ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट की अपील पर नालंदा जिला औषधि विक्रेता संघ की ओर से राष्ट्रव्यापी हड़ताल का जिले में असर देखने को मिला। बंद के समर्थन में जिले की तमाम दवा दुकानें पूरी तरह से बंद रहीं, जिससे मरीजों और उनके परिजनों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। संघ के पदाधिकारियों के अनुसार, इस एक दिवसीय हड़ताल के कारण जिले में करीब 50 लाख रुपए का दवा कारोबार प्रभावित होने की आशंका जताई गई है। हड़ताल के कारणों के संबंध में बातचीत करते हुए संघ के अध्यक्ष अमरेंद्र कुमार ने बताया कि देश में दवा का व्यापार ड्रग एक्ट के कड़े नियमों के तहत संचालित होता है, जिसमें योग्य डी.फार्मा और बी.फार्मा डिग्री धारकों की मौजूदगी में ही दवाओं का रख-रखाव और बिक्री सुनिश्चित की जाती है। उन्होंने कहा कि कोरोना काल के दौरान आपातकालीन परिस्थितियों को देखते हुए सरकार ने ऑनलाइन दवा आपूर्ति की अनुमति देने वाले दो नोटिफिकेशन जारी किए थे। विडंबना यह है कि कोरोना काल समाप्त होने के बाद भी सरकार द्वारा इस नोटिफिकेशन को रद्द नहीं किया गया है, जिसके विरोध में आज देश भर के दवा विक्रेताओं को सड़क पर उतरना पड़ा है। ऑनलाइन दवा कारोबार से नकली दवाइयों की खेप बढ़ी अध्यक्ष ने ऑनलाइन दवा व्यापार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि इसके माध्यम से बाजार में नकली दवाओं की आमद बेहद बढ़ गई है। बिना वैध डॉक्टर के पर्चे या फर्जी प्रिस्क्रिप्शन के आधार पर धड़ल्ले से दवाएं भेजी जा रही हैं, जिससे मरीजों की सेहत के साथ बड़ा खिलवाड़ हो रहा है। इतना ही नहीं, ऑनलाइन माध्यमों से नशीली दवाओं की आपूर्ति भी आसानी से हो रही है। शेड्यूल एच-1 श्रेणी की दवाएं, जिन्हें कड़े नियमों के तहत सिर्फ पंजीकृत डॉक्टरों के पर्चे और बकायदा रजिस्टर मेंटेन करके ही बेचा जा सकता है, वे भी ऑनलाइन बिना किसी रोक-टोक के उपलब्ध कराई जा रही हैं। ‘ऑनलाइन में दवाईयों का न पक्का बिल होता है, न कोई प्रमाण की वे असली हैं’ दवा विक्रेताओं ने बाजार में भारी छूट पर बेची जा रही दवाओं की प्रामाणिकता पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि ऐसी दवाओं का न तो कोई पक्का बिल होता है और न ही कोई प्रमाण कि वे असली हैं या नकली। संघ ने आम जनता से भी अपील की है कि वे अपनी सेहत की सुरक्षा के लिए केवल उन्हीं नजदीकी दुकानदारों से दवाएं खरीदें जो पक्का बिल देते हों। विक्रेताओं की मांग है कि सरकार ऑनलाइन दवाओं से जुड़े इस नोटिफिकेशन को तुरंत रद्द करे और ड्रग एक्ट के नियमों के अनुसार ही काम सुनिश्चित कराए।
नालंदा में दवा दुकानदारों की हड़ताल का दिखा असर:50 लाख रुपए का कारोबार प्रभावित, औषधि विक्रेता संघ बोला- ऑनलाइन दवा आपूर्ति से बढ़ी नकली दवाइयां
ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट की अपील पर नालंदा जिला औषधि विक्रेता संघ की ओर से राष्ट्रव्यापी हड़ताल का जिले में असर देखने को मिला। बंद के समर्थन में जिले की तमाम दवा दुकानें पूरी तरह से बंद रहीं, जिससे मरीजों और उनके परिजनों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। संघ के पदाधिकारियों के अनुसार, इस एक दिवसीय हड़ताल के कारण जिले में करीब 50 लाख रुपए का दवा कारोबार प्रभावित होने की आशंका जताई गई है। हड़ताल के कारणों के संबंध में बातचीत करते हुए संघ के अध्यक्ष अमरेंद्र कुमार ने बताया कि देश में दवा का व्यापार ड्रग एक्ट के कड़े नियमों के तहत संचालित होता है, जिसमें योग्य डी.फार्मा और बी.फार्मा डिग्री धारकों की मौजूदगी में ही दवाओं का रख-रखाव और बिक्री सुनिश्चित की जाती है। उन्होंने कहा कि कोरोना काल के दौरान आपातकालीन परिस्थितियों को देखते हुए सरकार ने ऑनलाइन दवा आपूर्ति की अनुमति देने वाले दो नोटिफिकेशन जारी किए थे। विडंबना यह है कि कोरोना काल समाप्त होने के बाद भी सरकार द्वारा इस नोटिफिकेशन को रद्द नहीं किया गया है, जिसके विरोध में आज देश भर के दवा विक्रेताओं को सड़क पर उतरना पड़ा है। ऑनलाइन दवा कारोबार से नकली दवाइयों की खेप बढ़ी अध्यक्ष ने ऑनलाइन दवा व्यापार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि इसके माध्यम से बाजार में नकली दवाओं की आमद बेहद बढ़ गई है। बिना वैध डॉक्टर के पर्चे या फर्जी प्रिस्क्रिप्शन के आधार पर धड़ल्ले से दवाएं भेजी जा रही हैं, जिससे मरीजों की सेहत के साथ बड़ा खिलवाड़ हो रहा है। इतना ही नहीं, ऑनलाइन माध्यमों से नशीली दवाओं की आपूर्ति भी आसानी से हो रही है। शेड्यूल एच-1 श्रेणी की दवाएं, जिन्हें कड़े नियमों के तहत सिर्फ पंजीकृत डॉक्टरों के पर्चे और बकायदा रजिस्टर मेंटेन करके ही बेचा जा सकता है, वे भी ऑनलाइन बिना किसी रोक-टोक के उपलब्ध कराई जा रही हैं। ‘ऑनलाइन में दवाईयों का न पक्का बिल होता है, न कोई प्रमाण की वे असली हैं’ दवा विक्रेताओं ने बाजार में भारी छूट पर बेची जा रही दवाओं की प्रामाणिकता पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि ऐसी दवाओं का न तो कोई पक्का बिल होता है और न ही कोई प्रमाण कि वे असली हैं या नकली। संघ ने आम जनता से भी अपील की है कि वे अपनी सेहत की सुरक्षा के लिए केवल उन्हीं नजदीकी दुकानदारों से दवाएं खरीदें जो पक्का बिल देते हों। विक्रेताओं की मांग है कि सरकार ऑनलाइन दवाओं से जुड़े इस नोटिफिकेशन को तुरंत रद्द करे और ड्रग एक्ट के नियमों के अनुसार ही काम सुनिश्चित कराए।

