हम लोग लगभग 15 साल से एक साथ रहते थे। फिलहाल वह दिल्ली के ओखला तुगलकाबाद ICD के एक विदेशी कम्पनी ट्रु वैल्यू कस्टम में एकाउंटेंट का काम करता था। उसकी मौत की खबर से हम सभी गमगीन हैं व फरीदाबाद के आसपास के लोग भी सदमे में है। गांव में हर तरफ सिर्फ सन्नाटा और मातम पसरा है। लोग बार-बार यही कह रहे हैं कि “दो दिन पहले तक पूरा परिवार हंसते-बोलते गांव में था, किसी ने नहीं सोचा था कि वापसी में पूरा परिवार ही खत्म हो जाएगा।”


