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West Bengal SIR: कोलकाता. चुनाव आयोग ने बंगाल के सात असिस्टेंट इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर्स (एईआरओ) को तुरंत प्रभाव से निलंबित कर दिया है. इन अधिकारियों पर वोटर लिस्ट सुधारने के काम में लापरवाही और अपनी शक्तियों के गलत इस्तेमाल का आरोप है. भाजपा के वरिष्ठ नेता शुभेंदु अधिकारी ने इस फैसले को एतिहासिक बताया है. सुभेंदु अधिकारी ने कहा कि यह पहली बार है जब चुनाव आयोग ने सीधे सजा देने के अपने कानूनी अधिकार का इस्तेमाल किया है.
अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग
शुभेंदु अधिकारी ने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी सरकार ने इन अधिकारियों को गलत काम करने के लिए उकसाया था. अधिकारी ने चेतावनी दी कि अगर राज्य सरकार ने इन लोगों के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू नहीं की, तो आयोग के पास इनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने का भी अधिकार है. भाजपा नेता ने कहा- इन अधिकारियों ने वेरिफिकेशन के दौरान फर्जी स्कूल सर्टिफिकेट, पैन कार्ड और नोटरी वाले हलफनामे स्वीकार किए.
चुनाव आयोग के बदले सीएम के पास जा रहा फाइल
शुभेंदु अधिकारी ने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के बड़े नेताओं के दबाव और मुख्य सचिव के इशारे पर फर्जी वोटरों के नाम जोड़ने के लिए यह सब किया गया. शुभेंदु ने यह भी कहा कि बंगाल में चुनाव आयोग से जुड़ी फाइलें मुख्य सचिव के दफ्तर के बजाय मुख्यमंत्री के पास भेजी जाती हैं, जो तय करती हैं कि क्या करना है. उन्होंने कहा कि दूसरे राज्यों में ऐसा नहीं होता और प्रधानमंत्री भी चुनाव के दौरान ऐसा हस्तक्षेप नहीं करते.
तृणमूल कांग्रेस ने किया पलटवार
भाजपा नेता के आरोपों पर पलटवार करते हुए तृणमूल कांग्रेस के आईटी सेल प्रमुख देबांग्शु भट्टाचार्य ने कहा कि इन अधिकारियों को इसलिए निशाना बनाया गया, क्योंकि उन्होंने चुनाव आयोग के अनुचित दबाव के आगे झुकने से इनकार कर दिया. उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग भाजपा शासित राज्यों से माइक्रो ऑब्जर्वर भेजकर वोटर लिस्ट में बदलाव करने की कोशिश कर रहा था. टीएमसी ने इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया है.
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